कुरु कुरु स्वाहा Kurukuruswaha के सोमवार के इस नियमित स्तंभ में इस बार हम आपको जो जानकारियां दे रहे हैं उनमें सबसे अहम एक तोप Cannon चोरी की घटना से जुड़ी है। दूसरा मामले में संस्कृति विभाग Department Culture के अधिकारियों के गठजोड़ से सरकार को क्या हो रहा नुकसान बता रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी MP congress committee में कार्यकारिणी पुनर्गठन प्रक्रिया के पहले फैसले के बारे में भी जानकारी आपके जहन में डाल रहे हैं तो राष्ट्रपति पदक President madal की अनुशंसाओं पर सवाल कैसे खड़े होते हैं, यह भी बता रहे हैं। चलते चलते आपको बताएंगे कि मोहन सरकार के विरोधियों को कैसे दिया जा सकता है संदेश। आईए हमारे साथ जुड़े रहिये।
भाजपा देश के इतिहास और धरोहर को लेकर बातें तो करती है मगर मध्य प्रदेश में जो धरोहर हैं, उनको लेकर सरकारी अफसरों की चिंता का अंदाज शिवपुरी के नरवर के एक धरोहर की चोरी की घटना में उनके रवैये से लगाया जा सकता है। नरवर में करीब साढ़े तीन टन वजन की एक तोप Cannon जुलाई के दूसरे सप्ताह में चोरी हो गई थी। नरवर की तोप Cannon चोरी होने के जिस मामले की हम यहां चर्चा कर रहे हैं, वह कबाड़ी नहीं चुरा सकता है। तोप के वजन से घटना में ट्रक और क्रेन जैसे भारी वाहनों के इस्तेमाल होने की आशंका होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। मगर एक महीने पूर्व हुई तोप चोरी की घटना पर विभाग बेफिक्र बैठा दिखाई देता है। मंत्रालय में बैठे संस्कृति विभाग के आला अधिकारी से लेकर पुरातत्व संचालनालय के प्रमुख नौकरशाह इसे बेहद ही हल्के ढंग से ले रहे हैं। वहीं संचालनालय के प्रथम श्रेणी के अधिकारी प्रदेशभर में उपलब्ध धरोहरों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा गार्डों की कमी की बातें कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। इससे यह कहा जा सकता है कि भाजपा के धरोहर के संरक्षण के एजेंडे को प्रदेश की उसकी सरकार में बैठे नौकरशाह पलीता लगाने में जुटे हैं।
संस्कृति विभाग में नौकरशाह राज …. कैलेंडर न आयोजन की गुणवत्ता …. अपनों के लिए खुला कोष
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh के संस्कृति विभाग Department Culture में नौकरशाह राज है जिनमें कुछ अफसर ने रिटायरमेंट के बाद भी अन्य रास्ते से अपनों के लिए कोष खोल रखा है। विभाग प्रमुख एसीएस शिवशेखर शुक्ला हैं जिन्हें विभाग इतना रास आता है कि वे दूसरे विभाग की जिम्मेदारी दिए जाने को सहन नहीं करते। हाल ही में उन्हें गृह विभाग में मुख्य जिम्मेदारी दी गई थी मगर उन्होंने यहां ऐसा काम किया कि फाइलों का अंबार लग गया। वजह संस्कृति विभाग Department Culture प्रेम। वे अतिरिक्त प्रभार वाले संस्कृति विभाग Department Culture को ज्यादा समय देते थे तो उनसे गृह विभाग वापस ले लिया गया। शुक्ला संस्कृति विभाग Department Culture के प्रमुख सचिव के बाद अब अपर मुख्य सचिव भी हैं। यहां संचालक एनपी नामदेव हैं और विभाग से कई दशक तक जुड़े रहने वाले श्रीराम तिवारी मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार बनकर फिर यहां दखल रखने लगे हैं। अफसरों के इस गठजोड़ की वजह से प्रदेश का सांस्कृतिक कैलेंडर पर ध्यान ही नहीं है और आयोजन की गुणवत्ता तो भगवान भरोसे है। भारत भवन से लेकर खजुराहो कार्निवल, खजुराहो नृत्य महोत्सव जैसे आयोजन की खामियों का पुलिंदा भी इनके सेहरे बंध चुका है। यही नहीं संस्कृति Culture संचालनालय के अनुदान को कई कागजी संस्थाओं को बांटने से लेकर लघु फिल्म या डाक्यूमेंट्री बनाने में अपनों को उपकृत करने के आरोपों के घेरे में भी ये लोग हैं। मगर सरकार को चलाने वालों के कृपापात्र होने से इनकी गलतियों को देखकर भी जिम्मेदार अनजान बने हुए हैं।
पटवारी की पीसीसी की पुनर्गठन प्रक्रिया …. मानक फिर मुख्य धारा में …. मिली कुर्सी
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी MP congress committee की पॉलिटिकल एडवाइजरी कमेटी में कार्यकारिणी के पुनर्गठन के फैसले पर अब अमल शुरू होने जा रहा है। पहले विभाग और प्रकोष्ठ को भंग कर दिया गया था। अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद युवा और अनुभवी नेताओं की टीम को चुनने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। कई दशकों के अनुभवी नेता मानक अग्रवाल को पटवारी ने मुख्य धारा में लाने का फैसला किया है। पैदल मार्च के एक राजनीतिक कार्यक्रम के बाद पटवारी पीसीसी MP congress committee लौटे तो मानक अग्रवाल का हाथ पकड़कर तीसरी मंजिल पर ले गए। वहां एक कक्ष में पहुंचकर जीतू पटवारी ने अग्रवाल को कहा कि यह आपका कक्ष है। आप विधायकों व पूर्व विधायकों से समन्वय करेंगे। पटवारी ने अपनी कार्यकारिणी के पुनर्गठन की दिशा में यह कदम तो उठा लिया है मगर पूर्व पदाधिकारियों को अभी स्पष्ट संदेश नहीं दिया गया है कि वे काम करते रहें या नहीं।
राष्ट्रपति पदक की अनुशंसाएं सवालों के घेरे में …. स्टिंग ऑपरेशन में फंसी टीम के लीडर को मिला पदक
राष्ट्रपति के पदक President madal पाने वाले पुलिस अधिकारियों की अनुशंसाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। हाल ही में स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति पदक President madal पाने वाले लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर वही अफसर हैं जिनकी टीम एक समाचार पत्र के स्टिंग ऑपरेशन में फंस गई थी। लोकायुक्त की भोपाल विशेष पुलिस स्थापना की जिस टीम का स्टिंग ऑपरेशन किया गया था, उस पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगे थे। उसके बाद लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना में आंतरिक फेरबदल कर दिए गए थे जिसमें राठौर को भोपाल से सागर भेज दिया गया था। यह जरूर है कि राठौर को पदक की अनुशंसा स्टिंग ऑपरेशन के पहले की है मगर टीम लीडर के रूप में उन्हें अपने अधीनस्थों के कामकाज पर नजर रखना चाहिए जिसमें वे नाकाम माने जा सकते हैं। अब 15 अगस्त को जिन 20 पुलिस अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक President madal की घोषणा की गई है उनमें भी लोकायुक्त विशेष पुलिस स्थापना भोपाल के थाना प्रभारी अनिल भदौरिया का नाम है। बाल आरक्षक से भर्ती हुए भदौरिया 11 साल से लोकायुक्त विशेष पुलिस स्थापना में है। वे संगठन व विशेष पुलिस स्थापना के असरदार लोगों के कृपापात्र बताए जाते हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार पहले या राजनीतिक नियुक्तियां …. अब और कितना इंतजार
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh की मोहन सरकार ने राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू किया था मगर मुख्यमंत्री मोहन यादव व उनके नजदीकियों पर जमीन खरीदी को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट से अचानक यह क्रम रुक गया। इसके बाद जंतर मंतर पर जेन जी के आंदोलन से केंद्र सरकार पर युवाओं के साथ विपक्ष ने हमले तेज कर दिए और संसद के मानसून सत्र में मंत्रियों की घेराबंदी हुई तो मध्य प्रदेश Madhya Pradesh सरकार के तमाम निर्णयों पर ब्रेक लग गया। अब जेन जी आंदोलन से उठा विरोध शांत हो गया है और संसद का मानसून सत्र भी समाप्त हो गया है तो एकबार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है। दतिया चुनाव में हार की समीक्षा के बाद मोहन सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों पर जल्द ही फैसला होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में अब सीएम मोहन यादव को मजबूत करने की दिशा दिखाने वाले फैसले से केंद्रीय नेतृत्व विरोधियों को संदेश दे सकता है।
