कुरु कुरु स्वाहा Kurukuruswaha के नियमित स्तंभ में इस बार राजनीतिक Politics और प्रशासनिक गलियारों के साथ Police व PWD की कुछ जानकारियों को आप तक पहुंचाने की कोशिश है। यह आपको कैसी लगी, टिप्पणी कर बताईये और वेबसाइट व इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स पर हमारे इस स्तंभ को शेयर, लाइक करने के साथ सब्सक्राइव भी कीजिए।
पोस्टर वॉर में स्वच्छता पर दाग, पहले बोतलें फेंकी फिर नई झाड़ू से सफाई
मध्य प्रदेश Madhya Pradeshमें भाजपा BJP की करीब ढाई दशक से सरकार है फिर भी संगठन व सरकार में नियुक्ति मिलने पर नेताओं को अपनी शक्ति दिखाना पड़ रही है। कुछ ऐसा ही पिछले दिनों निगम मंडल के पदाधिकारियों की नियुक्ति के बाद देखने को मिला था और ताजा उदाहरण भारतीय जनता युवा मोर्चा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के इंदौर में पहले दौरे में दिखाई दिया। स्वागत में भाजपा BJP नेताओं ने शहर में ऐसा पोस्टर वॉर चलाया कि हर प्रमुख सड़क की सरकारी, निजी संपत्ति की दीवार, खंभों पर छोटे बड़े होर्डिंग लगाकर देश के स्वच्छ तमगे वाले नगर पर दाग लगा दिया। फिर स्वागत के दौरान सफाई का संदेश देने के लिए पहले मिनरल पानी की बोतलों का कचरा किया गया। इसके बाद अपने युवा नेता श्याम टेलर के हाथ में नई झाड़ू पकड़ाकर उन्हें सफाई के नाम पर झाड़ू से एकत्रित कराकर हरी पॉलिथिन की थैली में डाल दिया। यहां आपको याद दिलाना चाहते हैं कि इन दिनों देशभर में पेट्रोल-डीजल में किफायत बरतने, साफ-सफाई रखने के लिए स्वच्छता संदेश की धुनें बजती कचरा गाड़ियां दौड़ाई जा रही हैं मगर जब नेताओं को अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना होता है तो गाड़ियों के काफिलों में पेट्रोल-डीजल की बरबादी तो रैलियों के दौरान खाने-पीने की सामग्री को अपने साथ पॉलिथिन लेकर एकत्रित करने के बजाय सड़क पर फेंकने में ये शान समझते हैं।
दिल्ली की पसंद मीनाक्षी के साथ साजिश तो नहीं….अब चौधरी पर हमला
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में कांग्रेस INC की राज्यसभा चुनाव में दिल्ली की पसंद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पर्चा निरस्त होने की घटना के पीछे अब पार्टी के भीतर की साजिश की बातें होने लगी हैं। नामांकन पत्रों की छंटनी के दिन तेलंगाना कांग्रेस INC नेताओं की मध्य प्रदेश यात्रा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं तो वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस INC कमेटी की नामांकन पत्र भरने वाली टीम की लापरवाही की बातें भी की जा रही हैं। इस टीम के विजयपुर विधानसभा चुनाव में नामांकन पत्र भरने में लापरवाही का मुद्दा भी फिर से गरमाया है। इस टीम को लीड करने वाले जेपी धनोपिया हैं। वहीं, नटराजन के नामांकन पत्र के निरस्त होने के बाद बड़े नेताओं का रुख देखकर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने जब भौंहे घुमाना शुरू किया तो दिग्विजय सिंह Digvijay singh समर्थकों के हमले शुरू हो गए। चौधरी हटाओ का अभियान छेड़ दिया गया है। दिल्ली को यह एकतरह से चुनौती देने जैसा है। इस मामले में प्रदेश Madhya Pradesh अध्यक्ष जीतू पटवारी पसोपेश में नजर आ रहे हैं क्योंकि वे कमलनाथ Kamal Nath की चिंता नहीं करते मगर दिग्विजय सिंह Digvijay singh को दिल से नाराज नहीं करना चाहते। कमलनाथ Kamal Nath के खिलाफ तो उन्होंने दिल्ली की प्रेस कांफ्रेंस में ही संकेतों में यह कह दिया था कि वे कांग्रेस विधायकों में एकमात्र हैं जो उस समय भी साथ नहीं थे। बहरहाल मीनाक्षी के नामांकन निरस्त करने की घटना ने यह साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं को दिल्ली की पसंद रास नहीं आती है फिर चाहे वह प्रदेश प्रभारी हो या उच्च सदन के चुनाव का प्रत्याशी।
यह कैसी सतर्कता….धर्मेंद्र प्रधान के कार्यक्रम स्थल तक पहुंच गए प्रदर्शनकारी
नीट पेपर लीक कांड के बाद देशभर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ युवाओं द्वारा आंदोलन किए जा रहे हैं। इसी दौरान भाजपा BJP नेताओं के लिए देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले मध्य प्रदेश Madhya Pradesh राज्य में उन्हें रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारह साल के कार्यकाल की उपलब्धियों के बारे में मीडिया संवाद में भेज दिया गया। इतना सब पता होने के बाद भी भोपाल पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी चूक हुई कि प्रधान से इस्तीफा मांगने वाले युवाओं का एक दल उनके कार्यक्रमस्थल तक पहुंच गया। इसके बाद पुलिस ने अपना दाग छिपाने के लिए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय परिसर में घुसकर वहां पोस्टर लेकर नारे लगा रहे एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे व उपाध्यक्ष रवि परमार को कंधे पर उठाकर पकड़ा। जब वीवीआईपी की सुरक्षा को लेकर इतना इनपुट था तो कार्यक्रमस्थल तक प्रदर्शनकारियों का दल कैसे पहुंच गया, इस पर पुलिस को समीक्षा करने की जरूरत है।
पीडब्ल्यूडी में अब वरिष्ठता मायने नहीं….चार को पीछे कर प्रमुख का दायित्व
दुनिया के 90 डिग्री के अनोखे पुलों के निर्माण करने वाले मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग में इन दिनों वरिष्ठता के कोई मायने नहीं रह गए हैं। इस कुबेर का खजाना समझे जाने वाले विभाग में प्रभार की प्रथा को नेता और अफसर दोनों ही साधकर चल रहे हैं। एसई को सीई के प्रभार दिए जा रहे हैं तो अन्य पदों पर भी यह हाल बना हुआ है। अब विभाग प्रमुख के मामले में भी वरिष्ठता को दरकिनार रख दिया गया है। प्रमुख अभियंता के रूप में आरएल वर्मा की पदस्थापना की गई है जो सीनियरिटी में पांचवें नंबर पर हैं। पहले नंबर पर एसआर बघेल हैं जो अभी प्रभारी भवन हैं तो दूसरे नंबर पर केपीएस राणा हैं जिन्हें हाल ही में हटाकर वर्मा को बनाया गया है। तीसरे नंबर पर लोक निर्माण विभाग के उप सचिव एआर सिंह हैं। चौथे नंबर पर एसएल सूर्यवंशी हैं। कहा जा रहा है कि वर्मा की कई जांच भी चल रही हैं, फिर भी उन्हें विभाग का प्रमुख अभियंता का प्रभार सौंप दिया गया है। अब इसके पीछे क्या कारण हैं, यह मंत्री या विभाग पर प्रशासनिक नियंत्रण करने वाले अफसर अच्छे से बता पाएंगे।
दिल्ली को सीएस ऐसा चाहिए….लचीली सरकार को कसावटी प्रशासन से चलाए
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में मुख्य सचिव Chief Secretary अनुराग जैन का अगस्त में रिटायरमेंट है जिसकी वजह से नौकरशाहों के बीच उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। कई तरह की अटकलों में यह कहा जा रहा है कि सीएस Chief Secretary पर दिल्ली ही फैसला करेगा। दिल्ली को मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में कैसा सीएस चाहिए, इसको लेकर नौकरशाहों के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी यह कहा जा रहा है कि सरकार को लचीले ढंग से चलाने पर जोर है। मगर सरकार के लचीलेपन को प्रशासनिक कसावट के साथ नियंत्रित करने की दिल्ली की सोच है। Chief Secretary अनुराग जैन पर दिल्ली के फैसले को इसका उदाहरण बताया जा रहा है। ऐसे में दौड़ में सीनियरमोस्ट अधिकारी राजेश राजौरा और प्रदेश में उपलब्ध दूसरे अफसर अशोक वर्णवाल दोनों ही कमजोर माने जा रहे हैं। राजौरा की कठोर निर्णय न लेने की छवि मानी जा रही है तो वर्णवाल के सरकार की स्पष्ट नीतियों के बावजूद धीमी गति से निर्णय लेने की कार्यप्रणाली को अड़ंगा माना जा रहा है। ऐसे में दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अफसरों पर केंद्र ज्यादा भरोसा कर सकता है जिनमें मनोज गोविल और पंकज अग्रवाल के सितारे बुलंदी पर जा सकते हैं।
