मध्य प्रदेश Madhya Pradesh सरकार की नाक के नीचे राजधानी के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में सरकार से बंद पड़ी इकाइयों की आवंटित जमीन का विभाजन और हस्तांतरण की अनुमति लेने के बाद देश के बड़े औद्योगिक घराने राज्य को अब तक प्रब्याजी की 37 करोड़ रुपए नहीं चुकायी है। देश के औद्योगिक घराने के साथ प्रदेश के कुछ बड़े लोगों ने मिलकर मध्य प्रदेश Madhya Pradesh सरकार से इस राशि को माफ करने की जोड़ तोड़ शुरू कर दी है। प्रदेश के इन लोगों में समाचार पत्र समूहों के मुखिया भी शामिल हैं। यही वजह है कि जिला उद्योग केंद्र इस राशि की वसूली का सालभर पहले अंतिम नोटिस देने के बाद भूल गया है। पढ़िये इस गड़बड़झाले पर रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh की राजधानी के गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में आवासीय बस्ती मिनाल रेंसीडेंसी से सटी हुई उद्योग विभाग की 24 एकड़ जमीन की कुछ दशक पहले लीज समाप्त हो गई थी। यह जमीन मेसर्स जेके लक्ष्मी सीमेंट लिमिटेड को आवंटित थी। लीज समाप्त होने के बाद पर्दे के पीछे इस जमीन को कुबेर का खजाना बनाने का खेल शुरू हुआ। प्रदेश के समाचार पत्र समूहों News Paper Group के मुखिया और एक उद्योगपति ने मिलकर जेके लक्ष्मी सीमेंट लिमिटेड M/S JK AKSHMI CEMENT LIMITED की आवंटित जमीन पर प्लॉट काटकर बेचने की योजना पर काम शुरू किया। सबसे पहले जमीन के मूल आवंटी जेके लक्ष्मी सीमेंट लिमिटेड M/S JK AKSHMI CEMENT LIMITED को सामने रखते हुए उन्होंने एग्रीमेंट पर अपने प्रभाव से बंद पड़ी इकाइयों को आवंटित जमीन के विभाजन और हस्तांतरण के प्रयास शुरू किए। 2023 में उनके प्रयास सफल हुए और कैबिनेट से उन्हें अनुमति मिल गई।
5000 से 20000 वर्गफीट तक के प्लॉट बेचे
गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र की 24 एकड़ जमीन पर इन लोगों ने अधोसंरचना विकास और ग्रीन बेल्ट तैयार किया। नियमों के आधार जब उन्हें बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को आवंटित जमीन के विभाजन और हस्तांतरण की अनुमति दी गई तो उसमें यह शर्त थी कि अधोसंरचना विकास व ग्रीन बेल्ट की करीब 18 हजार 588 वर्गफीट जमीन की 100 फीसदी प्रब्याजी राज्य शासन को जमा करेंगे। मगर इन लोगों ने 5000 से लेकर 20000 वर्गफीट तक के प्लॉट तो बेच दिए मगर अधोसरंचना विकास व ग्रीन बेल्ट की प्रब्याजी को जमान नहीं किया। इसकी वसूली के लिए जिला उद्योग केंद्र ने पत्र लिखे और 12 अगस्त 2025 को अंतिम पत्र भी लिखा। अंतिम पत्र में जिला उद्योग केंद्र ने राशि की गणना कर 37 करोड़ 17 लाख 76800 रुपए विभागीय मद 0851-00-101-6750 जमा कर चालान की प्रति कार्यालय में देने के आदेश दिए थे। करीब 11 महीने बाद भी सरकार की 37 करोड़ रुपए की राशि जेके लक्ष्मी सीमेंट लिमिटेड M/S JK AKSHMI CEMENT LIMITED द्वारा जमा नहीं की गई है।
पर्दे के पीछे के एग्रीमेंट के कारण जेके को नोटिस
बंद पड़ी इकाइयों की आवंटित जमीन के विभाजन और हस्तांतरण में जेके लक्ष्मी सीमेंट लिमिटेड M/S JK AKSHMI CEMENT LIMITED के स्थानीय प्रतिनिधि गोधरा को जिला उद्योग केंद्र द्वारा नोटिस दिया गया है। जेके लक्ष्मी सीमेंट लिमिटेड ने मध्य प्रदेश Madhya Pradesh जिन समाचार पत्र समूहों के मुखिया और उद्योगपति से एग्रीमेंट किया था, वे जिला उद्योग केंद्र के रिकॉर्ड में दूर दूर तक कहीं नहीं होने से अब जेके लक्ष्मी सीमेंट लिमिटेड M/S JK AKSHMI CEMENT LIMITED को नोटिस भेजे जा रहे हैं। जबकि 24 एकड़ जमीन पर करीब 70 छोटे बड़े प्लॉट काटकर बेचने वाले मध्य प्रदेश Madhya Pradesh के समाचार पत्र समूह के मुखिया और उद्योगपति द्वारा सीधे वसूली की गई है। औद्योगिक क्षेत्र में 70 औद्योगिक व व्यावसायिक इकाइयों को प्लॉट बेचकर इन लोगों द्वारा करीब 150 करोड़ रुपए की आय किए जाने की बात सामने आई है मगर इसके बाद भी राज्य शासन की शर्तों का पालन कर प्रब्याजी राशि जमा करने से ये बच रहे हैं। जिन इकाइयों को जमीन पर प्लॉट दिए गए हैं, उनके हस्तांतरण दस्तावेजों में जेके लक्ष्मी सीमेंट लिमिटेड M/S JK AKSHMI CEMENT LIMITED के स्थानीय प्रतिनिधि गोधरा के हस्ताक्षर हैं।
37 करोड़ की माफी की कोशिशें में जमावट
बताया जाता है कि गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र की 24 एकड़ जमीन पर जिला उद्योग केंद्र द्वारा 37 करोड़ से ज्यादा की जो प्रब्याजी गणना की गई है, उसकी वसूली के लिए जिला उद्योग केंद्र अंतिम पत्र लिखने के बाद अक्टूबर 2025 में एक और पत्र भेजकर चुप बैठ गया है। केंद्र के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में राज्य स्तर पर फैसला होने की बात कहकर चुप्पी साध लेते हैं। उनका कहना है कि राज्य शासन ने आवंटित भूमि के विभाजन और हस्तांतरण की अनुमति दी थी तो प्रब्याजी की राशि की वसूली या अन्य कोई भी फैसला वही कर सकता है। इस राशि को माफ कराने के लिए दिल्ली से लेकर भोपाल के राजनीतिक कार्यालयों व मंत्रालय तक संबंधित लोग अपने माध्यम से चक्कर काट कर रहे हैं मगर अब तक सरकार की ओर से इस दिशा में किसी भी प्रकार की कार्रवाई शुरू नहीं की है।
