मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में जंगल में मंगल होता रहता है और इसके जीते जागते उदाहरण राजधानी भोपाल BHOPAL में ही कई हैं। जंगल के बीचों बीच बने शिक्षण संस्थानों के नाम पर इनमें चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बनी सीमेंट कांक्रीट की ऊंची ऊंची इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। एक और उदाहरण पड़ोसी जिले सीहोर Sehore के वीरपुर रेंज का है जहां सरकारी अमले ने जंगल के बीच की जमीन निस्तार भूमि बताकर पर्यटन विभाग को दी और पर्यटन विभाग ने उसे निजी व्यक्ति जो BJP MLA विधायक सुदेश राय बताए जाते हैं को दे दी गई है। हम आपको यह खबर पूर्व आईएफएस अधिकारी IFS OFFICER और सिस्टम परिवर्तन अभियान एनजीओ के माध्यम से जंगल को बचाने में जुटे आजाद सिंह डबास की पीसीसीएफ वन बल प्रमुख को लिखी चिट्ठी के आधार पर दे रहे हैं, पढ़िये वे किन तर्कों से जंगल की जमीन आवंटन की गड़बड़ी और अरबों रुपए की कीमती लकड़ी की कटाई का दावा कर रहे हैं।
IFS OFFICER आजाद सिंह डबास 1999 से 2002 के बीच सीहोर जिले Sehore के डीएफओ थे और वहां के जंगल क्षेत्र की गहराई से जानकारी है। जिस वीरपुर रेंज की बात की जा रही है, उसके बारे में डबास ने IFS OFFICER PCCF पीसीसीएफ वन बल प्रमुख को लिखे पत्र में 50 लाख वर्गफीट जंगल के बीच की जमीन के आवंटन में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया है। आरोप लगाया गया है कि कोलार डेम के पास की जमीन को निस्तार भूमि बताकर पर्यटन विभाग को दिया गया और फिर पर्यटन विभाग ने उस जमीन को निजी व्यक्ति को दे दिया। इस जमीन पर सागौन का जंगल बताया जाता है जिसकी कटाई हो चुकी है।
बीजेपी विधायक के परिवार को कौड़ियों के भाव में जमीन
IFS OFFICER डबास ने बताया है कि निजी व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि भाजपा के विधायक BJP MLA सुदेश राय के परिवार से हैं। पर्यटन विभाग ने जमीन को कौड़ियों के भाव में उस परिवार को दे दिया। अब वहां सुदेश राय का परिवार अपने क्रिसेंट ग्रुप की होटल व वॉटर पार्क के लिए हजारों पेड़ों को काटकर सीमेंट कांक्रीट से ऊंची ऊंची बिल्डिंग खड़ी कर रहे हैं। पूर्व आईएफएस अधिकारी का दावा है कि जिन पेड़ों को होटल व वॉटर पार्क के लिए काटा जा रहा है उनकी कीमत ही एक अरब के आसपास है।
14 माह पूर्व के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन
सीहोर Sehore वन मंडल के पूर्व डीएफओ डबास का कहना है कि मई 2025 में गोदावर्मन विरुद्ध भारत सरकार के केस में पारित निर्णय के बाद IAS ACS अपर मुख्य सचिव वन ने Madhya Pradesh सभी संभाग आयुक्त व कलेक्टरों को पत्र लिखा था। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बारे में बताते हुए निर्देश दिए गए थे कि उनके क्षेत्र की वन विभाग के कब्जे के बाहर वाली ऐसी भूमि जो वन भूमि अधिसूचित है मगर राजस्व भूमि के कब्जे या राजस्व विभाग द्वारा किसी निजी व्यक्ति या संस्था को आवंटित किया गया है या जिस पर अवैध अतिक्रमण है, उसे एक साल के भीतर वन विभाग को देने के आदेश पारित किए जाएं। मगर 14 माह बीतने के बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं होने पर डबास ने वन विभाग के भू अभिलेख शाखा के अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही है।
यारनगर रिसोर्ट का मामला भी दबा तो डबास दिलाई याद
पूर्व आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास ने वीरपुर रेंज के अलावा बुदनी रेंज के यारनगर रिसोर्ट का मामला भी विभाग को याद दिलाया है। वह भी कुछ इसी जंगल के बीच घने जंगल की जमीन पर पेड़ों की कटाई कर बनाया जा रहा था तो Madhya Pradesh तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस पर नाराजगी जताई थी। तब से यहां काम तो रुका है मगर जंगल की जमीन के आवंटन को निरस्त करने या वापस उसे विभाग को सौंपने की दिशा में अब तक कार्रवाई शुरू ही नहीं हुई है। यह मामला देवेंद्र शर्मा से जुड़ा है जो ओशोनिक हॉस्पिटेलिटी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं और बताया जाता है कि यही संस्थान यहां रिसोर्ट व अस्पताल बनाने जा रहा था।
