कुरु कुरु स्वाहा के इस नियमित स्तंभ में इस बार हम आपको जो जानकारियां दे रहे हैं उनमें सबसे अहम केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर मध्य प्रदेश पर पड़ने वाले राजनीतिक प्रभाव से जुड़ी है तो देश के जाने वाले भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरू की टिप्पणी से मचे बवाल के बारे में भी बता रहे हैं। साथ ही आम आदमी के साथ आए दिन हो रहे सायबर फ्रॉड और राज्य शासन के इस शाखा को लेकर अपनाए जा रहे रुख की जानकारी भी शेयर कर रहे हैं और राजनीतिक दलों के वोट बैंक की खातिर कैसे बदले जाते हैं मापदंड इसके बारे में भी बता रहे हैं। आखिर में चलते चलते राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुए मध्य प्रदेश के नेताओं में से कौन तेज दौड़ रहा यह भी आपके सामने तथ्यों के साथ रख रहे हैं।
केंद्र की मोदी सरकार MODI GOVERNMENT के मंत्रिमंडल MINISTER विस्तार की चर्चाएं इन दिनों जोरों पर हैं। केंद्रीय राजनीति की इस हलचल का मध्य प्रदेश MADHYA PARDESH की राजनीति पर ज्यादा असर पड़ सकता है। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश UTTER PRADESH विधानसभा चुनाव होने तक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव CM Dr MOHAN YADAV की कुर्सी सलामत रखे जाने की जो बातें चल रही हैं जिसमें उन्हें मजबूत करने के लिए पार्टी के भीतर मौजूद उनके विरोधियों को कमजोर करने का गणित बैठाये जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो मध्य प्रदेश MADHYA PARDESH से 2023 में मुख्यमंत्री की कुर्सी से किनारा किए गए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान SHIVRAJ CHOUHAN और उनके समकक्ष नेताओं पर सबसे ज्यादा नजरें हैं। चौहान की केंद्रीय मंत्री की कुर्सी को हिलाने की कोशिशें हैं और उनके स्थान पर मध्य प्रदेश MADHYA PARDESH की औद्योगिक राजधानी इंदौर के दो बार के सांसद शंकर लालवानी MP SHANKAR LALWANI जैसे प्रबुद्ध तकनीकी ज्ञानवान वाले नए चेहरे को मौका दिया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस एक तीर से केंद्रीय नेतृत्व दो निशाने साधने का प्रयास कर सकता है जिसके घेरे में सीधे तौर पर शिवराज SHIVRAJ CHOUHAN आएंगे तो लालवानी MP SHANKAR LALWANI का कद बढ़ने से इंदौर की राजनीति में कैलाश विजयवर्गीय KAILASH VIJAYWARGIYA की लाइन स्वतः छोटी हो जाएगी। साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल MODI GOVERNMENT विस्तार में मध्य प्रदेश को स्थान देने के मामले में युवा चेहरों पर भी नजर रहने की खबरें हैं। उज्जैन से अनुसूचित जाति से आने वाले दो बार के सांसद व एक बार विधायक रहे युवा नेता अनिल फिरोजिया MP ANIL FIROJYA तो विंध्य के शहडोल की युवा महिला अनुसूचित जनजाति की सांसद हिमाद्री सिंह MP HIMADRI SINGH के नाम चर्चा में हैं। हिमाद्री MP HIMADRI SINGH दो बार की सांसद हैं। विंध्य से गणेश सिंह MP GANESH SINGH का नाम भी चर्चाओं में हैं जो पांच बार के सांसद हैं। देखना यह है कि शिवराज SHIVRAJ CHOUHAN को प्रदेश से हिलाने वाले केंद्र से कैसे हिलाते हैं और प्रदेश के किस युवा नेता को मौका देकर पार्टी 2028 के लिए किस तरह की राह तैयार करती है।
पत्रकारिता के छात्रों के बीच कुलगुरू की भड़ास …. सज्जन व्यक्ति पर टिप्पणी से घिरे
भावी पत्रकारों के शिक्षा संस्थान माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय MAKHANLAL CHATUVEDI RASHTRIYA PATRKARITA EVAM SANCHAR VISHVIDHYALAY में पूर्व छात्रों के अखिल भारतीय आयोजन में कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी VC VIJAY MANOHAR TIWARI ने मंच से भाषण में एक अतिथि के नहीं आने पर जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसको लेकर तमाम पत्रकार और प्रबुद्धजन आलोचना कर रहे हैं। पालक संस्था जनसंपर्क संचालनालय के संचालक आईएएस अधिकारी अरविंद दुबे IAS ARVIND DUBEY के आमंत्रण के बाद नहीं पहुंचने पर कुलगुरू VC VIJAY MANOHAR TIWARI ने उनकी शिकायत मुख्यमंत्री से करने और नहीं आने के लिए माफी मांगने की बात कही थी। मैं इन दोनों ही प्रबुद्धजनों के साथ काम कर चुका हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से डिग्री लेने के बाद दैनिक नईदुनिया में अरविंद दुबे ने हमारे साथ काम किया है तो विजय मनोहर तिवारी के साथ हमने दैनिक भास्कर में काम किया है। दुबे जी IAS ARVIND DUBEY के पिता भी राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रह चुके हैं और अरविंदजी के साथ मैंने काम किया तो उनके पिता के समय कलेक्ट्रेट की रिपोर्टिंग की थी। विजय मनोहर तिवारी VC VIJAY MANOHAR TIWARI जिस तरह प्रगति की सीढ़ियां चढ़े हैं, वह आलोचकों ने सोशल मीडिया पर खुलकर बता दी हैं तो और उनकी भावी योजनाओं को खोलकर रख दिया है। मगर दुबे जी IAS ARVIND DUBEY को लेकर किसी ने विपरीत टिप्पणी नहीं की है। इसलिए यह सही है कि कृपा वाले ओहदे पर बैठे कुलगुरू को व्यक्ति को देखकर अपने विचार कहीं रखने चाहिए।
फिर इंटेलीजैंस के साथ सायबर की जिम्मेदारी …. जन सामान्य की अनदेखी
मध्य प्रदेश MADHYA PARDESH में पुलिस के आला अधिकारियों को जिम्मेदारियों के बंटवारे में जन सामान्य की अनदेखी सी हो रही है। इसका अंदाज आला अधिकारियों की नियमित मॉनीटरिंग की आवश्यकता वाली सायबर शाखा Cyber Wing को राज्य शासन अतिरिक्त प्रभार जैसा व्यवहार होने से लगाया जा सकता है। इस सायबर शाखा Cyber Wing के काम को पिछले कुछ सालों से इंटेलीजैंस शाखा जैसी महत्वपूर्व शाखा के साथ अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंपा जा रहा है। 31 अगस्त को रिटायर हो रहे ए साईं मनोहर पहले सायबर शाखा Cyber Wing के स्वतंत्र प्रभार में थे मगर जब उन्हें इंटेलीजैंस की जिम्मेदारी मिली तो सायबर शाखा अतिरिक्त प्रभार के रूप में उनके साथ जोड़ दी गई। पूरे समय तक सायबर शाखा Cyber Wing साईं मनोहर के पास इसी तरह जुड़ी रही और उनके इंटेलीजैंस के काम के दबाव की वजह से सायबर शाखा Cyber Wing का काम नीचे के अधिकारी देखते रहे। अब जब साईं मनोहर रिटायर हो रहे हैं तो उनके स्थान पर जिन अंशुमान यादव को इंटेलीजैंस की जिम्मेदारी दी गई है। मगर उन्हें भी सायबर शाखा Cyber Wing का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है जबकि आज आमजन सायबर फ्रॉड से पीड़ित होता रहता है। सालों तक पीड़ित अपने साथ हुए फ्रॉड के केस में रिकवरी की प्रतीक्षा करता है मगर आला अफसरों की नियमित मॉनीटरिंग नहीं होने से उनकी जांच की प्रगति धीमी रफ्तार से होती है। यह आमजन की अनदेखी नहीं तो क्या है क्योंकि सायबर फ्रॉड करने वाले इतने अपडेट होते रहते हैं कि जब तक पुलिस की सायबर शाखा Cyber Wing अपडेट नहीं रहेगी तो वह उनके तरीकों के बारे में जान नहीं सकेगी।
भाजपा के लिए मंत्री विजय शाह जरूरी क्यों …. आदिवासी या सेना-महिला के सम्मान में से चुनाव मुश्किल
राजनीतिक दलों के सत्ता में बने रहने के लिए वोट ज्यादा महत्वपूर्ण होता है जो समय समय पर होने वाले घटनाक्रमों से सामने आता रहता है। लगता है कि भाजपा भी इससे अछूती नहीं रही है। सेना ARMY और महिलाओं के सम्मान को लेकर कई बार भाजपा नेता भाषणों में बातें कहते है। कारगिल हो या पुलवामा, ऑपरेशन सिंदूर भाजपा ने लोगों में इन्हें आगे रखकर देशप्रेम की बड़ी बड़ी बातें कहीं तो महिलाओं Woman के सम्मान के लिए तीन तलाक, लाड़ली लक्ष्मी, लाड़ली बहना जैसी योजनाओं को लेकर उनके प्रति अपने आपको हितैषी बताया। मगर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस महिला Woman सैन्य अधिकारी के प्रति मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह ने अपमानजनक टिप्पणी की उन पर कार्रवाई करने में सरकार ने करीब सवा एक साल का समय गुजार दिया है। सुप्रीमकोर्ट तक ने राज्य शासन को इसमें हस्तक्षेप कर दिया है मगर अभी भी सरकार दाएं बाएं हो रही है। वजह यह है कि मध्य प्रदेश MADHYA PARDESH विधानसभा में अनुसूचित जनजाति यानी आदिवासियों की 47 सीटें हैं और विजय शाह इसी वर्ग से आते हैं। भाजपा अपने वोट बैंक आदिवासी, महिला में से किसे चुने यह तय नहीं कर पा रही है जिससे उसके सेना ARMY व महिलाओं Woman के प्रति सम्मान की बातों को देशप्रेम व महिलाओं Woman के सम्मान को कोरा दिखावा माना जाने लगा है।
ग्वालियर में आशीष के स्वागत से सुगबुगाहट …. केंद्रीय नेतृत्व कैसे लेगा पता नहीं
भाजपा BJP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मध्य प्रदेश MADHYA PARDESH के छह दिग्गज नेताओं को लिया गया है जिनमें वीडी शर्मा, लालसिंह आर्य, बंसीलाल गुर्जर, गजेंद्र पटेल, कविता पाटीदार और आशीष अग्रवाल शामिल हैं। इनमें से केवल आशीष अग्रवाल Ashish Usha Agrawal का पदभार ग्रहण के बाद पहली बार गृहनगर ग्वालियर पहुंचने पर ऐसे स्वागत हुआ जैसे चुनाव जीतने के बाद या मुख्यमंत्री CM व मंत्री बनने के बाद किसी नेता जी का अपने गृहनगर पहुंचने पर होता है। हालांकि उनके गृहनगर पहुंचने की सूचना सोशल मीडिया पर कुछ दिन पहले से ही दिखाई देने लगी थी। जब वे पहुंचे तो काफिले में विजयी मुस्कान जैसे मुद्रा में वाहन की अगली सीट पर खड़े होकर हाथ जोड़ते हुए हारफूलों से लदे दिखे। ग्वालियर भाजपा के नेताओं ज्योतिरादित्य सिंधिया Jyotiraditya Scindia, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर Narendra Singh Tomar, पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा Narrotam Mishra का गढ़ है जिसमें आशीष अग्रवाल Ashish Usha Agrawal के स्वागत की तस्वीरों ने इन नेताओं के कान भी खड़े कर दिए हैं। ये नेता केंद्रीय नेतृत्व के करीब भी माने जाते हैं तो समय बताएगा कि केंद्रीय नेतृत्व आशीष अग्रवाल Ashish Usha Agrawal के पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पद मिलने के बाद स्वागत कराने के तरीके को किस नजरिये से देखता है या उसे दिखाया जाता है। वैसे यह कहा जा रहा है कि आशीष अग्रवाल Ashish Usha Agrawal की निगाह ग्वालियर की एक विधानसभा सीट पर है और माना जा रहा है कि इस स्वागत के पीछे अप्रत्यक्ष रूप से उन्होंने ताकत भी दिखाने की कोशिश की है।
