Madhya Pradesh की राजधानी Bhopal में बीते सप्ताह महाभारत जैसी घटना की पृष्ठभूमि तैयार हुई जिसमें होटल में दो अलग-अलग समुदाय के युवक-युवती के मिलने के बाद बनी परिस्थितियों से शहर में Communal तनाव हुआ। इस पृष्ठभूमि में Bhopal की पुलिस का खुफिया तंत्र नाकाम साबित हो गया। सबसे पहला फेल्युअर घटना में युवती के साथ मिले युवक का अपराधिक रिकॉर्ड उसके पास नहीं था जिसकी वजह सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी। जिन लोगों ने युवक-युवती को होटल में Love Zihad के नाम पर पकड़ा था, वे Bajrang Dal के हैं या नहीं, इसकी जानकारी भी स्थानीय पुलिस को नहीं थी। यह तब पता लगा जब Bajrang Dal ने अधिकृत बयान जारी कर उनसे अपने संगठन के संबंध नहीं होने की बात कही। Bhopal पुलिस की तीसरी फेल्युअर घटनास्थल पर पहुंचने के बाद भी युवक से पिटाई होते रहना था। चौथा पुलिस फेल्युअर घटना के बाद रात को एक समुदाय विशेष के धर्मगुरुओं की बैठक हो गई और पुलिस को इनपुट ही नहीं मिला। पुलिस को वह तब पता लगा जब समुदाय से जुड़े विधायकों के पास भीड़ जुटाने का संदेश पहुंचा। इसके बाद धार्मिक जुलूस की अनुमति की अनिवार्यता का आदेश जारी हुआ मगर उसका पालन कराने में Bhopal पुलिस नाकाम रही। बिना अनुमति के भीड़ दर्जनों वाहनों पर सवार होकर एक समुदाय विशेष के धर्मगुरु व जनप्रतिनिधियों के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गई। वहां पुलिस को अल्टीमेटम दिया गया। इस चेतावनी के बाद भी राजधानी पुलिस समुदाय की गतिविधियों पर खुफिया नजर रखने में नाकाम जैसी रही क्योंकि कुछ घंटे के बाद ही पुराने शहर में भीड़ पीरगेट पर जमा हो गई। भीड़ इकट्ठा होने के बाद सख्ती शुरू हो पाई जिससे भीड़ का पथराव तक सहन करना पड़ा। आधी रात के बाद तक वहां भीड़ जमा रही। अब आपको बता दें कि यह दृश्य 1992 के बाबरी मस्जिद कांड के बाद पुराने Bhopal के कुछ इलाकों में भीड़ जमा होने तथा उपद्रव करने की तैयारियों जैसा था। वर्तमान में Bhopal पुलिस का खुफिया तंत्र फेल होने के पीछे शाखा अधिकारी विहीन है। Bhopal पुलिस के संजय का पूरा जोर ट्रैफिक और जनसंवाद पर है मगर जनसंवाद भी अच्छा होता तो सूचनाएं पुलिस को किसी न किसी माध्यम से मिल ही जातीं। Bhopal पुलिस को इस घटनाक्रम से सबक लेते हुए अपने सूचना तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है क्योंकि अभी शांति कमेटियां सक्रिय नहीं हैं और बीट में पुलिसकर्मियों की पकड़ कमजोर है।
जलवा या टेरर,,,,जंगल महकमे में मेम साहब के चर्च
Madhya Pradesh में मेम साहबों का जलवा आता जाता रहता है। इन दिनों जंगल महकमे में महिला अफसरों में से एक मेम साहब की चर्चाएं जोरों पर हैं। मेम साहब का वास्ता जंगली जानवरों से ज्यादा नजदीकी है जिन पर मानव के पास अब कानूनी पाबंदियों की वजह से नियंत्रित करने का अधिकार नहीं है। जंगल महकमे की मेम साहब के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने मौजूदा जिम्मेदारी हासिल करने के लिए तांत्रिक विद्याओं की सहायता भी ली है। उन्हें पद तो मिल गया है मगर जंगली जानवरों पर आपदाएं आने लगीं। मेम साहब काम में जरा से तनाव पर अधीनस्थों पर बरसने लगी हैं। अधीनस्थ मेम साहब के सेवाकाल की शेष अवधि और ऊंचे पद पर पहुंचने की संभावनाओं को देखकर उनके गर्जने बरसने को बर्दाश्त कर रहे हैं। जिस कथित तांत्रिक विद्या के सहारे मेम साहब ने पद हासिल किया है, अब अधीनस्थ उनके तबादले के लिए अनुष्ठान तक कराने की सोचने लगे हैं। यह मेम साहब का जलवा है या टेरर आप खुद आंकिये।\
इंटेलीजैंस चीफ के लिए समीकरण शुरू….फिर व्हाया उज्जैन
नौकरशाही में कुछ समय से Madhya Pradesh में श्रेष्ठ पदस्थापनाओं के लिए व्हाया उज्जैन का रास्ता माना जाने लगा है। सरकार की आंख-कान-नाक PHQ पुलिस मुख्यालय की इंटेलीजैंस शाखा होती है जिसके चीफ इस समय ए. साईं मनोहर हैं। साईं मनोहर अगस्त 2026 में रिटायर होने वाले हैं। उनके कार्यकाल के बाद इस शाखा का प्रभार किसे सौंपा जाए, उसके लिए नामों की चर्चाएं अभी से शुरू हो गई हैं। इस पदस्थापना के लिए फिर तय माना जा रहा है कि व्हाया उज्जैन वाले अफसर ही चुने जाएंगे। Ujjain आईजी राकेश गुप्ता को यह जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। वहीं, Ujjain के सिंहस्थ 2028 को देखते हुए एकबार फिर वहां संतोष सिंह को जिम्मेदारी देने की तैयारी है। संतोष सिंह Indore में पदस्थ हैं और इसके पहले वे Ujjain में आईजी रह चुके हैं। देखना यह है कि दो महीने बाद होने वाले इस बदलाव के लिए सरकार कब फैसला लेती है।
ईंधन बचत में अफसर आगे भाजपा नेता निकाल रहे हवा
पेट्रोल-डीजल के संकट की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ईंधन बचत का संदेश दिया था जिसके बाद भाजपा के निगम-मंडल-बोर्ड और आयोग के नवनियुक्त पदाधिकारियों ने काफिलों के साथ पदभारग्रहण किया तो एक निगम अध्यक्ष सौभाग्य सिंह को कुछ शक्तियों पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया गया। संगठन के एक नवनियुक्त किसान मोर्चा अध्यक्ष की नियुक्ति निरस्त कर दी गई मगर भोपाल भाजपा ने इससे सबक नहीं लेते हुए शहर से 25 किलोमीटर दो दिन का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया। जहां लगभग 250 नेता-कार्यकर्ता पहुंचे जिनमें से ज्यादातर अपने निजी वाहनों से वहां तक गए। कार्यक्रम स्थल के भीतर ई-रिक्शा में नेताओं ने तस्वीर खिंचवाई। वहीं, राज्य शासन के जंगल महकमे की Indore में होने वाली आला अफसरों की कार्यशाला को विभाग ने निरस्त कर भोपाल में ही करने का फैसला किया। इससे Indore में आलीशान होटलों के खर्च सहित Bhopal से Indore पहुंचने वाले अफसरों के वाहनों का ईंधन बचा। हालांकि जंगल महकमे की इस कार्यशाला में रिटायर होने वाले एक अफसर को गिफ्टों का नुकसान जरूर हुआ मगर वहां कार्यशाला निरस्त होने के बाद इंदौर-उज्जैन के प्रमुख अफसर Bhopal के अफसरों के निशाने पर जरूर आ गए हैं।
अब मंत्रीजी की निकलेंगी निजी गाड़ियां
ईंधन अपव्यय की बात की जाए तो Madhya Pradesh मध्य प्रदेश में मंत्री बनने के बाद अधिकृत रूप से मिलने वाले वाहनों के अलावा निगम-मंडल और बोर्ड-आयोगों से कई गाड़ियां पहुंच जाती हैं। मंत्रीगण वाहनों की लाइन लग जाने की वजह से अपनी निजी वाहनों शो रूम की तरह गैरेज में सजा कर रखते हैं। ऐसे ही एक मंत्री हैं जिनके पास किसान से जुड़ा एक महकमा है। 74 बंगला में रहने वाले इन मंत्रीजी के पास स्वयं की दो आलीशान गाड़ियां Mercedes मर्सडीज और Fortuner फार्च्युनर हैं जो अब तक उनके बंगले में खड़ी रहती थीं। मंत्रीजी अधिकृत रूप से मिले वाहनों का उपयोग करते थे तो परिवार के लोग निगम-मंडल व बोर्ड की गाड़ियों से मध्य प्रदेश भर में ही नहीं नैनीताल जैसे शहरों की यात्राएं भी करते रहे हैं। परिवार के सदस्यों माता-पिता, पत्नी, बेटे-बेटी ही नहीं बल्कि दामाद भी सरकारी खर्च से उन गाड़ियों को लेकर घूमते रहते थे। पिछले दिनों निगम-मंडलों व बोर्ड-आयोग में राजनीतिक नियुक्तियों से ऐसे मंत्रीजी को झटका लग सकता है। अब उनके परिवार के लोगों के लिए उन्हें अपनी Mercedes मर्सडीज व Fortuner फार्च्यूनर गाड़ियों को सड़क पर उतारना पड़ सकता है।
