Madhya Pradesh मध्य प्रदेश के Bandhavgarh Tiger Reserve बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक टाइगर की मौत ने वन विभाग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Tiger टाइगर की मौत विभाग की लापरवाही की वजह से होना बताई जा रही है। हालांकि टाइगर आदमखोर हो गया था और उसे बेहोश कर नियंत्रित करने में विभाग कामयाब रहा था। आखिर वन विभाग पर क्यों उठ रहे हैं, सवाल जानिये रिपोर्ट में।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक टाइगर का रेस्क्यू किया जा रहा था जिसके लिए उसे बेहोश करने इंजेक्शन दिया गया। मेडिटोमिडिन Meditomidine + केटामिन Ketamine नामक मेडिसिन का डोज टाइगर को दिया गया था लेकिन इसके बाद उसे निर्धारित समय में एंटी डोज नहीं दिया जा सका। एंटी डोज में देरी होने से टाइगर की मौत हो गई।
ग्रामीण ने रेस्क्यू टीम को भगाया
बताया जाता है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मौत के पहले टाइगर ने एक महिला को मार डाला था और चार अन्य ग्रामीणों पर हमला किया था। इससे आदमखोर हुए टाइगर को काबू में करने के लिए रेस्क्यू किया गया। इसमें Meditomidine + Ketamine नामक मेडिसिन इंजेक्शन में दी गई। टाइगर जब बेहोश हो गया तो उसी बीच गुस्साए ग्रामीणों ने रेस्क्यू टीम को कथित रूप से हमला कर खदेड़ दिया। वन विभाग की टीम जब तक वहां फिर पहुंची तो टाइगर को मौत हो चुकी थी। अब इसमें वन विभाग के डॉक्टरों की लापरवाही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।आमतौर पर ट्रैंकलाइज य़ानी बेहोश करते समय टाइगर के पिछले हिस्से को निशाना बनाया जाता है। भीषण गर्मी और गर्दन को निशाना बनाना भी सवालों के घेरे में है।
ट्रेंकुलाइज के बाद ऐसे हुई टाइगर की मौत
वन विभाग के रिटायर अधिकारियों से हुई बातचीत से पता चला है कि ट्रेंकुलाइज करने के बाद टाइगर की मौत आमतौर पर दवा की गलत खुराक (ओवरडोज), बेहोशी के दौरान सांस नली में रुकावट, अत्यधिक तनाव, या पहले से मौजूद किसी गंभीर बीमारी के कारण सदमा लगने (Shock) से होती है। ट्रेंकुलाइजेशन एक बहुत ही संवेदनशील प्रक्रिया है।
ट्रेंकुलाइजेशन के दौरान मृत्यु के कारण
बाघों के ट्रेंकुलाइजेशन के दौरान मृत्यु होने के मुख्य कारणों के बार बताया जाता है कि जब दवा की गलत खुराक (Overdose) हो जाए। यदि बाघ के वजन का सही अनुमान लगाए बिना बेहोशी की दवा (जैसे ज़ाइलाज़िन या केटामाइन) की मात्रा ज़्यादा दे दी जाती है, तो उसकी सांसें या दिल काम करना बंद कर सकता है। सांस नली में रुकावट आ सकती है। बेहोश होने के बाद कई बार जानवर उल्टी कर देता है। यदि उल्टी के कण या लार उसकी सांस की नली में चले जाएं तो भी उसकी दम घुटने से मौत हो सकती है।अत्यधिक तनाव (Capture Myopathy) की वजह से भी टाइगर की मौत हो सकती है। रेस्क्यू ऑपरेशन या पिंजरे में कैद होने के दौरान बाघ अत्यधिक तनाव और गुस्से में होता है। ऐसे में ट्रेंकुलाइज करने पर शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है, जिससे दिल का दौरा पड़ सकता है या मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है। छिपी हुई चोटें या बीमारी से भी मौत हो सकती है। यदि बाघ को पहले से कोई गंभीर बीमारी, आंतरिक चोट (जैसे आपसी लड़ाई में लगी चोट), या संक्रमण हो, तो वह बेहोशी की दवा का असर नहीं झेल पाता। इन जोखिमों को कम करने के लिए हमेशा अनुभवी पशु चिकित्सकों की देखरेख में सटीक डोज, एंटीडोट (दवा का असर खत्म करने के इंजेक्शन) की उपलब्धता, और त्वरित निगरानी की व्यवस्था रखी जाती है।
