हमारे KURUKURUSWAH के नियमित स्तंभ में इस बार आपको Madhya Pradesh के दो IAS Officers के बारे में बता रहे हैं तो दो BJP नेताओं के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं और एक पूर्व सरकारी अधिकारी जो congress की सरकारों में क्रीम पदों पर रहे और BJP सरकार में भी जुगाड़ करके अच्छी पदस्थापना पाईं। आज वे अपने कक्ष को लेकर चर्चा में हैं क्योंकि उनके कक्ष से भ्रमजाल की स्थिति बन रही है। पढ़िये और देखिये नियमित स्तंभ को, पसंद आए तो हमारे वेबपोर्टल और सोशल मीडिया के यूट्यूब, इंस्टाग्राम, एक्स और फेसबुक को सब्सक्राइव करें, लाइक व शेयर भी कीजिए। स्तंभ से जुड़ी जानकारी या सूचना पसंद आए तो कमेंट अवश्य कीजिए।
काम से बच रहे साहब…. हो रहा एडजस्टमेंट
Madhya Pradesh के दो वरिष्ठ IAS Officers शिवशेखर शुक्ला और संजय कुमार शुक्ला के पिछले दिनों तबादला आदेश जारी किए गए। इनमें से शिवशेखर शुक्ला कुछ समय से छुट्टियां ज्यादा ले रहे थे। इस कारण विभाग में फाइलों का ढेर लगता रहता था। शुक्लाजी के पास गृह जैसा महत्वपूर्ण विभाग भी था जिसमें उनके अधीनस्थ अधिकारी फाइलों के पेंडिंग रहने से परेशान थे। गृह विभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास ही है तो ऐसे में शुक्लाजी के बार बार अवकाश लेने और अवधि बढ़ाते रहने से महत्वपूर्ण फाइलों के निपटारे में देरी होती। ऐसा नहीं है कि उन्हें यहां लंबा समय हो गया था बल्कि जनवरी 2026 में ही शिवशेखर शुक्ला के पास गृह विभाग आया था। मगर कुछ समय बाद ही वे वहां अनमने ढंग से काम करने लगे। कुछ समय से उन्होंने छुट्टी लेना शुरू कर दिया था जिससे फाइलों की पेंडेंसी बढ़ने लगी थी। सरकार ने बीच का रास्ता निकाला और उनसे गृह विभाग लेकर संजय कुमार शुक्ला को दे दिया। वैसे शिवशेखर शुक्ला के कामकाज की शैली का अंदाज संस्कृति विभाग के प्रतिष्ठित Khajuraho Dance Festival जैसे आयोजन में लापरवाही से भी लगाया जा सकता है। Khajuraho Dance Festival 2026 में एक निजी संस्था के साथ मिलकर कार्निवल का आयोजन किया गया था जिसमें कई कलाकार भी शामिल होने आए थे। कार्निवल पांच दिन की जगह एक ही दिन चला और जो इसमें भाग लेने आए थे उन्हें ठहरने व खाने का खर्च तक स्वयं वहन करना पड़ा। कलाकारों को परफार्मेंस करने का मौका भी नहीं मिला था। चर्चा है कि शिवशेखर जी पर मेहरबानी उनकी उज्जैन में कलेक्टरी-कमिश्नरी की कमान है।
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आशीष का उतावलापन….
Madhya Pradesh BJP के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल राजनीति में जल्दी ऊंची उड़ान भरना चाह रहे हैं। प्रवक्ता से मीडिया प्रभारी बनने के बाद अब वे किसी तरह ऊंचे पद पर पहुंचना चाह रहे हैं। राजनीतिक नियुक्तियों में उनकी दाल नहीं गली क्योंकि ग्वालियर संभाग से कुछ नेताओं को सरकार ने नियुक्तियां दे दी हैं। क्षेत्रीय संतुलन की वजह से उन्हें अब प्रदेश स्तरीय राजनीतिक नियुक्ति मिलना मुश्किल है। ग्वालियर विकास प्राधिकरण में भी उन्हें मौका नहीं मिल सका। अब वे ढाई साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए ग्वालियर पूर्व सीट से प्रत्याशी बनने की जुगाड़ में हैं जिसके लिए स्थानीय राजनीति में अपने समर्थकों की टीम खड़ी करने में जुटे हैं। साथ ही अब उनकी एक और महत्वकांक्षा बताई जा रही है कि किसी तरह BJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति में जगह मिल जाए। इस लंबी छलांग के लिए जोड़ तोड़ करने के उनके प्रयास नजर भी आने लगे हैं। देखते हैं इस बार उन्हें कहां तक सफलता मिलती है।
श्रीराम तिवारी का भ्रमजाल….
Madhya Pradesh सरकार ने वीर भारत न्यास बनाया है जो संस्कृति विभाग के अधीन है। इसका कार्यालय रवींद्र भवन Bhopal की नई बिल्डिंग में है जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नाम पट्टिका लगी है मगर इस नाम पट्टिका में सीएम के नाम के नीचे न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी का नाम लिखा गया है। नाम पट्टिका से वीर भारत न्यास के कक्ष में भ्रम पैदा होता है कि कहीं मुख्यमंत्री डॉ. यादव की बैठक तो यहां नहीं है। हकीकत में यहां श्रीराम तिवारी बैठते हैं और मुख्यमंत्री की इस कक्ष में बैठक व्यवस्था है ही नहीं। इससे यह लगता है कि श्रीराम तिवारी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ कर वीर भारत न्यास का कामकाज कर रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि कक्ष न्यासी सचिव का ही है और नाम पट्टिका केवल भ्रम पैदा कर अपना प्रभाव दिखाने की प्रतीत होती है।
इन पर जलदोष….
Madhya Pradesh में 2026 की शुरुआत जल आपदा से हुई थी जिसमें Indore के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई दिन तक मौतें होती रही थीं। और अब करीब आधा साल बीतने के बाद दूसरी जल आपदा Jabalpur में बरगी डेम में क्रुज के डूबने की घटना में कई मौतों तक यह सिलसिला जारी है। इन आपदाओं के पीछे कई तरह की चर्चाएं प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चल रही हैं। इन दोनों ही घटना में यह इत्तफाक कहें या कुछ और कि IAS Officer दिलीप कुमार यादव दोनों ही जगह जिम्मेदार पद संभाल रहे थे। Indore में जब घटना हुई तो दिलीप कुमार नगर निगम कमिश्नर थे और Jabalpur बरगी डेम में क्रुज डूबा तो वे मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के एमडी हैं। चर्चा है कि दिलीप कुमार यादव पर जलदोष है जिसकी वजह से उनका जलआपदाओं से किसी न किसी तरह संबंध जुड़ जाता है। तमाम दोष निवारण के उपाय सुझाने वाले क्या बताएंगे कि एक व्यक्ति के जलदोष का निवारण किस तरह हो सकता है।
Womens empowerment विजय पर पराजित
Womens empowerment को लेकर सरकारों द्वारा उन्हें आरक्षण देने के लिए संसद में विधेयक लाए जाते हैं तो चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा तमाम वादे किए जाते हैं मगर मध्य प्रदेश में एक राजनेता इस सबसे ऊपर साबित हो रहे हैं। सालभर पहले पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना के Operation Sindoor की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राजनीतिक दलों ने भारतीय सेना के जवाब की सराहना की थी। Operation Sindoor के एकसाल पूरा होने पर भी उसकी कामयाबी पर भारतीय सेना के तीनों प्रमुख अंगों के प्रमुखों ने उपलब्धियों को सार्वजनिक रूप से बताया था। मतलब Operation Sindoor पर सरकार, नेता, सैना सभी को गर्व हुआ था मगर उसकी प्रेस ब्रीफिंग करने वाली महिला सैन्य अधिकारी के खिलाफ Madhya Pradesh सरकार के मंत्री विजय शाह की बयानबाजी को लेकर आज तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है। अदालत भी कई बार कड़े शब्दों में सरकार को निर्देश दे चुका है मगर Womens empowerment यह विजय के खिलाफ पराजित हो गया है।
