हमारे सोमवार के नियमित स्तंभ में इस बार आपको दे रहे हैं पांच ऐसे घटनाक्रम की सूचनाएं जिनसे राजनीति का बदरंग चेहरा और बदसूरत हो गया है। मोहन यादव Mohan Yadav व उनके परिवार के जमीन खरीदी मामलों से जुड़े दो पहलुओं को इस बार प्रमुखता से दिया जा रहा है तो भोपाल पुलिस के असामाजिक तत्वों के साथ दोस्ताना रिश्तों से उलझे अफसरों के फीके पड़ रहे चेहरों की एक दास्तां बता रहे हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव Chief Minister Dr Mohan Yadav और उनके परिवार की जमीन खरीदी के मामले में एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट से राजनीति में भूचाल आया हुआ है। मगर इस मामले ने राजनीति के जातीय समीकरण के चेहरे को एकबार फिर उजागर कर दिया है। मोहन यादव Mohan Yadav पर सच्चे या झूठे जो भी आरोप लगे हों मगर उनकी पार्टी के मध्य प्रदेश के कई नेताओं ने आरोपों को झूठा करार दिया है जो स्वाभाविक है। आश्चर्य यह तब हुआ जब विपक्ष के यादव समाज से आने वाले नेताओं ने इस मामले में या तो चुप्पी साधकर रखी है या फिर उसे साजिश करार दिया है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव Akhilesh Yadav तो दूसरे ही दिन मीडिया के सामने मोहन यादव Mohan Yadav के खिलाफ भाजपा की साजिश बताते हुए उन्हें क्लीनचिट देते सुनाई दे गए। वहीं, मध्य प्रदेश में भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी विपक्षी पार्टी कांग्रेस के यादव नेताओं की चुप्पी ने राजनीति के जातीय चेहरे पर अमिट छाप छोड़ दी है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव Arun Yadav से लेकर राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह यादव Ashok singh Yadav पार्टी लाइन पर भी बयान देने से बचते नजर आए जबकि अरुण यादव तो सोशल मीडिया पर हर छोटे मोटे मामलों में पोस्ट शेयर करते रहते हैं। पार्टियों की वोट की राजनीति ने भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का जातीय ध्रुवीकरण कर समाज के लोगों को एक तरह से खुली छूट दे दी है।
कल तक कांग्रेस को विभीषण की तलाश थी, आज भाजपा ढूंढ रही….किसने पहुंचाया रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव Chief Minister Dr Mohan Yadav तथा उनके परिवार के जमीन खरीदी मामले में राजस्व का रिकॉर्ड समाचार पत्र के पास पहुंचने पर भाजपा में अधिकांश लोग हक्का बक्का हैं। कल तक राज्यसभा चुनाव में कोर्ट के नोटिस के आधार पर नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस में विभीषण की तलाश की जा रही थी, वही परिस्थितियां भाजपा में बन गई हैं। भाजपा ढूंढ रही है कि कौन विभीषण है जो घर के राज मीडिया तक पहुंचा रहा है। भाजपा में मोहन सरकार के मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ नेताओं से लेकर केंद्र सरकार के मंत्रियों के नाम छुटभैये नेताओं की जुबान पर आने लगे हैं। मुख्यमंत्री Chief Minister अब तक सीधे जवाब देने से बच रहे हैं और उनकी तरफ से तुलसीराम सिलावट, राकेश सिंह, उदयप्रताप सिंह, कृष्णा गौर, प्रद्युम्न सिंह तोमर जैसे मंत्रियों की टीम लेकर भाजपा ने कुछ जाने पहचाने चेहरों जैसे रघुनंदन शर्मा तक को आगे कर दिया है। विभीषण जो भी हो, मगर आरोपों में दम हो तो नैतिक जिम्मेदारी तय की जाना चाहिए।
दिग्विजय ने पार्टी लाइन के खिलाफ बोले….जिस जमीन पर कांग्रेस ने घेरा उसे बताया गलत
मध्य प्रदेश में इन दिनों कांग्रेस में नेता खुलकर बातों ही बातों में पार्टी और आज के राहुल गांधी के करीबियों को आईना दिखाने में विपक्षी पार्टियों के नेताओं को पीछे छोड़ रहे हैं। दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए मीडिया विभाग के अध्यक्ष व सांसद पवन खेड़ा Pawan Khera और मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी MP PCC Chief Jitu Patwari ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव Chief Minister Dr Mohan Yadav के परिवार के जमीन खरीदी मामले को आगे बढ़ाते हुए सीएम के एक करीबी श्रीराम तिवारी को सरकार द्वारा जमीन दिए जाने के आरोप लगाए थे। कहा गया कि 500 करोड़ की जमीन एक रुपए में दे दी गई। कांग्रेस पार्टी के इन आरोपों को पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यसभा सदस्य हो चुके दिग्विजय सिंह Ex CM MP Digvijay Singh ने उज्जैन में प्रेस कांफ्रेंस कर सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कह दिया कि वे बिना प्रमाण के आरोप नहीं लगाते हैं। वीर भारत न्यास को सरकार ने जगह दी है जिसके पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री Chief Minister होते हैं। सिंह ने यहां तक कह दिया कि देश में दलालों की कमी नहीं है। दलाल झूठे आरोप लगाकर पैसे वसूलते हैं। वे रिसर्च के बाद ही कोई बात कहते हैं। दिग्विजय Ex CM MP Digvijay Singh के इस बयान से पवन खेड़ा अप्रत्यक्ष रूप से घिरे हैं क्योंकि उन्होंने वीर भारत न्यास के पहले असम के मुख्यमंत्री Chief Minister हेमंत विस्वास सरमा Himanta Biswa Sarna पर भी आरोप लगाए थे और उन्हें फिर अदालत में खड़े होना पड़ा था। दिग्विजय सिंह Ex CM MP Digvijay Singh का यह बयान पार्टी लाइन के बिलकुल उलट है और एक तरह से उन्होंने न केवल जीतू पटवारी MP PCC Chief Jitu Patwari को आईना दिखाया बल्कि पवन खेड़ा को भी चेताने की कोशिश की है। गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह Ex CM MP Digvijay Singh को कुछ दिन पहले ही राहुल के एक अन्य करीबी समझे जाने वाले प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने पीसीसी में नजरअंदाज करने जैसा कृत्य किया था जिसके बाद उनके खिलाफ दिग्विजय समर्थकों ने सोशल मीडिया पर हरीश चौधरी हटाओ प्रदेश बचाओ अभियान चला दिया था।
इवेंट कंपनी को फिल्म बनाने की जिम्मेदारी….करोड़ों का भुगतान
मध्य प्रदेश के कुछ सरकारी और अर्द्ध सरकारी संस्थानों में मोची का काम बावर्ची और बावर्ची का काम भिश्ती से कराए जाने की परंपरा सी बनती जा रही है। सरकारी पैसे को अपने चहेतों को किसी न किसी तरह देने के लिए यह सब होता आया है और हो रहा है। मुख्यमंत्री के एक करीबी इसमें खासे माहिर हैं। संस्कृति से जुड़े इन महाश्य को चहेत संस्थानों में रेवड़ी बांटने का शौक है। आपको बताते हैं कि कुछ विशेष प्रचार फिल्मों के निर्माण और उनके प्रसारण की जिम्मेदारी इनके पास थी। इसमें इन्होंने अपने करीबियों को ऐसे उपकृत किया कि फिल्म बनाकर चलाई जाना थी इलेक्ट्रॉनिक चैनलों पर मगर यूट्यूब पर ही फिल्म चलाकर बिलों का भुगतान हो गया। पिछले दो साल की अवधि में पांच करोड़ रेवड़ी मुख्यमंत्री Chief Minister के ये करीबी बांट चुके हैं। इन पर हाल ही में कांग्रेस ने सरकारी जमीन एक रुपए में दिए जाने के आरोप भी लगाए थे। उन्होंने एक ऐसे ही मीडिया संस्थान पर इसकी सफाई भी दी थी। उसमें कांग्रेस को चैलेंज दिया कि अगर एक इंच जमीन भी संबंधित जिले में उनकी या उनके परिवार की निकाल दें तो वे उन्हें मान जाएंगे।
फार्म हाउस पार्टी….खाकी का डांस वीडियो बना….सीखचों में आयोजक
चोर सिपाही का नाता सदियों पुराना है मगर पहले खाकी का उन पर खौफ हुआ करता था। आज खाकी असामाजिक तत्वों के साथ दोस्ताना अंदाज में ज्यादा दिखाई देती है जिसकी वजह राजनेताओं की टीम में ऐसे लोगों की घुसपैठ बढ़ना है। इस दोस्ताना अंदाज का एक वीडियो भोपाल Bhopal में बना था जो एक फार्म हाउस की पार्टी में बनाया गया। एक नेशनल हाइवे पर बने शहर के नामी बदमाश के फार्म हाउस पर पिछले दिनों यह पार्टी आयोजित हुई थी। पार्टी में दिनभर की व्यस्तता के बाद रात को कुछ खाकी वाले भी पहुंचे जिनके कंधे पर सितारे चमक रहे थे। पार्टी में शराब और शबाब था तो फिल्मी गानों की धुनों पर वे अपने कदमों को रोक नहीं पाए। नाचते समय वे इतने मग्न हो गए कि कोई उनका वीडियो बना रहा है, यह भी नहीं देखा। यह वीडियो आयोजक के किसी साथी ने बनाया था जो एक खाकी वाले अफसर के पास पहुंच गया। मामला गंभीर था तो आयोजक को सबक सिखाने के लिए उसकी पार्टी में पहुंचे खाकी वालों ने पुराने शहर के एक साथी अधिकारी से उसका जुलूस निकलवा दिया। सीखचों में पहुंचे आयोजक से वीडियो डिलीट कराने में खाकी जोर लगा रही है मगर बदमाश भी कड़क है और वह वीडियो के मुख्य स्त्रोत की जानकारी ही नहीं उगल रहा।
