कुरु कुरु स्वाहा kurukuruswaha के सोमवार के इस नियमित स्तंभ में इस बार हम आपको जो जानकारियां दे रहे हैं उनमें सबसे अहम राज्यपाल Governor से जुड़ी है। साथ ही दतिया उपचुनाव Datia By election के बाद राजनीतिक भूचाल पर तथ्यात्मक विश्लेषण और पुलिस मुख्यालय PHQ की सबसे महत्वपूर्ण शाखा में बदलाव की जानकारी आपसे शेयर करेंगे। राज्य मंत्रिमंडल के साथ भोपाल के अनप्लान विकास की चिंता में कैसे एक नेता निकालता था बीच का रास्ता, यह भी बताएंगे। पढ़िये इस नियमित स्तंभ में इन सब मुद्दों को।
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh के राज्यपाल Governor मंगूभाई पटेल का विगत सात जुलाई को पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। एक महीने से यह सस्पेंस बना हुआ है कि मंगूभाई पटेल ही राज्यपाल Governor बने रहेंगे या कोई नया व्यक्ति राज्यपाल नियुक्त किया जाएगा। पिछले दिनों मोदी सरकार अयोध्या Ayodhya के चंदा चोरी Chanda Chori के मामले से जिस तरह दबाव में आई थी उसके बाद जुलाई में नीट पेपरलीक NEET PAPERLEAK मामले को लेकर जंतर मंतर के छात्र आंदोलन ने मंत्री का इस्तीफा करा दिया। यह कहा जाने लगा कि इन तमाम घटनाक्रमों के चलते केंद्र सरकार ने राज्यपालों की नियुक्ति जैसे मामलों की तरफ देखा ही नहीं। मार्च के महीने में नौ राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति के बाद किसी भी राज्यपाल की नियुक्ति या राज्यों के प्रभार में बदलाव नहीं किया गया। इसी दौरान मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में राज्यपाल Governor मंगूभाई पटेल के पांच साल के कार्यकाल पूरे होने के बाद भी नया कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। इससे यह संस्पेंस खत्म नहीं हो पा रहा है कि राज्यपाल Governor मंगूभाई पटेल को ही काम करने का मौका दिया जा रहा है या किसी नए राज्यपाल Governor की नियुक्ति होने वाली है।
जीता कोई … हारा कोई …. ठीकरा दोनों तरफ फूटा
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में भाजपा BJP के प्रदेश नेतृत्व के परिवर्तन के बाद पहले दतिया उपचुनाव Datia By election में पार्टी प्रत्याशी को हार मिली जिसका ठीकरा पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर फूटने की तैयारी है। हालांकि मिश्रा पहले ही कूटनीति के तहत खुद की राजनीति का पटाक्षेप होने की घोषणा कर पार्टी नेतृत्व को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की हवा निकाल चुके हैं। यही नहीं हारे प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के घर पहुंचकर पार्टी की हार पर दुख जताकर, नामांकन पत्र दाखिल करने के पहले मंच से जिस तरह बिलख बिलखकर रोकर सहानुभूति बटोरी थी, वह एकबार फिर जुटा चुके हैं। वहीं, कांग्रेस Congress ने अपनी जीत के एक दिन पहले पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को निलंबित कर जिस तरह संभावनाओं का गलत आकलन कर बचाव की तैयारी की थी, वह Congress पार्टी प्रत्याशी घनश्याम सिंह के विजय होने से बेकार रही। हालांकि इस कार्रवाई को भारती के चुनाव शुरू होने के दिनों में भरोसेमंद नेता को लेकर दिए गए बयान का बदला भी माना जा रहा है, जिसमें भारती ने जीतू पटवारी से ज्यादा दिग्विजय सिंह व कमलनाथ को भरोसेमंद बताया था। दिलचस्प बात यह है कि जीतने और हारने वाले प्रत्याशियों के उनकी पार्टी के भीतर ही विरोधियों ने काम किया और ठीकरा उन पर फूटा मगर जिसे हार-जीत का जिम्मेदार माना जा रहा है, वह प्रत्याशियों के ऐलान के बाद जितना दुखी था, अब उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान में उसकी जीत की खुशी की स्पष्ट झलक दिखाई दे रही है।
सरकार की आंख कान नाक इंटेलीजैंस चीफ अब कौन …. यादव आगे
Madhya Pradesh सरकार की आंख कान नाक पुलिस की इंटेलीजैंस शाखा होती है। इसका प्रमुख ही सुबह की शुरुआत होते ही मुख्यमंत्री Chief Minister को प्रदेश की अच्छी बुरी खबरों को बताता है और फिर दिन में भी अपडेट करता रहता है। अभी इस शाखा की जिम्मेदारी करीब डेढ़ साल से 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी एडीजी ए साईं मनोहर संभाले हुए हैं मगर इस महीने के अंत में वे रिटायर होने जा रहे हैं। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उनके बाद किस पर भरोसा करते हैं, यह देखना होगा। वैसे इस पद की दौड़ में खेल संचालक अंशुमान यादव सबसे आगे बताए जा रहे हैं तो उज्जैन जोन एडीजी राकेश गुप्ता का नाम भी सीएम Chief Minister के भरोसेमंद अफसरों की सूची में माना जा रहा है। तीसरा नाम एडीजी योगेश चौधरी का है जो अभी प्रबंध व योजना शाखाओं की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। वैसे मुख्यमंत्री Chief Minister भरोसेमंद आईएएस संदीप यादव और भरत यादव को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर देख चुके हैं मगर वे ज्यादा समय उन पदों पर नहीं टिक पाए थे। ऐसे में अंशुमान यादव को इंटेलीजैंस शाखा का प्रभार देने के पहले सीएम Chief Minister सोच सकते हैं और ऐसे में राकेश गुप्ता को मौका मिलने की संभावनाएं ज्यादा हैं। उनके स्थान पर सीएम के भरोसे वाले समझे जाने वाले संतोष सिंह उज्जैन एडीजी बनाए जा सकते हैं क्योंकि 2028 में सिंहस्थ का आयोजन भी होना है और उसकी तैयारियां जोरों से चल रही हैं। यह फैसला इसी सप्ताह होने की बातें कही जा रही हैं।
अब 2028 के मद्देनजर करेंगे मंत्रिमंडल विस्तार …. वरिष्ठ की जगह आ सकते हैं युवा चेहरे
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में मुख्यमंत्री Chief Minister Dr Mohan Yadav डॉ. मोहन यादव व उनके परिवार के जमीन खरीदी मामले और फिर जंतर मंतर में छात्र आंदोलन, संसद के मानसून सत्र जैसी एक के बाद एक परिस्थितियों में प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों से लेकर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं शांत हो गई थीं। 13 अगस्त को संसद का मानसून सत्र खत्म होने के बाद फिर मध्य प्रदेश में नेतृत्व को मजबूत करने के लिए कदम उठाए जाने की बातें सामने आने लगी हैं। दतिया उपचुनाव Datia By election के दौरान पार्टी को अपनों से ही मिले धोखे के बाद भोपाल मास्टर प्लान पर वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पल्ला झाड़ लेने जैसी परिस्थितियां बनी हैं जिससे अब वरिष्ठ नेताओं को किनारे किए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक नियुक्तियों के प्रस्ताव सीएम व Chief Minister Dr Mohan Yadav उनके परिवार की जमीन खरीदी रिपोर्ट प्रकाशित होने से दब गई थी मगर अब वर्तमान परिस्थितियों के साथ 2028 के विधानसभा चुनाव की मजबूत नींव तैयार करने के लिए ऐसी नियुक्तियां जल्द हो सकती हैं। मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में युवा चेहरों को मौका मिलने के संकेत बताए जा रहे हैं। मंत्रिमंडल से महिला सेना अधिकारी पर टिप्पणी करने वाले मंत्री विजय शाह तथा तबादलों को लेकर विभाग बदले जाने से प्रभावित मंत्री लखन पटेल जैसे मंत्रियों की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है तो कई अन्य मंत्रियों के पर कतरकर मुख्यमंत्री Chief Minister Dr Mohan Yadav को केंद्रीय नेतृत्व ताकतवर बना सकता है।
भोपाल अनप्लान सिटी …. बाजारों के पास बस्तियों में व्यवसायिक गतिविधि …. राजनीतिक संरक्षण
चलते चलते आपको बताते हैं कि शताब्दियों पहले जिस तरह किसी राजा महाराजा या नवाब के समय के शहरों का विकास होता था, वैसा ही भोपाल का हो रहा है। भोपाल BHOPAL अनप्लान सिटी Unplan City बन चुका है। 20 साल से बिना मास्टर प्लान के शहर चारों तरफ फैल रहा है। जब तक बाबूलाल गौर जीवित रहे तो उन्होंने सरकारों में रहकर शहर की चिंता की और मास्टर प्लान नहीं होने की बाधा के बावजूद शहर की आवश्यकताओं का अंदाज लगाकर शहरी ट्रांसपोर्ट, शहर की सीमा से लगे स्थानों पर चौड़ी चौड़ी सड़कों का जाल बिछाने के लिए बैठकें किए करते थे। आज जो भी BHOPAL शहर की सड़कें बन रही हैं या मेट्रो व नगरीय वाहन सेवा का काम हो रहा है वह उनकी सोच की देन है। मगर आज बाजारों के सटी आवासीय बस्तियों में व्यवसायिक गतिविधियां पैर पसार रही हैं जिन्हें राजनीतिक संरक्षण नेताओं का है। पूरी अरेरा कॉलोनी से लेकर रोहित नगर, बावड़िया कलां तक तो इंद्रपुरी, सोनागिरी से लेकर रचना नगर, गौतम नगर, शांति निकेतन, जवाहर चौक और अब कोलार रोड व अयोध्या बायपास के आसपास की बस्तियों में व्यवसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही हैं। हाउसिंग बोर्ड, बीडीए, आवास संघ की रहवासी बस्तियों में भी ऐसी व्यवसायिक गतिविधियां चल रही हैं जबकि उनके लीज के नियमों में यह अवैध है। सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में इन गतिविधियों को रोकने के लिए नगर निगम पर दबाव है मगर राजनीतिक संरक्षण के कारण कोई बाल तक बांका नहीं कर पा रहा है। नेताओं की ऐसी हरेक बस्ती में दो चार व्यवसायिक गतिविधि चलती हैं जिनकी वजह से दूसरे लोग भी वही काम शुरू कर देते हैं। कहा जा रहा है कि नेताजी अब उनके नाम पर अपनी दुकानें बचाने में जुटे हैं।
