कुरु कुरु स्वाहा kuru kuru swaha के इस बार नियमित स्तंभ में हम आपको जो जानकारियां दे रहे हैं उनमें सबसे अहम नशामुक्ति Drug Free में सरकार के शराब सौदागर रूप से जुड़ी है तो साथ में बता रहे हैं कारोबारी बनते जा रहे बाबाओं के बारे में भी। फिर आपको लोकसेवक मंत्रियों के संविधान की शपथ का मखौल बनने से जुड़ी जानकारी दी जा रही है और यह भी बता रहे हैं कि कांग्रेस के कार्यक्रम से दूर दिग्विजय के यात्रा से जुड़ी सूचना। चलते चलते आपको यह बता रहे हैं कि भोपाल के एक बड़े हादसे में कैसे नेताजी पर आंच आई। इसके लिए आप हमारे साथ जुड़े रहिये। हमारे कुरु कुरु स्वाहा यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक व वेबसाइट को लॉगइन कर पढ़ते रहिये और उन्हें शेयर, लाइक व सब्सक्राइव कीजिए।
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नक्सलमुक्त के बाद नशामुक्त प्रदेश अभियान के बीच शराब से मौतें …. सवाल जीएसटी से मुक्त रखने वाली सरकार शराब की सौदागर है या नहीं
भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारें नशामुक्त अभियान चला रही हैं जो समाज सुधार के लिए अच्छा प्रयास है। जहां पंजाब में नशामुक्त Drug Free राज्य बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार कार्यक्रम कर रही है और गृह मंत्री अमित शाह ने खुद इसकी बागडोर संभाल रखी है वहीं, मध्य प्रदेश जैसे राज्य में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जिनके पास गृह विभाग भी है उनकी पुलिस इसके लिए अभियान चला रही है। मगर यह सब समाज सुधार के लिए हो रहा है या राजनीतिक दांव है, यह सवाल लोगों के जहन में कौंधने लगा है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव है तो भाजपा की नजरें वहां की इस मुख्य समस्या पर समाज सुधार नहीं बल्कि सत्ता की चाबी हासिल करना ज्यादा दिखाई देता है। वहीं, मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में नशामुक्त Drug Free प्रदेश के अभियान में राज्य सरकार की दोहरी नीति से समाज की इस बुराई के समाप्त होने की संभावना दूर दूर तक दिखाई नहीं दे रही है। यह संदेह इसलिए उठता है कि सरकार नशे के एक प्रकार शराब को क्या नशीला पदार्थ नहीं मानती है क्योंकि वह तो इसके सौदागरों जैसे काम करती है। शराब से राजकोष भरने के लिए उसके व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल ज्यादा से ज्यादा प्रतिशत शुल्क बढ़ाकर ठेके दिए जाते हैं और उन्हें व्यापार में लाभ देने के लिए जीएसटी लगाने की दिशा में कभी विचार तक नहीं किया गया। सरकार के इस रवैये से आम नागरिक परेशान होकर शराब के ठेकों वाली दुकानों के बस्तियों के आसपास खोले जाने का लगातार विरोध भी करते हैं। शराब के गोरखधंधे में अवैध शराब का कारोबार भी खूब पनपता है जिसके सूत्र उन राज्यों से जुड़े होने के लगातार प्रमाण सामने आ चुके हैं जहां शराब प्रतिबंधित है। सागर में हुई अवैध जहरीली शराब से मौतों का ताजा मामला सामने है और हाल ही में देवास जिले के दो गांवों में डेढ़ दर्जन से ज्यादा संदिग्ध मौतों की घटना सामने आई है। हालांकि देवास की घटना को पुलिस अवैध जहरीली शराब पीने से होने की पुष्टि नहीं कर रही है। सरकार के एक अच्छे प्रयास पर यह संदेह इसलिए हो रहा है क्योंकि मध्य प्रदेश Madhya Pradesh को नक्सलमुक्त राज्य घोषित किया गया है। यह वही मध्य प्रदेश Madhya Pradesh है जहां नक्सली समस्या से निपटने के लिए बालाघाट व मंडला जैसे जिलों के लिए केंद्र सरकार पैसा देने में कंजूसी करती रही थी। तब कहा जाता रहा था कि मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में नक्सली कोई वारदात नहीं करते हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश Madhya Pradesh के बालाघाट और मंडला को चिंताजनक नक्सल वाला क्षेत्र बताकर उसे नक्सलमुक्त Drug Free किए जाने का ऐलान करने वाली सरकारों के मध्य प्रदेश Madhya Pradesh या अन्य राज्यों में नशामुक्ति Drug Free की कार्ययोजना तैयार की कवायद कागज में फिर सफल करार देने की कोशिश नजर आती है।
मध्य प्रदेश में बाबाओं का आशीर्वाद किन्हें …. बाबा बने रियल एस्टेट कारोबारी, शिक्षा माफिया, इनवेस्टर
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh बाबाओं Prescrition Baba का शरणस्थली बन चुका है। पर्ची निकालकर लोगों के घरों के भीतर की बातों को उजागर करने का डर दिखाने वाले बाबा Prescrition Baba से लेकर मौन रहकर नेताओं को आशीर्वाद देने और उनके आशीर्वाद से खुद के कारोबार को दिन दूना रात चौगुना करने वाले सभी यहां पनप रहे हैं। ऐसे बाबा Prescrition Baba सोशल मीडिया Social Media प्लेटफार्म अपनी पोस्ट डालकर प्रचार प्रसार करते हैं और लोगों के घरेलू मामलों के वीडियो बनाकर डालने में उन्हें कोई परहेज नहीं हो रहा है। ऐसे बाबा Prescrition Baba बुंदेलखंड Bundelkhand से लेकर ग्वालयिर-चंबल तक में फैले हैं जिनके साइड बिजनेस भी चर्चाओं में रहे हैं। कोई रियल एस्टेट Real estate कारोबार से जुड़ा है तो कोई शिक्षा माफिया Education Mafiya का जाल फैला चुका है। कोई इनवेस्टर Investor के रूप में राज्य सरकारों का करीब भी बन गया है। इन दिनों एक बाबा Prescrition Baba के भोपाल में बड़े बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगे हैं। इन दिनों एक बाबा के भोपाल में बड़े बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगे हैं। उनके एक करीबी पूर्व केंद्रीय कर्मचारी हैं और वे होर्डिंग व्यवसायी बनने के बाद अब होटल व मीडिया में इनवेस्टमेंट किया है। कहा जाता है कि ये बाबा के पैसों के हैंडलर भी हैं और बाबा Prescrition Baba हाल ही में उनके भोपाल में नवनिर्मित आलीशान मकान के गृह प्रवेश के लिए वहां कुछ दिन पूजा पाठ करने भी पहुंचे थे। प्रदेश के इन बाबाओं Prescrition Baba के शागिर्दों में सभी दलों के नेता मिल जाएंगे और मीडिया से जुड़े लोग भी अब इन बाबाओं Prescrition Baba को घर में भोज कराकर उनका आशीर्वाद लेने में पीछे नहीं हैं। कुछ नेता इन बाबाओं Prescrition Baba के खिलाफ भी हैं मगर अपने आकाओं के इशारों की वजह से वे खुलकर उनका विरोध भी नहीं कर पाते हैं। मगर यह सही है कि ये बाबा Prescrition Baba सामान्य लोगों को केवल डराते हैं और नेता या वीआईपी को आशीर्वाद देते हैं।
…. करें तो रासलीला और …. करें तो कैरेक्टर ढीला, पूर्व सीएम के संरक्षण में मार्च
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh भाजपा BJP में कई वरिष्ठ नेता उपेक्षित महसूस कर रहे हैं जिसकी वजह से कई बार इनमें से कुछ नेताओं ने बयानों में अपनी भड़ास भी निकाली है। पिछले दिनों इसी तरह का वाक्या सीहोर जिले के सिंहपुर के आदिवासी परिवारों के कब्जों को हटाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान Shivraj Singh Chouhan का सामने आया है। यह कब्जे कथित रूप से जंगल की कटाई कर किए गए थे जिनमें भाजपा BJP की नेता निर्मला बारेला के परिवार लोग भी शामिल हैं। चार बार मुख्यमंत्री और 2024 में केंद्रीय मंत्री के रूप में चौहान Shivraj Singh Chouhan ने संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखने की शपथ ली थी मगर उन्होंने अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देने के लिए न केवल विरोध किया बल्कि यह भी बातें वायरल हुईं कि उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई में बाधा डालने के लिए उन्हें उकसाया भी था। अपनी ही पार्टी की प्रदेश सरकार के खिलाफ उनके संरक्षण की वजह से इन कब्जाधारियों व उनसे जुड़े लोगों ने सरकार के खिलाफ भोपाल तक मार्च निकाला। इस मार्च में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त आदिवासी वित्त विकास निगम की अध्यक्ष निर्मला बारेला भी प्रमुख रूप से साथ दिखाई दीं। इन बड़े नेताओं के इस कृत्य को अनुशासनहीनता की परिधि में नहीं माना गया बल्कि उनके मार्च को रोकने के लिए रात में ही सीएम डॉ. मोहन यादव CM Dr Mohan Yadav व पार्टी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने शिवराज सिंह चौहान Shivraj Singh Chouhan व प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। बैठक में हुए फैसले की अंदरूनी बातें अभी तक सामने नहीं आईं हैं लेकिन यह अवश्य है कि सीएम CM Dr Mohan Yadav ने जांच का आश्वासन दिया। इस मामले में चार बार के मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री चौहान Shivraj Singh Chouhan तथा निगम की अध्यक्ष बारेला की साफ भूमिका दिखाई देने के बाद भी आज तक उनके खिलाफ अनुशासनहीनता का सवाल जवाब नहीं हुआ है जबकि आम कार्यकर्ता के मामूली बयानों पर उन्हें संगठन की ओर से तलब कर जवाब मांग लिया जाता है।
सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा कांग्रेस की नहीं कांग्रेसियों की….पदयात्रा में दिग्विजय का कदमताल कर रहे नेता
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह Digvijay Singh उज्जैन से अयोध्या की करीब साढ़े नौ सौ किलोमीटर की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर 20 अक्टूबर को निकले हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय Digvijay Singh की यह पदयात्रा कांग्रेस के अधिकृत कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है मगर इसकी भीड़ में कांग्रेस के नेता दिग्विजय Digvijay Singh के साथ कदमताल करते चल रहे हैं। बताया जाता है कि सनातन स्वाभिमान यात्रा के लिए मध्य प्रदेश के उज्जैन से लेकर टीकमगढ़ के ओरछा तक कांग्रेस के नेताओं को अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई है। मगर टीकमगढ़ के बाद जब यह उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी तो वहां दिग्विजय के संपर्क काम नहीं आ रहे हैं। एक समय वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी रहे हैं मगर यात्रा के प्रबंधन के लिए ढूंढने पर भी कोई सामने नहीं आ रहा है। वहीं, मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने खुद इसमें शामिल होकर अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेसजनों को व्यवस्था संभालने के संकेत दे दिए थे और यही वजह है कि उज्जैन से लेकर शाजापुर तक बड़े बड़े कांग्रेस नेता न केवल दिग्विजय सिंह Digvijay Singh के साथ दिखे बल्कि उनके काफिले का जमकर स्वागत भी हुआ। कहा जा रहा है कि पटवारी दिग्विजय सिंह को 2028 तक नाराज नहीं करना चाहते हैं क्योंकि वह ऐसे नेता हैं जो प्रदेश में कोई भी समीकरण बना या बिगाड़ सकते हैं।
आगजनी की आंच भाजपा नेता तक….नोटिसों के बाद भी नेताजी के दबाव में एक्शन नहीं हुआ और हो गया हादसा
भोपाल Bhopal के नए शहर के व्यस्ततम न्यू मार्केट में पिछले दिनों हुई आगजनी की घटना की आंच भाजपा BJP के एक वरिष्ठ नेता तक पहुंच गई है। इन नेताजी के करीबी के संस्थान में लगी आग की वजह से आसपास की आधा दर्जन से ज्यादा दुकानें चपेट में आईं थीं और करोड़ों का नुकसान हो गया था। आगजनी की घटना के बाद सामने आया कि नेताजी के करीबी के संस्थान को दुर्घटना की आशंका को देखते हुए प्रशासन की ओर से कुछ नोटिस जारी किए गए थे। यह नोटिस पुलिस थाने तक भी पहुंचे थे। मगर नेताजी के प्रभाव की वजह से प्रशासन ने नोटिसों के बाद भी सख्ती नहीं की और न ही पुलिस की ओर से प्रयास हुआ। जब हादसा हुआ तो संस्थान को जारी नोटिसों की बात सामने आई और फिर से उन्हें नजरअंदाज करने के लिए दबाव बना। मगर इस बार जिन संस्थानों को आगजनी से नुकसान झेलना पड़ा, उनके संचालकों ने पुलिस व प्रशासन पर ऐसा दबाव बनाया कि एफआईआर हुई। अब नेताजी इस एफआईआर को रफा दफा कराने के लिए संगठन व सरकार के माध्यम से प्रयासरत हैं। देखना यह है कि इस बार उनकी फिर चलती है या करोड़ों का नुकसान भुगतने वाले दुकानों के मालिकों को न्याय मिलता है।
