आपके लिए इस सप्ताह हम फिर लेकर आए हैं कुछ राजनीतिक, प्रशासनिक गलियारों की खबरें जिनमें विश्लेषणात्मक तथ्य हैं। आप सोमवार को दिया जाने वाला यह स्तंभ कैसा लगा, अपनी टिप्पणी से हमारी हौसला अफजाई करते रहिये और सोशल मीडिया के हमारे इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स व कुरु कुरु स्वाहा वेबसाइट को लाइक, शेयर व सब्सक्राइव कर हमें सहयोग कीजिये।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह Ex CM Digvijay Singh को दिल्ली के नेताओं के निशाने पर रखे जाने के बाद भी मध्य प्रदेश कांग्रेस Madhya Pradesh Congress में जीतू पटवारी Jitu Patwari उनका साथ नहीं छोड़ रहे हैं। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के एक प्रेस कांफ्रेंस Press Conference में नजरअंदाज कर दिए जाने की घटना के कुछ मिनिट बाद ही पटवारी के उन्हें मनाने के दृश्य सभी ने देखे हैं। फिर जैसे तैसे इंडियन एक्सप्रेस की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव CM Mohan Yadav, उनके परिवार व नजदीकियों के जमीनों के सौंदों की रिपोर्ट से जो मुद्दा कांग्रेस के हाथ आया तो दिग्विजय सिंह Ex CM Digvijay Singh ने सीएम यादव के गृह जिले उज्जैन में जाकर ऐसा बयान दिया कि वह पार्टी के हाथ से फिसलते फिसलते बचा। दिल्ली के नेताओं ने दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद सफाई दी और मुख्यमंत्री यादव CM Mohan Yadav, उनके परिवार व नजदीकियों के जमीनों के मामलों में पटवारी के आरोपों को पार्टी की लाइन तक बता दिया। दिल्ली में एआईसीसी मुख्यालय में इस पर प्रेस कांफ्रेंस Press Conference कराकर राष्ट्रीय मुद्दा बनाए रखने के प्रयास किए। मगर इधर मध्य प्रदेश में पीसीसी Madhya Pradesh Congress चीफ जीतू पटवारी Jitu Patwari ने फिर दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए वहां के दौरे में दिग्विजय सिंह Ex CM Digvijay Singh को अपने साथ रखा। यानी दिल्ली के नेताओं के निशाने पर दिग्विजय सिंह Ex CM Digvijay Singh के होने के बाद भी पटवारी के बार बार उन्हें अपने साथ रखने की कोशिशों के पीछे यह चर्चा होने लगी है कि कोई तो मजबूरी है जो जीतू पटवारी Jitu Patwari, दिग्विजय सिंह Ex CM Digvijay Singh की नाराजगी से बचना चाह रहे हैं। वैसे यह कहा भी जाता है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस Madhya Pradesh Congress के राज्यस्तर से लेकर ब्लॉकस्तर तक के संगठन में पकड़ के मामले में आज भी दिग्विजय सिंह को पार्टी के भीतर सबसे मजबूत नेता माना जाता है।
वीडी के उपचुनावों में जीत के रिकॉर्ड, खंडेलवाल को चुनौती
हेमंत खंडेलवाल Hemant Khandelwal की वीडी शर्मा VD Sharma से अब तुलना होने लगी है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा VD Sharma ने रिकॉर्ड 35 उपचुनाव का सामना किया था जिसमें 23 में पार्टी प्रत्याशियों की जीत से उन्हें जीत का शुभंकर माना गया था। हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष के एक साल पूरे करने वाले हेमंत खंडेलवाल Hemant Khandelwal के सामने वीडी शर्मा के इस रिकॉर्ड की चुनौती है। इस महीने होने जा रहे दतिया विधानसभा उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी की जीत या हार उनके संगठन पर पकड़ को साबित करने की परीक्षा जैसा माना जा रहा है। खंडेलवाल Hemant Khandelwal के कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर मीडिया विभाग ने जोर शोर के साथ उनके उजले पक्ष को दिखवाने की जिस रणनीति को अंजाम दिया मगर वह उनकी असल परफार्मेंस रिपोर्ट नहीं कही जा सकती है। वास्तव में खंडेलवाल Hemant Khandelwal को उपचुनाव में हार जीत ही संगठन पर उन्हें मजबूती देगा। मीडिया विभाग इस दिशा में अपने अध्यक्ष के कदम से कदम मिलाकर चलता है, यह जुलाई के दिन बीतने के साथ पता चलेगा।
एक जाते जाते खेल दिखाया दूसरे ने आते ही खेल कर दिया शुरू
स्कूलों में बच्चों को सामाजिक, नैतिक, विज्ञान, गणित के ज्ञान से भरी किताबों को छपवाने वाले मध्य प्रदेश के पाठ्य पुस्तक निगम TBC में इन दिनों अफसरों की मनमानी चल रही है। किताबों को प्रायवेट प्रिंटर्स से छपवाने वाले पाठ्य पुस्तक निगम TBC में शासन ने पिछले दिनों प्रशासनिक फेरबदल कर छह साल से जमे एक आईएएस विनय निगम IAS Vinay Nigam को हटाकर युवा आईएएस अधिकारी रोहित सिंह IAS Rohit Singh पदस्थ किया। विनय निगम IAS Vinay Nigam ने जाते जाते भी प्रिंटर्स को लाभ देने में संकोच नहीं किया। जानकार बताते हैं कि किताबों की छपाई मार्च 2026 तक प्रिंटर्स को करना थी मगर इस समय सीमा में वे काम पूरा नहीं कर पाए। इससे उन्हें हर महीने पेनाल्टी लगाए जाने के प्रावधान थे। पता चला है कि पाठ्य पुस्तक निगम TBC के एक आदेश ने इस प्रावधान से राहत प्रदान कर दी है। कई जीरो वाली पेनाल्टी से प्रिंटर्स को बचा दिया गया। यह खेल तो जाने वाले ने किया मगर आने वाले युवा अधिकारी दो कदम आगे निकल गए हैं। बताया जाता है कि नए साहब पाठ्य पुस्तक निगम TBC में IAS Rohit Singh एमडी के चैंबर को देखकर नाक-मुंह सिकोड़ते नजर आए। उन्होंने अधीनस्थों को मौखिक आदेश दिया कि उनके लिए नया कक्ष तैयार कराया जाए और उसमें ही वे बैठेंगे। आनन फानन में अफसरों ने साहब के आदेश की तामील के लिए काम शुरू कर दिया। कहा जा रहा है कि काम के लिए आए सामान व काम करने वाले लोगों के मजदूरी के हिसाब से नया कक्ष 25 लाख से ज्यादा का पाठ्य पुस्तक निगम TBC को पड़ेगा। काम तो शुरू हो चुका है मगर इसके टेंडर का अता पता नहीं है। देख लीजिए जो संस्था स्कूल के बच्चों के लिए नैतिकता के पाठ वाली किताबें छपवाती है, वहां कामकाज का क्या तरीका है।
प्रमोशन के सूखे समाप्त होने की खुशी कितने दिन की….अगली सुनवाई पर नजरें
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में सरकारी नौकरी में करीब दस साल से प्रमोशन Pramotion का सूखा बना हुआ था मगर पिछले दिनों अदालत के रुख से अधिकारी कर्मचारी के चेहरे खिल गए थे। अब फिर यह कहा जाने लगा है कि यह खुशी ज्यादा दिन की नहीं है। अदालत की अगली सुनवाई में फिर कुछ ऐसा होने की आशंका जताई जा रही है जिससे प्रमोशन पर संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस Madhya Pradesh Police ने प्रमोशन के सूखे को कार्यवाहक पदों से अपने अधिकारियों व कर्मचारियों को राहत दे रखी थी। कुछ समय से यह रुकी हुई थी मगर अदालत के रुख से प्रमोशन का रास्ता खुलने के पहले पुलिस महानिदेशक ने कार्यवाहक पदों के लिए प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दे दिए थे। इसकी प्रक्रिया विशेष सशस्त्र बल, रेडियो जैसे पुलिस Madhya Pradesh Police के अलग संवर्गों में पूरी भी हो चुकी थी और वहां इसका लाभ अधिकारियों व कर्मचारियों को दे दिया गया था। प्रदेश के जिला पुलिस बल में इस प्रक्रिया पर अंतिम मोहर लगने वाली थी कि प्रमोशन का रास्ता खुल गया और वहां कार्यवाहक पदों के अधिकारियों व कर्मचारियों की पदस्थापना के आदेश जारी नहीं हो सके। ऐसे करीब पांच हजार से ज्यादा Madhya Pradesh Police पुलिस कर्मचारी अधर में लटक गए हैं। दूसरी तरफ अदालत के रुख के बाद मंत्रालय से लेकर विधानसभा सचिवालय ने रातों रात प्रमोशन Pramotion की सूचियां तैयार कर जारी कर दी थीं। मगर यह कहा जा रहा है कि अगली सुनवाई में प्रमोशन Pramotion पर पुरानी स्थिति बहाल भी होती है तो पदोन्नति पा चुके अधिकारी कर्मचारी को इसका लाभ मिलेगा या नहीं यह अदालत के रुख पर तय होगा।
मध्य प्रदेश पुलिस को सितंबर में मिलेंगे दो नए डीजी….. इंटेलिजेंस पर सबकी नज़रें
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में सितंबर महीने में करीब आधा दर्जन आईपीएस अधिकारी रिटायर हो रहे हैं। रिटायर होने वाले अधिकारियों में आलोक रंजन और सोनाली मिश्रा केंद्रीय प्रतिनियुक्तियों पर हैं तो दो विशेष पुलिस महानिदेशक अजय शर्मा और आशुतोष राय सहित अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए साईं मनोहर मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में पदस्थ हैं। सितंबर में अजय शर्मा और आशुतोष राय की जगह राजा बाबू सिंह तथा देव प्रकाश गुप्ता विशेष पुलिस महानिदेशक बन रहे हैं। मगर सबकी नज़रें इस समय अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक इंटेलिजेंस पर हैं। माना जा रहा है कि इस पद पर उज्जैन के एडीजी राकेश गुप्ता को सरकार जिम्मेदारी देना चाहती है जो मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव CM Mohan Yadav के विश्वस्त पुलिस अधिकारियों में से एक हैं। हालांकि इस पद की जिम्मेदारी खेल संचालक अंशुमन यादव को दिए जाने की भी चर्चाएं हैं मगर मौजूदा राजनीतिक समीकरणों की वजह से यह पद यादव को मिलने की संभावना कम जान पड़ती है।
