नगरीय निकाय Urban local bodies और पंचायत Panchayat चुनाव कराने वाले मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग Madhya Pradesh state ekection commission में विधिक सलाहकार Legal Advisor की संविदा नियुक्ति पर विवाद खड़ा हो गया है। इस संविदा नियुक्ति में मंत्रिपरिषद को गुमराह करने और नियमों के विरुद्ध नियुक्ति दे दिए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री सचिवालय को की गई है। आपको बताते हैं कि पूरा मामला क्या है और फिर भी आयोग क्यों चुप्पी साधे है।
मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों Urban local bodies और पंचायतों Panchayat के चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग Madhya Pradesh state ekection commission की है जिसके आयुक्त रिटायर्ड आईएएस अधिकारी होते हैं। इसमें विधिक सलाहकार Legal Advisor का पद भी होता है जिसमें रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायालय के जज या मौजूदा ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जिसे न्यायलीयन सेवा के समस्त कार्यों का 20 साल का अनुभव हो। मगर मौजूदा विधिक सलाहकार Legal Advisor प्रदीप शुक्ला के बारे में कहा जाता है कि वे इस पद की अहर्ताओं को पूरा नहीं करते हैं जबकि उनके पूर्व के विधिक सलाहकार Legal Advisor पीएन सिंह और जेएन खरे जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश रहे थे।
आवास निगम से आयोग में आए और रिटायरमेंट के बाद संविदा नियुक्ति
प्रदीप शुक्ला राज्य निर्वाचन आयोग Madhya Pradesh state ekection commission में आवास निगम से आए थे और आयोग में पदोन्नत होते होते अवर सचिव तक पहुंचकर रिटायर्ड हुए थे। इसके बाद उन्हें विधिक सलाहकार Legal Advisor की संविदा नियुक्ति दे दी गई। शुक्ला की संविदा नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय के अपर मुख्य सचिव को दी गई शिकायत में कहा गया कि उन्हें न्यायालयीन सेवा के 20 साल का कार्य अनुभव नहीं है और न ही वे रिटायर्ड जिला सत्र न्यायालय के जज ही हैं। वे केवल विधि की परीक्षा पास करने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग state ekection commission के विधिक सलाहकार बना दिए गए हैं।
नियम विरुद्ध सुविधाओं की शिकायत
बताया जाता है कि मुख्यमंत्री सचिवालय में की गई शिकायत में प्रदीप शुक्ला को संविदा नियुक्ति दिए जाने में संविदा नियुक्ति नियम 2017 का उल्लंघन भी किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि शुक्ला को वाहन किराए पर लेकर दी गई है जिसका महीने का खर्च 40 हजार रुपए है जबकि नियमों में यह सुविधा संविदा नियुक्ति पाने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं दी जा सकती। इसके पूर्व विधिक सलाहकार Legal Advisor रहे सिंह व खरे को ही यह सुविधा आयोग ने नहीं दी थी।
छानबीन समिति ने तथ्यों को छिपाने के आरोप
मुख्यमंत्री सचिवालय को की गई शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि विधिक सलाहकार Legal Advisor राज्य निर्वाचन आयोग Madhya Pradesh state ekection commission की संविदा नियुक्ति में छानबीन समिति के सामने सही स्थिति नहीं रखी गई। विधिक सलाहकार Legal Advisor के लिए जो अहर्ताएं होना चाहिए, उनके बारे में छानबीन समिति के सामने वास्तविक स्थिति को नहीं रखा गया। अब यह शिकायत मुख्यमंत्री सचिवालय से राज्य निर्वाचन आयोग state ekection commission के पास पहुंच गई है जो आयोग के सचिव दिनेश सिंह के यहां लंबित है। इस बारे में श्रीवास्तव से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि वे इस बारे में कुछ नहीं बता पाएंगे। देखिये आवास निगम के बाबू से निर्वाचन आयोग केMadhya Pradesh state ekection commission अवर सचिव तक का सफर करने वाले प्रदीप शुक्ला ने रिटायरमेंट के बाद भी संविदा नियुक्ति से लेकर सुविधाओं को उपभोग करने में नियमों को ताक पर रखवा दिया है।
