मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में राज्यसभा चुनाव Rajya sabha election में भाजपा BJP और कांग्रेस INC ने नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के चार दिन पहले प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर कयासों को न केवल विराम दे दिया बल्कि दबाव की राजनीति की कोशिशों को पूरी तरह दरकिनार करके फैसला किया। जहां भाजपा में ब्राह्मण कार्ड Brahmin Card के लिए जो नाम चल रहे थे, वे पहले भी अपने लिए मीडिया का प्रयोग करते रहे हैं तो वहीं कांग्रेस में जिनके नाम चर्चा में थे, उनमें से कुछ ने दबाव की राजनीति भी अपनाने के लिए खुद को सुर्खियों में बनाकर रखा था। पढ़िये इस पर विशेष रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त हो रही हैं जिनमें से दो भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी व जार्ज कुरियन और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का कार्यकाल पूरा होने की वजह से खाली रही हैं। दिग्विजय सिंह और सुमेर सिंह सोलंकी का छह साल का कार्यकाल पूरा हुआ है तो कुरियन 2024 में सिंधिया के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा देने पर मध्य प्रदेश से निर्विरोध निर्वाचित हुए थे व उनका कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। राज्यसभा की इन तीनों सीटों के लिए नौ जून को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने वाली है। चुनावों Rajya sabha election के लिए भाजपा और कांग्रेस ने इस बार नामांकन के अंतिम दिन का इंतजार नहीं किया और चार दिन पहले प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है।
भाजपा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए कांग्रेस से पार्टी में पहुंचे सुरेश पचौरी, विधानसभा चुनाव हार के बाद जिनके सितारे गर्दिश में चल रहे नरोत्तम मिश्रा ने ब्राह्मण कार्ड Brahmin Card के नाम पर दबाव बनाने के लिए सुर्खियों में बनाकर रखा। इन नेताओं के पक्ष में मीडिया में जोर-शोर के साथ कुछ दिनों से रिपोर्टें लिखी व दिखाई जा रही थीं। वैसे इन नेताओं के बारे में यह कहा जाता है कि जब वे पॉवर में थे तब भी दबाव की राजनीति करते थे और अभी वे पॉवर हासिल करने के लिए कुछ इसी तरह के हथकंडे अपनाते नजर आ रहे थे। पचौरी कांग्रेस INC की तरह दिल्ली में डेरा डालकर भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ लगातार मुलाकातें करते रहे तो नरोत्तम मिश्रा धार्मिक आयोजनों के माध्यम से कोशिशें करते रहे। मगर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व में करीब डेढ़ दशक से जिस तरह चौंकाने वाले फैसले लेता रहा है, वह इन राज्यसभा चुनाव Rajya sabha election में प्रत्याशी चयन में उसने कर दिखाया है। ब्राह्मण कार्ड Brahmin Card की बातों को कोरी कल्पना साबित करते हुए मध्य प्रदेश भाजपा जमीन कार्यकर्ता रजनीश अग्रवाल Rajneesh Agrwal को मौका दिया तो वहीं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरण चुघ Tarun Chug को राज्यसभा (Rajya sabha election ) भेजने का फैसला लेकर सबके मुंह पर ताले लगा दिए हैं।
इधर, कांग्रेस INC में राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ Kamalnath का नाम जिस तरह सबसे आगे बताया जा रहा था, उसे पार्टी हाईकमान ने कोरी कल्पना दिखा दिया। लोकसभा oksabha में नेता प्रतिपक्ष LOP राहुल गांधी Rahul Gandhi की टीम के अहम सदस्य मानने वाले पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने भी मीडिया को राज्यसभा चुनाव Rajya sabha election में उतरने में कभी अरुचि नहीं दिखाई और खबरों का खंडन भी नहीं किया। कमलेश्वर पटेल विधानसभा चुनाव हारने के बाद उच्च सदन में जाने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से प्रयास भी करते नजर आए हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री व पूर्व पीसीसी अध्यक्ष अरुण यादव पार्टी की ओबीसी के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति की वजह से प्रयासरत थे। हालांकि उनके प्रयास गंभीर कभी नजर नहीं आए। राज्यसभा चुनाव Rajya sabha election में प्रत्याशी बनाए जाने के लिए कुछ विधायकों ने भाजपा नेता व विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपने नेता के लिए कांग्रेस हाईकमान पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाने की कोशिश भी की थी मगर पार्टी अपने फैसले पर अटल रही और उसने राहुल गांधी Rahul Gandhi टीम की सदस्य पूर्व लोकसभा सदस्य मीनाक्षी नटराजन Meenakshi Natrajan को मैदान में उतार दिया।
