चार साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Narendra Modi के जन्मदिवस से भारत में विलुप्त हो चुके चीतों Cheeta के अफ्रीका से अंतर महाद्वीपीय मांसाहारी पशु पुनर्वास कार्यक्रम के लिए चुने गए मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क Kuno National Park पर शिकारियों की गिद्ध दृष्टि लग गई है। यहां एक नर शावक का बंदूक से शिकार किया गया। उसकी सर्जरी के दौरान पांच गोलियां निकली थीं जिससे वह उपचार के बाद भी बचाया नहीं जा सका। मध्य प्रदेश के वन विभाग की लापरवाही की वजह से शिकारियों की गतिविधियां लगातार जारी हैं क्योंकि यहां शिकारियों श्योपुर, शिवपुरी और कूनो के चीता वाले इलाकों में शिकारियों के पकड़े जाने के बाद भी सुरक्षा तंत्र को मजबूत नहीं किया गया। पढ़िये हमारी यह रिपोर्ट।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Narendra Modi के 17 सितंबर 2022 जन्मदिव पर उनके ड्रीम ‘ चीता Cheeta प्रोजेक्ट’ की मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क Kuno National Park में शुरुआत हुई थी और अफ्रीका से लाए चीतों को यहां छोड़ा गया था। मगर मंगलवार को यहां शिकारियों ने इसे झटका दिया है। कूनो नेशनल पार्क की सुरक्षा व्यवस्था और वन विभाग की निगरानी के दावों को कठघरे में खड़ा कर शिकारियों ने मादा चीता Cheeta नीर्वा के 19 माह के नर शावक KNG22 को गोली से निशाना बनाया। घायल शावक का इलाज शुरू हुआ तो उसके शरीर से सर्जरी कर पांच गोलियां निकाली गईं। गोलियां निकलने के बाद भी शावक की 27 अक्टूबर को मौत हो गई। इस घटना ने महज एक वन्यजीव की मौत को नहीं वरन विलुप्त चीता Cheeta के पुनर्वास की परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके लिए अब क्या मध्य प्रदेश की चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन CWLW डॉ. समिता राजौरा को जिम्मेदार माना जाएगा या फील्ड डायरेक्टर कूनो FD उत्तम शर्मा को कटघरे में खड़ा किया जाएगा।
मौत के बाद केंद्र की सक्रियता, पहले क्यों नहीं हुई निगरानी की समीक्षा?
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम भेजी है। इसमें राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के वन महानिरीक्षक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के अतिरिक्त निदेशक और WCCB के क्षेत्रीय उपनिदेशक शामिल हैं। टीम गोली लगने की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों, सुरक्षा प्रोटोकॉल और निगरानी व्यवस्था की जांच करेगी। राज्य सरकार ने भी वन एवं पुलिस अधिकारियों को शामिल कर विशेष कार्य बल (STF) गठित किया है। लेकिन जांच का दायरा केवल गोली चलाने वाले शिकारी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह भी तय होना चाहिए कि चीता संरक्षित क्षेत्र से बाहर कैसे पहुंचा, उसकी गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी और संवेदनशील वन क्षेत्रों में शिकारियों की घुसपैठ रोकने के लिए क्या इंतजाम थे।
प्रोजेक्ट चीता की साख दांव पर
कूनो में चीतों Cheeta की पुनर्स्थापना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की महत्वाकांक्षी वन्यजीव संरक्षण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ऐसे में एक युवा चीते की गोली मारकर हत्या होना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता की आशंका पैदा करता है। अब केंद्रीय टीम की जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह शिकारियों की सुनियोजित घुसपैठ थी या मैदानी स्तर पर निगरानी और सुरक्षा में लापरवाही का नतीजा।
केंद्रीय टीम मध्य प्रदेश पहुंची
जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने उच्चस्तरीय केंद्रीय टीम मध्यप्रदेश भेजी है। सवाल यह है कि जिस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं और जिसकी निगरानी के लिए वन विभाग का बड़ा अमला तैनात है, वहां एक रेडियो कॉलर से लैस चीते Cheeta पर गोली चलने की घटना कैसे हो गई? शिकारी जंगल में हथियार लेकर पहुंचे और वन अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी? यदि चीते की गतिविधियों की नियमित निगरानी हो रही थी, तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं की जा सकी?
PCCF वाइल्डलाइफ की निगरानी पर भी सवाल
इस पूरे मामले में कूनो के फील्ड डायरेक्टर (FD) और डीएफओ की भूमिका के साथ पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ की निगरानी और जवाबदेही भी सवालों के घेरे में है। आखिर चीता परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा किस स्तर पर हो रही थी? श्योपुर, शिवपुरी और कूनो के चीता लैंडस्केप में शिकारियों के गिरोह पकड़े जाने तथा रेडियो कॉलर लगे तेंदुओं के अवैध शिकार की घटनाओं के बावजूद सुरक्षा तंत्र को मजबूत क्यों नहीं किया गया? पहले सामने आए मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? क्या वरिष्ठ अधिकारियों ने इन घटनाओं से कोई सबक लिया? वन्यजीव प्रबंधन में प्रशासनिक लापरवाही और अहम सबूतों को छिपाने के आरोप भी पहले उठाए जाते रहे हैं। उच्च अधिकारियों को बार-बार आगाह किए जाने के बावजूद यदि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
यह है घटना
25 अक्टूबर को KNG22 कूनो नेशनल पार्क Kuno National Park के संरक्षित क्षेत्र से बाहर मुरैना के वन क्षेत्र में गंभीर रूप से घायल मिला था। उसी दिन वन विभाग ने उसे रेस्क्यू कर श्योपुर वन प्रभाग से जबलपुर के पशु चिकित्सा केंद्र पहुंचाया। वहां उसकी आपातकालीन सर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान शरीर से बंदूक के पांच पैलेट निकाले गए। मेडिकल जांच में भी गोली लगने से कई गंभीर आंतरिक चोटों की पुष्टि हुई। दो दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 27 अक्टूबर को उसने दम तोड़ दिया।
