दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के प्रत्याशी चयन की वजह से राजनीतिक सरगर्मी वाला यह सप्ताह रहा था। इस सप्ताह kurukuruswaha नियमित स्तंभ में हम आपको भाजपा के इस मुद्दे पर लिए गए निर्णय के विशेषात्मक को देने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, पुलिस के बाद विधानसभा MP Vidhan Sabha सचिवालय के कर्मचारियों में बढ़ रही बेगारी परिपाटी पर जानकारी देने की कोशिश है तो पुलिस अधिकारी के परिवार के किसी सदस्य के सरकारी नौकरी में होने से उसके विभाग की अव्यवस्थाओं पर किस तरह पुलिस पर्दा डालने की कोशिश करती है यह जानकारी भी देने का प्रयास है। साथ ही चलते चलते आपको प्रदेश के मुख्य सचिव MP Chief Secretary और पुलिस महानिदेशक MP DGP के नजदीक आ रहे रिटायरमेंट समय से इन पदों पर पदस्थापनाओं की संभावनाओं पर अपनी जानकारी को साझा कर रहे हैं। पढ़िये नियमित स्तंभर और हमारी कुरु कुरु स्वाहा kurukuruswaha की बेवसाइट, इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक को लाइक, शेयर व सब्सक्राइव भी कीजिए।
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में भाजपा MP BJP नेतृत्व एक समय ऐसा ताकतवर था कि उसके अपने निर्णय हुआ करते थे। संघ की मजबूत पृष्ठभूमि से आने की वजह से कुशाभाऊ ठाकरे हों या सुंदरलाल पटवा या कैलाश जोशी जैसे नेताओं के दौर में राजनीति में ज्यादा मौके मिलते रहे। करीब तीन दशक के दौरान पार्टी नेतृत्व की ताकत कम होती गई। 2003 में सरकार बनने तक संघ पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों के राजनीति में आने के बाद भी उनका दमखम वैसा दिखाई नहीं दिया। सरकार में आए लोगों ने और संगठन पर नियंत्रण वाले लोगों ने अस्तित्व की लड़ाई में ताकत दिखाने वाले प्रतिद्वंद्वियों को किनारे करना शुरू कर दिया। इस कड़ी में पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा, गौरीशंकर शेजवार और अजय विश्नोई का नाम प्रमुखता से लिया जाता है तो कुछ दिवंगत नेता जैसे लक्ष्मीकांत शर्मा, बाबूलाल गौर के नामों को भी लोग इस सूची में लेते हैं। हाशिये पर माने जाने वाले कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और नरोत्तम मिश्रा भी हैं मगर अभी ये लोग स्वयं इस तरह की बातों का खंडन करते हैं। कहते हैं कि झांसी गले की फांसी दतिया गले का हार और ललितपुर में तब तक रहियो जब तक मिले उधार…यानी नरोत्तम मिश्रा के लिए दतिया गले का हार ही साबित हुआ और अब वे वापस ग्वालियर की ओर रुख कर राजनीतिक अस्तित्व को बचाने की रणनीति का रास्ता अपना सकते हैं।
नहीं बदल सका ग्रहों की चाल नवग्रह मंदिर और बाबाओं, विद्वानों का आशीर्वाद
राजनीतिक जीवन की उथल पुथल से गुजर रहे पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने ग्रहों को अपने पक्ष में करने के लिए कई बढ़े धार्मिक आयोजन किए। नवग्रह मंदिर बनवाया। भविष्यवक्ताओं, बाबाओं, विद्वानों का आशीर्वाद लिया। मगर उनके ग्रहों की चाल अभी भी वैसे ही है जो 2023 या उसके बाद आज तक है। उन्हें आशीर्वाद देने वालों में दाती मदन महाराज और कथावाचक प्रदीप मिश्रा, देवकीनंदन ठाकुर, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पंडोखर महाराज जैसे बाबाओं से लेकर कुमार विश्वास व अन्य लोग प्रत्यक्ष रूप से उनके यहां पहुंचे थे। मगर इतना सब करने के बाद भी नरोत्तम मिश्रा को पता ही नहीं चला कि भाजपा उनकी जगह दूसरे व्यक्ति को आगे ला रही है। इतना सब होने के बाद सबके सामने वे अपना दर्द दबाकर पार्टी के अनुशासन में रहकर उसके निर्णय को स्वीकार करने को मजबूर दिखाई दिए। यह ग्रहों की चाल है जो बड़े बड़े धार्मिक आयोजन, संतों, बाबाओं की पूजा पाठ, अनुष्ठानों से भी उनकी न तो निगम, मंडल, आयोग या प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्ति हो पाई, न राज्यसभा का टिकट मिला और न ही उपचुनाव में प्रत्याशी बनाए गए। इसीलिए कहते हैं कि समय बड़ा बलवान होता है और उसके आगे किसीकी नहीं चलती।
विधानसभा में बेगारी की परिपाटी …. सचिवालय में काम से बचने नेताओं की नौकरी
सरकारी नौकरी में कई कर्मचारी कार्यालयीन ड्यूटी की जगह अफसरों या नेताओं के दफ्तर या बंगलों पर काम करते हैं। ऐसी संख्या पुलिस में ज्यादा है जहां से केवल सेवारत पुलिस अफसरों के यहां ही नहीं रिटायर्ड अधिकारियों के बंगलों पर एसएएफ के जवान या जिला पुलिस बल के सिपाही काम करने भेजे जाते हैं। मगर यह परिपाटी विधानसभा MP Vidhan Sabha के सचिवालय में भी घर कर चुकी है। एक बार किसी नेता के साथ कोई कर्मचारी ड्यूटी करने जाता है तो वह वहीं का होकर रह जाता है। यहां बताया जाना जरूरी है कि कुछ कर्मचारी पुलिस या विधानसभा MP Vidhan Sabha सचिवालय से डिमांड के आधार पर भेजे जाते हैं तो कुछ कर्मचारियों को नेताजी मांगकर अपने यहां रखते हैं। विधायक से पूर्व विधायक हो जाने पर भी कई एमएलए साहब के यहां विधानसभा सचिवालय के कर्मचारी ड्यूटी कर रहे हैं। राजेंद्र शर्मा, अजय सिंह चंदेल, राहुल अरजरिया, वरुण शर्मा जैसे नाम हैं जो पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा और सुदेश राय जैसे नेताओं के यहां नौकरी कर रहे हैं। वरुण शर्मा ने तीन साल में निर्धारित सीपीटीसी परीक्षा भी उत्तीर्ण नहीं की है जिससे उसकी नौकरी पर ही संकट है क्योंकि निर्धारित अवधि में सीपीटीसी परीक्षा पास नहीं करने पर राज्य सचिवालय के कुछ कर्मचारियों को अपात्र घोषित कर नौकरी से निकाला जा चुका है। है न सही, सैंयां भैये कोतवाल तो डर काहे का।
वर्दी वाले सैंयां के दबदबे का ऐसे मिला सहारा …. घटना पर पर्दा डालने की कोशिश
मध्य प्रदेश पुलिस Madhya Pradesh Police आम जनता से भले ही सकारात्मक रिश्ते निभाने में संकोच करती है मगर अपने अफसर के दबदबे को दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। मामला बच्चों के संरक्षण से जुड़े महकमे का है जिसकी अधिकारी के सैंयां वर्दी वाले हैं। अर्द्धांग्नि के महकमे में कुछ बच्चों ने अपने साथी बच्चों का ऐसा शोषण किया कि वह गंभीर अपराध में बदल गया था। मामला मुख्यमंत्री निवास के समीप का था तो और उसकी प्रवृत्ति ज्यादा गंभीर हो जाती है। अपराध होने की वजह से पुलिस थाने तक बात पहुंचने पर तुरत फुरत पीड़ित बच्चों को औपचारिक कार्रवाई कर वहां से इधर उधर कर दिया गया। रिकॉर्ड में अपराध तो दर्ज हुआ मगर इतना गंभीर मामला होने के बाद भी उसे मीडिया से छिपाया गया। मामला जिस वर्दीधारी अफसर की अर्द्धांग्नि के विभाग का था, वे कुछ साल पहले भोपाल में भी रह चुके हैं तो भोपाल पुलिस के वर्दीधारियों ने घटना पर पर्दा डालने की ज्यादा कोशिशें की। मगर दर्जनभर आरोपियों और उनसे पीड़ित बच्चों की इस घटना के पीछे जाने की और जरूरत है, शायद यह पता चले कि और भी बच्चे इन अपराधी प्रवृत्ति के बच्चों के शिकार हो चुके होंगे।
चार महीने में सीएस और डीजीपी कौन …. एक्सटेंशन या नई कमान
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में अगस्त के पहले सप्ताह में चीफ सेक्रेटरी MP Chief Secretary अनुराग जैन तो दिसंबर के पहले सप्ताह में डीजीपी MP DGP कैलाश मकवाना का कार्यकाल पूरा हो रहा है। दोनों ही अधिकारियों के जन्म वर्ष 1965 हैं मगर चीफ सेक्रेटरी MP Chief Secretary जैन को एक सेवावृद्धि मिल चुकी है तो मकवाना को दो साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। जैन को पिछली बार अंतिम समय में सेवावृद्धि के आदेश जारी हुए थे और इस बार भी यह संभावना जताई जा रही है कि एक बार और उन्हें सेवावृद्धि दी जा सकती है। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पसंद व ईमानदारी की छवि की वजह से दो साल पहले डीजीपीMP DGP बनाए गए मकवाना को एक बार सेवावृद्धि दिए जाने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। वैसे इन दोनों प्रमुख पदों का फैसला दिल्ली से होने लगा है तो सेवावृद्धि नहीं दिए जाने की स्थिति में मुख्य सचिव MP Chief Secretary के लिए वरिष्ठतम राजेश राजौरा हैं और फिर मनोज गोविल, अशोक बर्णवाल, मनु श्रीवास्तव, पंकज अग्रवाल, कांताराव व नीलम शमी राव आते हैं। गोविल व पंकज अग्रवाल के पास 2029 तक का समय है। दूसरी तरफ MP DGP डीजीपी के लिए वरिष्ठतम में वरुण कपूर, उपेंद्र जैन और प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव हैं। देखना यह है कि नए साल में प्रदेश को चीफ सेक्रेटरी और MP DGP डीजीपी दोनों नए चेहरे मिलेंगे या ये ही रहेंगे या कोई एक नया होगा। इसके लिए अभी दो महीने का इंतजार करना होगा।
