Madhya Pradesh में BJP की Dr. Mohan Yadav सरकार ने पिछले कुछ महीनों से जिस अंदाज में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर समीकरणों पर काम किया, वह नियुक्तियों के सरकारी आदेशों में साफ दिखाई दिया है। 2021 में Congress सरकार को गिराकर BJP को बैठाने में Jyotiraditya M. Scindia ने जो भूमिका निभाई थी, उसका धीरे-धीरे असर कम होता जा रहा है और यह राजनीतिक नियुक्तियों में नजर आया। कांग्रेस से भाजपा में गए बड़े नेताओं को नजरअंदाज करने के साथ BJP के कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ भी राजनीतिक नियुक्तियों में ज्यादा पूछताछ नहीं की गई। कई जगह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले नेताओं को नियंत्रण के लिए बैठाने की कोशिश की गई है। पढ़िये राजनीतिक नियुक्तियों पर कुरु कुरु स्वाहा की यह एक विशेष रिपोर्ट।
नियुक्तियों में अपनों को संकेत संकेत में संदेश
Dr. Mohan Yadav सरकार को करीब ढाई साल हो गए हैं और इस बार विधानसभा के कार्यकाल की समाप्ति के कुछ महीने पहले की जाने वाली राजनीतिक नियुक्तियों को सरकार ने अपने आधे कार्यकाल में ही करना शुरू कर दिया है। राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर CM Dr. Mohan Yadav ने संगठन स्तर पर BJP प्रदेश अध्यक्ष Hemant Khandelwal, Shiv prakash, अजय जामवाल से लेकर केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya M. Scindia से लेकर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan आदि से चर्चा तो की मगर नियुक्तियां अपने हिसाब से ही कीं। यह पिछले दिनों नियुक्तियों के आदेशों से स्पष्ट हो गया।
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सिंधिया के करीबियों को झटके
माना जाए तो सबसे बड़ा झटका Jyotiraditya M. Scindia के समर्थकों को लगा जिन्हें काफी उम्मीद थीं। इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसौदिया, ओपीएस भदौरिया, मुन्नालाल गोयल, गिरिराज डंडोतिया में से ज्यादातर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिए जाने की उम्मीद लगाए बैठे थे और इनमें से किसी को भी अब तक कोई पद नहीं मिल सका है। यह जरूर हुआ कि ग्वालियर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में अशोक शर्मा को पद दे दिया गया तो पूर्व महापौर ग्वालियर समीक्षा गुप्ता भी महिला आयोग में सदस्य बन गईं। ग्वालियर मेला प्राधिकरण में अशोक जादौन व उदयवीर सिंह गुर्जर को नियुक्तियां मिली हैं जो सिंधिया के करीबी माने जाते हैं।
सिंधिया के विरोधियों को वजनदार पद
Jyotiraditya M. Scindia को संदेश देने के लिए भी Dr. Mohan Yadav सरकार ने कुछ ऐसी राजनीतिक नियुक्तियां की हैं जो उन्हें आंख में किरकिरी जैसी चुभ सकती हैं। पहली नियुक्ति केपी यादव की है जिन्हें नागरिक आपूर्ति निगम अध्यक्ष बना दिया गया तो दूसरी रामनिवास रावत की है। रावत को राज्य वन विकास निगम का अध्य़क्ष बनाया गया है। केपी सिंह को सिंधिया शायद ही कभी भूल पाएं क्योंकि उन्हें उनसे लोकसभा चुनाव में हार मिल चुकी है। रावत भी सिंधिया की स्मृति में बने रहेंगे क्योंकि जब कांग्रेस छोड़कर वे भाजपा में पहुंचे तो रावत कांग्रेस में ही बने रहे थे। यही नहीं उन्होंने सिंधिया के खिलाफ बयान भी दिए थे और जब रावत भाजपा में पहुंचे तो उपचुनाव में सिंधिया ने उनके प्रचार के लिए समय नहीं दिया था।
कांग्रेस नेता उपेक्षित ही रहे
Dr. Mohan Yadav सरकार ने जिन नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियों दीं उनमें अधिकांश भाजपा और आरएसएस की पृष्ठभूमि से जुड़े नेता हैं। Congress छोड़कर भाजपा ज्वाइन करने वाले नेता उपेक्षित ही रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने कांग्रेस में दिल्ली से लेकर भोपाल तक करीब तीन दशक अपना दमखम दिखाया था मगर भाजपा में पहुंचने के बाद वे अब तक कोई पद नहीं पा सके हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व Ex CM Kamal Nath के दाएं हाथ माने जाने वाले पूर्व मंत्री छिंदवाड़ा के दीपक सक्सेना को भी नियुक्तियों में अब तक पद नहीं मिला है। ऐसे और भी कई निर्वाचित जनप्रतिनिधिों के नाम हैं जो भाजपा में गए तो मगर अब तक उन्हें न संगठन में पद मिल पाया है और न ही राजनीतिक नियुक्तियों में कोई तवज्जोह ही दी गई है।
भाजपा नेता समर्थक व आरएसएस पृष्ठभूमि पर जोर
राजनीतिक नियुक्तियों में मोहन सरकार ने भाजपा नेताओं के समर्थकों में से कुछ नाम लिए हैं जिनमें विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर विशेष हैं। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खास रुचि रखने वाले तोमर के समर्थकों को ये मौके मिले हैं। जिन्हें राजनीतिक नियुक्तियों दी गईं, उन भाजपा व आरएसएस पृष्ठभूमि वाले नेताओं में सबसे ऊपर नाम जयभान सिंह पवैया, संजय कांकर, संजय नगाइच, महेंद्र सिंह यादव जैसे नाम प्रमुख हैं।
