Madhya Pradesh Congress कमेटी का टैलेंट हंट हुआ जिसमें सीनियर से लेकर जूनियर सभी प्रवक्ताओं के इंटरव्यू हुए। टैलेंट हंट में दिल्ली से आए प्रतिनिधियों के अलावा प्रदेश Congress के मीडिया प्रभारी मुकेश नायक भी बीच बीच में आते जाते रहते थे। एक ग्रुप में कुछ सीनियर और जूनियर प्रवक्ता इंटरव्यू के लिए बैठे थे कि बीच में प्रवक्ताओं की विषयों पर पकड़, वाकपटुता, प्रिजेंस ऑफ माइंड का मूल्यांकन किया जा रहा था कि PCC के एक सीनियर नेता पहुंच गए। उस समय इंटरव्यू में एक महिला प्रवक्ता अपनी बात रख रही थी कि नेताजी ने उन्हें देखते ही प्रशंसा करना शुरू कर दिया। महिला प्रवक्ता ने भी फिर नेताजी की तारीफ में कसीदे पढ़ना शुरू कर दिए। यह दृश्य देखकर इंटरव्यू देने पहुंचे अन्य प्रवक्ता हक्का बक्का रह गए और दिल्ली से आई टीम भी दोनों का मुंह ताकती रह गई। अब सवाल रहा कि चयन किसका होगा, तो ऐसे में कैसे उसे (नेताजी की पसंद) कोई वंचित कर सकता है।
वीडी का साया बनने वाले नेता अब कहां गए
BJP वैसे तो कॉडर बेस पार्टी कही जाती है मगर सत्ता में आने के बाद कुछ दशकों से प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका में रहने वाले नेताओं की टीम खड़ी होती रही है। चाहे नरेंद्र सिंह तोमर हो या शिवराज सिंह चौहान या प्रभात झा, नेताओं के कार्यकाल में ऐसे समर्थकों की भीड़ भी पार्टी में रही जो प्रदेश अध्यक्ष के प्रति समर्पित रही। इसमें राकेश सिंह, नंदकुमार सिंह चौहान जैसे Madhya Pradesh BJP अध्यक्ष अपवाद रहे मगर हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पद से निवृत्त हुए वीडी शर्मा के साथ कुछ असामान्य हुआ। वीडी शर्मा ने जिन नेताओं की टीम को खड़ा किया, आज वे या तो गुम जैसे हो गए या फिर उन्होंने उनसे किनारा कर लिया। भोपाल जिला अध्यक्ष सुमित पचौरी हो या इंदौर के जिला अध्यक्ष गौरव रणदिवे और कुछ अन्य युवा नेताओं को वीडी शर्मा ने जिस तरह आगे बढ़ाया, आज वे वैसे सक्रिय नहीं रहे। मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल को वीडी शर्मा ने लोकेंद्र सिंह की जगह बनाया था और आज वे वीडी शर्मा के कवरेज को देखते नहीं हैं। आजकल वीडी शर्मा के साथ केवल उनके समय सह मीडिया प्रभारी रहे जुगलकिशोर शर्मा ही दिखाई देते हैं। सही कहा है कि जब सितारे गर्दिश में होते हैं तो साया भी साथ छोड़ देता है।
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कुछ तो गड़बड़ है….चार महीने पहले क्यों वीआरएस
Madhya Pradesh में स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े लोक शिक्षण संचालनालय में मुखिया के बदलते ही सवा महीने में अधीनस्थों की हार्टबीट तेज हो गई। इसका अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि संचालनालय में एक ऐसे अधिकारी हैं जिनका चार महीने बाद रिटायमेंट था, उन्होंने वीआरएस यानी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन ही दे दिया है। पता लगा है कि उनका वीआरएस स्वीकार भी होने जा रहा है। आखिरी ऐसी कौन सी इमरजेंसी आ गई थी कि महाश्य चार महीने और सरकार को सेवाएं नहीं दे सकते। कहा जा रहा है कि संचालनालय के इन जैसे अधिकारियों ने अतिथि शिक्षकों के वेतन फर्जीवाड़े से लेकर अनापशनाप खरीदी कर आर्थिक अनियमितताएं कीं जिसका पर्दाफाश होने के डर से अब जैसे-तैसे नौकरी से मुक्त होने की फिराक में हैं। वैसे लोक शिक्षण संचालनालय की फाइलों को मुखिया सही ढंग से खंगाले तो उनके पन्नों में यह गड़बड़ियां मिल जाएंगी।
झील किनारे रिटायर अफसरों का नया क्लब….ध्यान योग में लगे
Madhya Pradesh में नौकरशाही में फाइलों के बीच तीन-साढ़े तीन दशक का समय गुजारने के बाद अब भारतीय प्रशासनिक सेवा IAS के कई रिटायर अधिकारियों को मानसिक शांति की तलाश है। इसके लिए उनके एक साथी अधिकारी ने भोपाल की बड़ी झील के एक किनारे पर ऐसा स्थान विकसित किया है जहां ये अधिकारी ध्यान में लीन होने के लिए पहुंच रहे हैं। इन अधिकारी महोदय का जमीनों से खास नाता रहा है और रिटायरमेंट के बाद वे विवादों में घिर चुके हैं। उनके ध्यान जैसी गतिविधियों के क्लब में करीब एक दर्जन रिटायर अधिकारियों की ज्वाइनिंग हो चुकी है। ये लोग सुबह ध्यान के लिए पहुंचते हैं। देखना यह है कि यह क्लब ध्यान की गतिविधियों तक खुद को सीमित रखता है या खेलकूद के साथ दूसरी व्यवसायिक या आर्थिक गतिविधियों की भी यहां शुरुआत होती है।
हड़तालियों को सबक सिखाने पर आमादा सरकार
Madhya Pradesh में सरकार की निखरी छवि को प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी संभालने वाले जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को उनकी मांग भारी पड़ रही है। आयुक्त दीपक सक्सेना के कार्यकाल में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गणेश पांडेय को अपर संचालक बनाकर लाया गया था। तब जनसंपर्क अधिकारियों ने दिनभर काम बंद करते हुए हड़ताल कर मांग रखी थी कि उनके कैडर के अधिकारी को संचालक बनाया जाए और बाहर से किसी अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर अपर संचालक के रूप में नहीं लाया जाए। जनसंपर्क अधिकारियों के दिनभर काम बंद करने के बावजूद गणेश पांडेय की न तो नियुक्ति निरस्त नहीं हुई और न ही अब तक उनके कामकाज का मूल्यांकन हुआ कि उनके आने से जनसंपर्क विभाग के ढर्रे में क्या बदलाव आया। अब डायरेक्टर पद पर जनसंपर्क कैडर के अधिकारियों को मौका नहीं देकर फिर आईएएस अधिकारी पदस्थ कर दिया गया। लगता है कि सरकार जनसंपर्क विभाग की हड़ताल के बाद अधिकारियों को सबक सिखाने पर आमादा है।
