कुरु कुरु स्वाहा के सोमवार के इस नियमित स्तंभ में इस बार हम आपको यह जानकारियां दे रहे हैं। सबसे पहले बताएंगे सरकारी कर्मचारियों की प्रमोशन की खुशी पर पलीते किस तरह लग रहा है तो मध्य प्रदेश में किस तरह भ्रष्टाचार की चैन का खुलासा हो रहा है। राजनीति की बात करेंगे दतिया विधानसभा उपचुनाव से लेकर भारत स्काउट् गाइड के चीफ कमिश्नर के चुनाव तक की और फिर यह भी बताएंगे कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में एक महामंत्री को मिले कारण बताओ नोटिस के बाद पीसीसी के लिए कौन महत्वपूर्ण है। पढ़िये यह सब-
मध्य प्रदेश में प्रमोशन की हड़बड़ी…. अफसरों की मनमर्जी, अपनों पर मेहरबानी….उत्साह के साथ निराशा….नौकरी छोड़ने तक की तैयारी
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में सरकारी कर्मचारी दस साल से प्रमोशन Pramotion की बाट देख रहे थे और अब जब हाईकोर्ट ने इसका रास्ता खोल दिया है तो ऐसी हड़बड़ी मची है कि दफ्तरों में लगता है कि बस यही काम हो रहा है। सरकारी दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारियों के दिन रात इस काम में जुटे होने से यह भी कहा जाने लगा है कि अगर यह स्टाफ दूसरे सरकारी कामकाज के लिए इसी तरह एकाग्रता दिखाएं तो अफसरों की टेबल पर लंबित फाइलों की इमारत दिखनी बंद हो जाएंगी। वहीं, प्रमोशन Pramotion की इस हड़बड़ी से कई ऑफिसों में अफसर भी मनमानी कर रहे हैं। कई जगह उत्साह के साथ निराशा का माहौल भी दिखाई दे रहा है। वन विभाग MP Forest Department और पुलिस महकमे MP Police में सबसे ज्यादा विसंगतिपूर्ण प्रमोशन Pramotion की शिकायतें हैं। वन विभाग में इंदौर, खंडवा, छिंदवाड़ा और मंडला जैसे जिलों में अफसरों की मनमर्जी की शिकायतें सामने आई हैं। कर्मचारी आंदोलन तक किए गए हैं। इसीके चलते खंडवा में तो सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल को हस्तक्षेप करना पड़ा। फिर सीसीएफ को प्रमोशन Pramotion की जांच के लिए कमेटी बैठानी पड़ी और अब यहां संशोधित प्रमोशन Pramotion List सूची की तैयारी चल रही है। वन विभाग MP Forest Department के अलावा पुलिस MP Police में भी इंदौर से लेकर सागर जिलों में प्रमोशन Pramotion में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं तो Madhya Pradesh पुलिस मुख्यालय की सूची में भी खामी दिखाई दी है। MP Police इंदौर में पुलिस कर्मचारियों ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त को संयुक्त रूप से मिलकर शिकायत की है तो सागर में निराश पुलिसकर्मियों ने नौकरी छोड़ने तक का मन बना लिया है। अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि दस साल की लंबी अवधि मिलने के बाद ऑफिसों की स्थापना शाखाएं आखिर अपने ही स्टाफ का रिकॉर्ड रखने में इतनी लापरवाह कैसी बनी रहीं कि हड़बड़ी मची है और उसमें भी विसंगतियों वाले आदेश निकाले जा रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदारों पर एक्शन लेकर स्पष्ट संदेश देने की आज की जरूरत है।
भारत स्काउट गाइड का अगला चीफ कमिश्नर कौन….चुनाव सितंबर में
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh के भारत स्काउट गाइड Bharat Scouts & Guides के अगले चीफ कमिश्नर के लिए चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि अभी इसका चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है लेकिन सितंबर माह में इसके होने की संभावना है। पूर्व मंत्री पारस जैन दो बार संगठन के चीफ कमिश्नर रहे हैं लेकिन उनके स्वास्थ्य को देखते हुए अब मध्य प्रदेश भारत स्काउट गाइड्स Bharat Scouts & Guides को नया चीफ कमिश्नर मिलने की बात कही जा रही है। संगठन की ओर से भारत स्काउट गाइड्स Bharat Scouts & Guides के केंद्रीय मुख्यालय को चुनाव कार्यक्रम का प्रारूप भेज दिया गया है और राज्य परिषद की बैठक में भी इसे रखा जाएगा। यह उम्मीद की जा रही है कि 23 जुलाई को राज्य परिषद की बैठक में चुनाव कार्यक्रम को फाइनल रूप दे दिया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम के बाद आचार संहिता भी लागू हो जाएगी। चीफ कमिश्नर के लिए पूर्व सांसद अशोक अर्गल और संगठन के मौजूदा कोषाध्यक्ष रमेश शर्मा के नाम अभी चर्चा में हैं मगर भाजपा नेतृत्व ही इस पर अंतिम मुहर लगाएगा। यहां उल्लेखनीय है कि अर्गल संसद में नोट दिखाने वाले सांसदों में से एक हैं और वे पांच बार सांसद रह चुके हैं। गौरतलब है कि भारत स्काउट गाइड Bharat Scouts & Guides चीफ कमिश्नर के चुनाव में शिक्षा विभाग के ज्यादा मतदाता होते हैं और वे ही निर्णायक वोटर माने जाते हैं।
पीसीसी की नजरः प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी का विरोध गंभीर नहीं…. पार्टी से लाइन से हटे दिग्विजय पर बयान अनुशासनहीनता
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh कांग्रेस आज भी दिग्विजय सिंह Digvijay Singh की छाया से बाहर नहीं निकल पा रही है। इसका ताजा उदाहरण एकबार फिर सामने आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके नजदीकियों पर उज्जैन जिले की जमीन गड़बड़ी के आरोपों को लेकर जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार व केंद्रीय नेतृत्व तक आक्रामक था तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह उज्जैन में जाकर सीएम को क्लीनचिट दे आते हैं। तब एआईसीसी ने मामला संभालकर जमीन खरीदी में पटवारी व सिंघार के आरोपों को पार्टी की लाइन बताकर दिग्विजय Digvijay Singh को झटका दिया था। मगर पीसीसी ने दिग्विजय सिंह Digvijay Singh के इस कृत्य पर उनका विरोध करने वाली महिला नेता पीसीसी महामंत्री निधि चतुर्वेदी को पार्टी की लाइन पर बयान देने के बावजूद कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया। कहा जा रहा है कि संगठन महामंत्री संजय कामले Sanjay Kamle को चतुर्वेदी को नोटिस देने के निर्देश पटवारी ने ही दिए थे। इस नोटिस के बाद यह कहा जाने लगा है कि पटवारी को दिग्विजय सिंह Digvijay Singh की इस कदर चिंता है मगर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी Harish Choudry के खिलाफ बोलने वालों पर पीसीसी की चुप्पी क्यों रहती है। Harish Choudry चौधरी हटाओ प्रदेश बचाओ का सोशल मीडिया पर अभियान जैसा चलाने वालों की गतिविधियां अनुशासनहीनता नहीं मानी जाती हैं मगर पार्टी की लाइन पर चलकर बयान देना गलत मानकर नोटिस दे दिया जाता है।
पंचायतों से लेकर थानों की अवैध कमाई तक…. सब इंजीनियर का वीडियो अब कमाई की पर्ची
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में भ्रष्टाचार Corruption का तंत्र इतना गहरी पैठ बना चुका है कि अब उसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को अलग करने की कोशिश पर उसके तारों की गूंज बाहर आने लगती है। पिछले दिनों पंचायतों Panchayat के भ्रष्टाचार Corruption की चैन को मझगंवा की जनपद Janpad Panchayat के एक सब इंजीनियर सतीश समेले ने वीडियो बयान में खोलकर रख दिया था। Janpad Panchayat करीब 33 फीसदी कमीशन की चैन का उन्होंने खुलासा किया था। अब पुलिस महकमे MP Police में थाने के वसूली तंत्र का एक पर्ची ने खुलासा किया है जिसकी जांच भोपाल पुलिस कमिश्नर Bhopal Police Commissinor द्वारा कराई जा रही है। पर्ची में जो वसूली की राशि का आरोप लगाया गया है वह करीब 10 लाख रुपए बताया जा रहा है। अभी तक यह आरोप लगते रहे हैं कि पुलिस में भ्रष्टाचार Corruption के कारण थानों की नीलामी होती है और अपराध संख्या से लेकर थाने के क्षेत्राधिकार के दायरे के आधार पर राशि की बातें कही जाती रही हैं। मगर भोपाल के MP Police कोहेफिजा पुलिस थाने के प्रभारी की वसूली की पर्ची से यह आरोप और गंभीर रूप ले रहे हैं। अगर वसूली की पर्ची में दिए गए आंकड़ों में कुछ सत्यता है तो भोपाल के व्यावसायिक गतिविधियों, घनी बस्ती और गंभीर अपराधों वाले अशोका गार्डन, गौतम नगर, हनुमानगंज, मंगलवारा, टीटी नगर जैसे पुलिस थाने और ज्यादा अमीर माने जा सकते हैं। प्रशासन और MP Police पुलिस को अपना दामन साफ दिखाने के लिए इस तरह की भ्रष्टाचार Corruption की चैन को तोड़ने का दिखावा तो कम से कम करना ही चाहिए जिससे आम आदमी के मन में संवेदनशील प्रशासन और पुलिस की छवि बने।
दतिया में नायक पर सबकी नजरें…. सीएम का बेसब्री से इंतजार
दतिया विधानसभा उपचुनाव Datia By Election में कांग्रेस INC और भाजपा BJP दोनों के लिए कठिन समय चल रहा है। एक ओर भाजपा BJP अपनों को मनाने में ही जुटी है तो दूसरी तरफ कांग्रेस INC भी दूसरी बार टिकट काटे जाने से नाराज हुए अवधेश नायक को मना रही है। नरोत्तम मिश्रा इस कदर दुखी हैं कि खुद को मंच पर ही नहीं संभाल पाए और महिलाओं की तरह फूट फूटकर रो दिए। टिकट कटने के बाद उनके वे समर्थक जो 10 घंटे तक हाईवे पर चक्काजाम कर विरोध जताने से पीछे नहींं हटे थे, इस दृश्य को देखकर वे भीतर ही भीतर घुट रहे हैं। हालांकि भाजपा BJP, संघ विचारधारा वाले अवधेश नायक को अपनी ओर करने के लिए लगातार प्रयास कर नरोत्तम मिश्रा के टिकट काटे जाने से बनी रिक्तता को भरने की कोशिशें कर रही हैं। कहा जाए तो नायक पर कांग्रेस INC और भाजपा BJP दोनों की नजरें गड़ी हैं। यह माना जा रहा है कि नामांकन पत्र दाखिल कराने के बाद से सीएम डॉ. मोहन यादव दतिया नहीं आए हैं और जब भी वे चुनाव प्रचार के लिए आएंगे तो कुछ बड़ा होगा जो चुनाव Datia By Election की दिशा बदलेगा। उस समय कांग्रेस INC को कोई बड़ा झटका देने की रणनीति पर प्रदेश भाजपा BJP का काम चल रहा है। यानी नायक दतिया उपचुनाव Datia By Election में महानायक की भूमिका में हैं जिन पर मतदान तक प्रत्याशियों से ज्यादा ध्यान केंद्रित रहेगा।
