इन दिनों शिक्षा को मजाक (Education Scam) बना दिया गया है। भोपाल में पशु चिकित्सा पत्रोपाधि कॉलेज के एक संविदा शिक्षक को पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (Veterimary University) ने प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी है जबकि पता चला है कि उपरोक्त शिक्षा मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल में ही नहीं राजस्थान (Rajasthan) के बीकानेर शहर के पशु चिकित्सा महाविद्यालय में भी शिक्षण कार्य के लिए सेवाएं देता है। पढ़िये इस पर विशेष रिपोर्ट।
पशु चिकित्सा की शिक्षा देने वाली संस्थाओं को नियंत्रित करने वाले मध्य प्रदेश के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (Veterimary University) अपने अधीनस्थ की संस्थाओं पर पकड़ रखने में कमजोर साबित हो रहा है। विश्वविद्यालय ने पिछले सप्ताह भोपाल के पशु चिकित्सा पत्रोपाधि कॉलेज ( Veterinary College Bhopal) में प्रभारी प्राचार्य की पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इसमें भोपाल के उपरोक्त कॉलेज में संविदा के रूप में शिक्षण के लिए सेवाएं दे रहे डॉ. गौरव साहू को प्रभारी प्राचार्य के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।मगर इस आदेश के बाद डॉ. गौरव साहू द्वारा एक ही समय में दो अलग-अलग स्थानों पर शिक्षण कार्य की सेवाएं देने की जानकारियां निकलकर सामने आई हैं।
भोपाल के अलावा बीकानेर में भी शिक्षक
डॉ.गौरव साहू के भोपाल के पशु चिकित्सा पत्रोपाधि कॉलेज ( Veterinary College Bhopal) के प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने के बाद सामने आया है कि वे बीकानेर के एमही वेटनरी कॉलेज में भी असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। बीकानेर में वे वेटनरी मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। भोपाल में डॉ. साहू प्रभारी प्राचार्य का दायित्व मिलने के पहले संविदा पर शिक्षण की जिम्मेदारी संभाले हुए थे। यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि डॉ. साहू ने एक ही समय में दो नियोजन पर कार्य किया है जो संविदा नियुक्ति के नियमों के विरुद्ध है।
सैकड़ों दूरी के फासले में एक ही समय में शिक्षण कार्य
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल और राजस्थान (Rajasthan) के बीकानेर के बीच की दूरी करीब 800 किलोमीटर है। इस दूरी के अंतर को देखकर यह संभव नहीं है कि कोई भी व्यक्ति एक ही समय में एकसाथ इन स्थानों पर मौजूद रह सकता है। इन शहरों में शिक्षण जैसे कार्य के लिए भी व्यक्ति को कम से कम एक सप्ताह में तीन-तीन दिन एक स्थान पर रहकर कार्य किया जा सकता है।
