कुरु कुरु स्वाहा के सोमवार के इस नियमित स्तंभ में इस बार हम आपको जो जानकारियां दे रहे हैं उनमें सबसे अहम भोपाल में वीवीआईपी VVIP की तिरंगा यात्रा Tiranga Yatra से जुड़ी है जिसमें कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, दूसरी जानकारी कांग्रेस congress की कार्यकारिणी की पुनर्गठन प्रक्रिया से संबंधित है तो तीसरी जानकारी भाजपा BJP के मीडिया विभाग को लेकर है। फिर आपको बताएंगे एक आईएएस अधिकारी IAS officer के जिंदाबाद के नारे कहां और क्यों लगे तो अंत में पढ़िये पिछले दिनों के एक चर्चित नेता की गतिविधियों पर राजनीतिक टिप्पणी। आईए हमारे साथ जुड़े रहिये।
तालाब में बोट ने चक्कर क्यों लगाए …. बोट में क्या हुई थी खराबी …. वीवीआईपी सुरक्षा में चूक
स्वतंत्रता दिवस के पूर्व तिरंगा यात्राएं Tiranga Yatra निकाली गई थीं जिनमें से एक तिरंगा यात्रा Tiranga Yatra राजधानी की बड़ी झील में हुई। मुख्यमंत्री मोहन यादव CM Moahan Yadav व मंत्री विश्वास सारंग बोट से झील के भीतर तिरंगा यात्रा Tiranga Yatra की नौकाओं के साथ तिरंगा लहराते हुए दिखाई दिए। वीवीआईपी VVIP जिस बोट में सवार थे वह अचानक झील के बीच में चक्कर लगाने लगी। यह वीवीआईपी VVIP को समझ नहीं आया मगर बोट चला रहे खेल संचालनालय के कोच की सांस ऊपर नीचे होने लगी। बोट चलाने वाले यह कोच वही हैं जिनके खिलाफ मुंबई में एक महिला खिलाड़ी ने यौन शोषण की शिकायत की थी। वीवीआईपी VVIP के सुरक्षित वापस झील किनारे लौटने तक कोच की जान अटकी रही। फिर इस बार कोच महाशय की क्लास घटना के बाद वीवीआईपी VVIP की सुरक्षा में तैनात वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ली। वीवीआईपी VVIP को बोट में बैठाने के पहले बोट की तकनीकी जांच ठीक से नहीं किए जाने पर कोच महाशय को ऐसी फटकार लगी कि उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। वीवीआईपी VVIP की सुरक्षा में चूक में दो बिंदु बताए जा रहे हैं जिनमें से वीवीआईपी VVIP के लिए जो बोट तय थी उसकी तकनीकी जांच में क्या लापरवाही हुई और दूसरा बोट चलाने वाले के रिकॉर्ड की जांच पड़ताल क्या हुई थी या नहीं। खैर जो भी हो वीवीआईपी VVIP की सुरक्षा में इस चूक से अब पुलिस प्रशासन के अफसरों को सबक लेना चाहिए।
कांग्रेस की नई कार्यकारिणी …. 110 पदाधिकारियों की तलाश …. अनुभव के साथ युवा चेहरे
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh कांग्रेस congress कमेटी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी Political affairs commeettee में प्रदेश कार्यकारिणी को बदले जाने की चर्चा होने के बाद अब तेजी से नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की बातें कही जा रही हैं। पुरानी कार्यकारिणी के स्थान पर 110 पदाधिकारियों को मौका दिया जाएगा जिसके लिए नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व व उनके करीबियों की परिक्रमा शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि नई कार्यकारिणी में अनुभव और युवाशक्ति दोनों का सम्मिश्रण होगा। यानी वरिष्ठ नेताओं को भी नई कार्यकारिणी में जिम्मेदारियां दी जाएंगी तो यूथ को भी महत्वपूर्ण पदों के साथ काम सौंपे जाएंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पूर्व विधायक व एआईसीसी के सचिव कुणाल चौधरी, संगठन प्रभारी संजय कामले, पूर्व महामंत्री व पूर्व मीडिया प्रभारी मानक अग्रवाल जैसे और उनके करीबी माने जाने वाले लीडर्स के साथ नई कार्यकारिणी के गठन के लिए गोपनीय ढंग से नेताओं की पैनल तैयार कर रहे हैं जिनमें से छंटनी कर पदाधिकारियों को नियुक्ति दी जाएगी। माना जा रहा है कि जीतू पटवारी प्रदेश में लगातार दौरे कर रहे हैं जिसमें वे संभाग व जिलों में सक्रिय नेताओं की पहचान भी कर रहे है और नई कार्यकारिणी के गठन में उनके ये दौरे भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
आशीष के स्थान पर किसे मिलेगा आशीष …. भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी की दौड़ …. कोठारी बाजपेयी या अन्य
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh भारतीय जनता पार्टी BJP से छह नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में ले लिए जाने के बाद सबसे ज्यादा असर प्रदेश के मीडिया विभाग पर पड़ा है। मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मीडिया विभाग के सह संयोजक बना दिए जाने के बाद प्रदेश के मीडिया विभाग में रिक्तता सी महसूस की जा रही है क्योंकि दिल्ली जाने के बाद भी अभी भी आशीष अग्रवाल ही प्रदेश के मीडिया विभाग का कामकाज वहां से देख रहे हैं। प्रदेश Madhya Pradesh भाजपा के मीडिया प्रभारी को लेकर कई नेताओं के नामों की चर्चा है जिनमें राहुल कोठारी, डॉ. हितेष बाजपेयी, दुर्गेश केसवानी, पंकज चतुर्वेदी शामिल हैं। हालांकि अभी कोठारी सरकार और संगठन के बीच समन्वय की भूमिका को मानकर काम करते हैं तो वे इस पद के लिए खुद दिलचस्पी नहीं लेंगे और केसवानी अपने मौजूदा दायित्व से संतुष्ट हैं। तीसरा नाम पंकज चतुर्वेदी का चर्चा में है जो मोटिवेशनल स्पीकर की भूमिका में भी रहते हैं। ऐसे में चर्चा में चल रहे नाम में डॉ. बाजपेयी ही बचते हैं जो अपोलो सेज हॉस्पिटल से जुड़े हैं। मगर भाजपा BJP कुछ सालों से हमेशा चौंकाने वाले फैसले करने के लिए पहचानी जानी लगी है तो प्रदेश मीडिया प्रभारी का चेहरा भी नया हो सकता है। वैसे इस फैसले में मीडिया विभाग की जिम्मेदारी संभालते हुए राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुए आशीष अग्रवाल की राय को महत्वपूर्ण माने जाने की संभावना जताई जा रही है।
आईएएस अधिकारी अभिषेक सिंह जैसा डीपीआई कमिश्नर हुआ नहीं …. कर्मचारियों के नारों में दिखी झलक
लोक शिक्षण संचालनालय DPI में पिछले दिनों ऐसा नजारा दिखाई दिया जिसकी कल्पना आमतौर पर सरकारी दफ्तरों में नहीं की जाती है। यहां आईएएस अधिकारी अभिषेक सिंह IAS officer Abhishek Singh पदस्थ हैं। मामला प्राथमिक शिक्षा के शिक्षकों की भर्ती के कटऑफ की समय सीमा से जुड़ा है जिसको लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ABVP व करणी सेना के नेता आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान पिछले दिनों दोनों ही संगठन के उत्साही नेता धरने से उठकर लोक शिक्षण संचालनालय DPI में घुस गए। वहां धक्का मुक्की करते हुए वे कमिश्नर अभिषेक सिंह के कक्ष के भीतर चले गए जहां कमिश्नर व आंदोलन करने वालों के बीच गरमा गरमी हो गई और बात तू-तू मैं-मैं तक आ गई तो कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। पुलिस को बुलाया और जब तक पुलिस आती आंदोलन करने वाले लोगों को कर्मचारियों ने दफ्तर से धकेलते हुए गेट के बाहर कर दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने कमिश्नर अभिषेक सिंह IAS officer Abhishek Singh के डटकर आंदोलनकारियों का सामना करने पर जंग जीतने वाले योद्धा जैसा जयघोष के नारों से स्वागत किया। हमारा कमिश्नर डीपीआई कैसा हो, अभिषेक सिंह IAS officer Abhishek Singh जैसा हो। इन नारों को लगाने से रोकने के बजाय अभिषेक सिंह IAS officer Abhishek Singh मुस्कुराते हुए अपनी गाड़ी में बैठकर ऑफिस से चले गए। कर्मचारी और अधिकारियों के बीच ऐसे मधुर संबंध किसी सरकारी दफ्तर में यदा कदा ही देखने को मिलते हैं और फिर शिक्षकों की शिकायतों की फाइलों वाले इस विभाग में ऐसा दृश्य देखकर आपसी तालमेल का अंदाज लगाया जा सकता है। यह तालमेल शिकायत निराकरण के सकारात्मक दिशा में रहे तो ठीक नहीं तो बेचारे शिक्षक चप्पलें घिसकर भी ऐसे विभाग में अपनी समस्या का निपटारा नहीं करा सकते।
नरोत्तम मिश्रा पर सबकी नजर …. घर घर पहुंचकर दे रहे श्रद्धांजलि …. दतिया पहुंचकर फिर जबरदस्त स्वागत
दतिया Datia में भाजपा BJP प्रत्याशी की हार के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा Dr Narrottam Mishra पर सबकी नजरें टिकी हैं। हालांकि वे इन दिनों अलग थलग ही नजर आते हैं। स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पूर्व भोपाल के सरकारी निवास पर उनकी सोशल मीडिया पर तिरंगा लगाते हुए तस्वीर वायरल हुई जिसमें वे अकेले ही दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद अपने समर्थकों के घर पहुंचकर हार फूलों से लदे भी दिखाई दिए मगर दिवंगत नेताओं के परिवारों के बीच पहुंचकर श्रद्धांजलि देते हुए ज्यादा नजर आए। उज्जैन में जहां पूर्व मंत्री पारस जैन के निधन पर उनके निवास पहुंचे तो वहीं ग्वालियर व डबरा में दिवंगत नेताओं के परिवारजनों के बीच भी उनकी उपस्थिति दिखाई दी। अस्पतालों में भर्ती नेताओं के हाल चाल जानने भी नरोत्तम मिश्रा Dr Narrottam Mishra के जाने की तस्वीरों को सोशल मीडिया में देखा गया। वहीं, जब वे हाल ही में दतिया Datia पहुंचे तो उनका ऐसा स्वागत किया गया जैसे किसी नेता को पद मिलने या किसी चुनाव में जीत के बाद अपने शहर पहुंचने पर हार-फूल से लादकर किया जाता है। दतिया में जीत कांग्रेस प्रत्याशी की भले ही हुई हो मगर स्वागत देखकर यह चर्चा जरूर हो रही है कि दतिया Datia विधानसभा चुनाव तो नरोत्तम मिश्रा Dr Narrottam Mishra ही जीते हैं।
