ग्वालियर-चंबल क्षेत्र राजनीति में हमेशा से सिंधिया परिवार एक शक्ति केंद्र रहा है। चाहे वे कांग्रेस में रहे हों या भाजपा में। इन दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में हैं तो वहां एक शक्ति केंद्र तो वे हैं ही, दूसरे नरेंद्र सिंह तोमर हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से लेकर केंद्रीय मंत्री और अब विधानसभा अध्यक्ष पद पर रहते हुए ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के भाजपा के फैसलों में उनका खासा दखल रहता है। इन दो के अलावा वहां तीसरे शक्ति केंद्र के रूप में प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। ग्वालियर के मूलतः रहने वाले अग्रवाल वीडी शर्मा के बाद हेमंत खंडेलवाल की टीम में हैं और अब ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बनने की दिशा में उनकी कोशिशें तेज हैं। राजनीतिक गलियारों में चुटीले अंदाज में कहा जाने लगा है कि बनिये तीसरे शक्ति केंद्र।
व्यापम घोटाले में गले-गले तक फंसे धनाढ्यों के पाप धीरे-धीरे धुलते जा रहे हैं क्योंकि वे जांच एजेंसियों की जांच में छोड़े गए सुराखों से अदालतों से बेदाग साबित हो रहे हैं। घोटाले में चर्चित रहे एक करोड़पति भी सीबीआई-एसटीएफ-आयकर के शिकंजे में फंसे थे, जेल में भी लंबा समय बिताया। पहले वे प्रदेश के एक युवा मंत्री के ऐसे निकट थे कि वृंदावन की हवाई यात्राएं करते कराते रहते थे। अब उनकी आस्थाएं उसी पार्टी के दिल्ली पहुंचे नेता के प्रति हो गई हैं। इन नेताजी ने दागदार से बेदाग हुए करोड़पति महाशय का उनके जन्मदिन पर फूलों से अभिषेक करके महिमा मंडन किया। दूध से भले ही नहीं धुले हों मगर नेताजी के फूलों से अभिषेक की वजह से उसकी खुशबू से जरूर महकने लगे हैं।
पूर्व मंत्री, बेटे बहू को बना रहे विकल्प
परिवारवाद पर राजनीति में तमाम आलोचनाओं के बाद भी इस नस्ल के लोग अपने हितों के आगे दूसरे दावेदारों की सोचते नहीं हैं। भाजपा में मुख्यमंत्री रहने के बाद नेताजी ने जिस तरह अपनी बहू को सीढ़ी दर सीढ़ी आगे बढ़ाया, उसी तर्ज पर कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री काम कर रहे हैं। नेताजी चुनाव हार चुके हैं और अब उन्हें अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कुछ शंकाएं हैं तो उन्होंने अपने परिवार को मौका दिलाने के लिए राजनीतिक गोटियां फेंकना शुरू कर दी हैं। चुनावी राजनीति में बेटे बहू को उतारने के लिए अभी से सीढ़ी दर सीढ़ी काम कर रहे हैं। असम चुनाव में बेटे को भेजने के साथ पूर्व मंत्रीजी ने बहू को महिला कांग्रेस में प्रवेश करा दिया है। है न राजनीतिक चालबाजी, खुद को पार्टी अगर मौका नहीं दे तो युवा व महिला के नाम पर कुछ बात बन जाए।
पत्रकारिता संस्थान के प्रोफेसर के घर दीवार से
बंटवाराविवादों में रहने वाले एक पत्रकारिता संस्थान के प्रोफेसर के भोपाल स्थित सरकारी मकान में दीवार से बंटवारा हो गया है। बंटवारा दो महिलाओं के कारण हुआ है जिनमें से एक महिला उनकी धर्मपत्नी है और उनका एक बेटा भी है। दूसरी महिला प्रोफेसर साहब की मित्र हैं। पत्रकारिता संस्थान के प्रोफेसर पहले मध्य प्रदेश भाजपा में रहे हैं और उन्हें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर टिप्पणी के बाद निकाल दिया गया था। इसके बाद से महाराष्ट्र पहुंच गए थे और इन दिनों देश के शिखर हिमालय क्षेत्र के एक शहर में पत्रकारिता के छात्रों को पढ़ा रहे हैं। भोपाल के सरकारी निवास में अस्थाई दीवार के एक हिस्से में धर्मपत्नी बेटे के साथ रहते हुए अपने अधिकार के लिए लड़ाई लड़ रही हैं।
फेल होकर डेढ़ साल में पास होने का रहस्य
मोहन सरकार ने आते ही प्रशासनिक कामकाज के मूल्यांकन के आधार पर कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को अपने अनुभव के आधार पर आकलन में फेल मानते हुए साइड लाइन कर दिया था। इनमें एक राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नत होने वाले अधिकारी भी थे। सरकार ने उन्हें न केवल पद से हटा दिया था बल्कि कई दिनों तक बिना काम के वेतन भी दिया था। डेढ़ साल में सरकार की नजरों में फेल अधिकारी प्रशासनिक क्षमतावान बन गए और उन्हें जिस विभाग से हटाया गया था, वहीं बैठा दिया गया है। वैसे यह अधिकारी प्रशासनिक क्षमताओं और राजनीतिक जमावट में ऐसे मास्टर हैं कि दिग्विजय सिंह सरकार से लेकर शिवराज सरकार तक अच्छी पोस्टिंग पाते रहे थे और अब मोहन सरकार पर उनकी जादू छड़ी ने काम दिखा दिया है।
