कुरु कुरु स्वाहा kurukuruswaha के इस बार नियमित स्तंभ में हम आपको जो जानकारियां दे रहे हैं उनमें सबसे अहम जानकारी सुरेश पचौरी Suresh Pachouri से जुड़ी है। कांग्रेस Congress में एकतरफा राजनीति करने वाले पचौरी की भाजपा में कैसे संभावनाएं बन रही हैं तो दूसरी जानकारी कांग्रेस Congress के वोट बचाओ देश बचाओ अभियान को लेकर बता रहे हैं। इससे प्रदेश नेतृत्व ने कैसे अपने विरोधियों को सक्रिय करने के लिए राजनीतिक समीकरण तैयार किए। तीसरी सूचना विकास के लिए सीएम CM की उज्जैन Ujjain में पैतृक संपत्ति के निर्माण को गिराने की पहल के विरोधीभासी है जो उनके गृह जिले के आला अफसर के परिवार से जुड़ी है। इस परिवार की वजह से भोपाल Bhopal में मेट्रो प्रोजेक्ट Metro Project के रास्ते में खड़े निर्माण हैं जो हट नहीं पा रहे हैं। इसके साथ आपको बताएंगे नेता प्रतिपक्ष CLP की हाईप्रोफाइल तकनीक वाली कार्यशैली के बारे में जो जनता व उनके बीच अवरोध बनकर खड़ी है। चलते चलते ओबीसी आरक्षण OBC Reservation व राजनीतिक दलों के ओबीसी नेतृत्व के बीच पार्टियों के राजनीतिक ऐजेंडे के बारे में बताएंगे जिसके कारण पिछड़ा वर्ग न इधर का रहा और न उधर का। इसके लिए आप हमारे साथ जुड़े रहिये। हमारे कुरु कुरु स्वाहा यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक व वेबसाइट को लॉगइन कर पढ़ते रहिये और उन्हें शेयर, लाइक व सब्सक्राइव कीजिए।
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh की राजनीति में कुछ साल पहले तक सुरेश पचौरी Suresh Pachouri एक ऐसे नेता थे जिनके आगे-पीछे कई नेता घूमते थे। कांग्रेस में उनका डंका भोपाल ही नहीं दिल्ली तक में बजता था और उनके बिना कांग्रेस की चुनावी राजनीति में टिकट फाइनल नहीं होते थे। वे इन दिनों भाजपा में हैं और वहां भी उनके साथ कांग्रेस के नेता पहुंच गए हैं। भाजपा में पहले से ही पुराने बड़े नेताओं की संख्या ज्यादा है फिर भी सुरेश पचौरी के लिए वहां संभावनाएं लगातार बनी हुई हैं। छह महीने पहले राज्यसभा की जार्ज कुरियन, सुमेर सिंह सोलंकी और दिग्विजय सिंह Digvijay singh की तीन रिक्त हुई सीटों में पचौरी को मौका नहीं मिलने पर उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल बनाए जाने की चर्चाएं की जाने लगी थीं। हाल ही में पार्टी ने मध्य प्रदेश के डॉ. ढालसिंह बिसेन Dr Dalsingh Bisen सहित छह नेताओं को राज्यपाल बना दिया और सुरेश पचौरी Suresh Pachouri का नाम फिर इस सूची में नहीं आ सका। मगर अभी भी कहा जा रहा है कि पचौरी के लिए भाजपा में संभावनाएं बरकरार हैं क्योंकि अब फिर मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य एल मुरुगन की सीट इस्तीफे की वजह से खाली हो गई है जिस पर उप चुनाव की घोषणा होने वाली है। पचौरी Suresh Pachouri के शुभचिंतकों का कहना है कि इस बार पचौरी को राज्यसभा सीट के उप चुनाव के लिए पार्टी मौका देगी और राज्यसभा में इस बार वे भाजपा का प्रतिनिधित्व करेंगे।
कांग्रेस के वोट बचाओ देश बचाओ अभियान में मध्य प्रदेश के 14 नेता …. नाम अभियान का विरोधियों को वनवास
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी Jitu Patwari के राहुल गांधी के लगातार करीब पहुंचने से पार्टी में वे ताकतवर नजर आ रहे हैं। उनके कई विरोधी घर में बैठे हैं या चुप्पी साधे हैं या फिर उनके आकाओं के इशारे पर काम कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि ऐसे लोगों को किसी न किसी बहाने से प्रदेश नेतृत्व सक्रिय करने की कोशिश करने में जुटी थी मगर इस बार उन नेताओं को अब प्रदेश के बाहर भेजकर राज्य में पार्टी के कार्यक्रम करने की योजना पर काम शुरू हुआ है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने वोट बचाओ देश बचाओ अभियान के लिए 208 लोगों की टीम खड़ी की है जो राज्यों में जिलास्तर पर काम करेगी। मध्य प्रदेश के 14 नेताओं के इसमें नाम हैं जिनमें कमलेश्वर पटेल, अरुण यादव, नीलांशु चतुर्वेदी, सत्यनारायण पटेल, अशोक सिंह, शोभा ओझा, विजयलक्ष्मी साधौ, बाला बच्चन, सज्जन सिंह वर्मा, पीसी शर्मा, सचिन यादव, सुखदेव सिंह, दिनेश गुर्जर और महेंद्र जोशी हैं। देखा जाए तो इन 14 नेताओं कमलेश्वर पटेल हो या अशोक सिंह या सज्जन सिंह वर्मा हैं। अब इन नामों में देखें तो कमलेश्वर पटेल से लेकर अरुण यादव तक को पटवारी का नेतृत्व भाता नहीं है और यदा कदा इन लोगों के समर्थकों को विरोध के स्वर में बातें भी करते भी सुना जा सकता है। अशोक सिंह का नाम पीसीसी चीफ के रूप में चर्चा में आता रहा है तो महासचिव सुखदेव पांसे को प्रियव्रत सिंह व संजय कामले के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है। कमलनाथ की टीम के सदस्य रहे पांसे, बाला, सज्जन सिंह, शोभा, दिनेश गुर्जर और पचौरी की टीम के सदस्य रहे विजयलक्ष्मी, महेंद्र जोशी पटवारी की टीम का हिस्सा बनते और दूर होते रहे हैं। वोट बचाओ देश बचाओ अभियान के लिए प्रदेश के 14 नेताओं के नाम की सूची पटवारी Jitu Patwari ने तैयार की थी जिनमें पटवारी Jitu Patwari के करीबी कुणाल चौधरी से लेकर विपिन वानखेड़े जैसे नेताओं सहित दिग्विजय सिंह Digvijay singh से जुड़े नेताओं के नाम नहीं है। कहा जा रहा है कि 14 नेताओं को वोट बचाओ देश बचाओ के बहाने मध्य प्रदेश से वनवास पर भेजा गया है।
सीएम और गृह जिले के अफसरों का विरोधाभासी आचरण …. सीएम विकास की बाधाएं हटा रहे अफसरों के परिवार जमाये अंगद के पैर
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव CM Mohan Yadav ने पिछले दिनों उज्जैन में विकास में बाधा बने अपनी पैतृक संपत्ति के हिस्से को गिराने के लिए सहमति देकर खूब सुर्खियां बटोरी थीं। इसके लिए समाचार व वीडियो वायरल हुए। मगर दूसरी तरफ उनके ही गृह जिले में पदस्थ अफसरों के परिवार राजधानी भोपाल के विकास में अवरोध बनकर अंगद के पैर जमाए दिखाई दे रहे हैं। मामला मेट्रो Metro Project ट्रेन के निर्माण कार्य से जुड़ा है जो पुरानी विधानसभा के सामने भोपाल विकास प्राधिकरण की बिल्डिंग से लेकर अरेरा हिल्स पुलिस थाना के बीच के निर्माणों से संबंधित है। यहां कई वकीलों के चैंबर और नोटरी संस्थान हैं जिनमें से अधिकांश ने निर्माण खुद तोड़ लिए हैं या प्रशासन ने उन्हें गिरा दिए हैं। करीब आधा दर्जन संस्थान अभी भी मौजूद हैं जिनको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है। वहां से गुजरने वाले लोग शासन-प्रशासन के रवैये पर सवाल तक उठाने लगे हैं। कहा जा रहा है कि यह मामला मुख्यमंत्री CM Mohan Yadav के गृह जिले में पदस्थ एक आला अफसर के परिवार से जुड़ा है और यह परिवार भाजपा की राजनीति में सक्रिय है। सवाल किए जा रहे हैं कि ऐसे में मुख्यमंत्री CM Mohan Yadav के अपने पैतृक संपत्ति के निर्माण को विकास के लिए गिराने की सहमति देने के प्रचार प्रसार को क्या माना जाए।
नेता प्रतिपक्ष से संपर्क…. मोबाइल बना बिजली या फोन कंपनी जैसा हेल्प लाइन नंबर …. बात नहीं संदेश से चलाइये काम
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh की जनता अगर सरकारी सिस्टम से परेशान होकर विपक्षी दल के नेता प्रतिपक्ष CLP के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहती है तो उसके लिए यह भी आसान नहीं है। कांग्रेस विधायक दल के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष CLP उमंग सिंघार के मोबाइल नंबर 9826040402 है। इस नंबर पर आप डायल करेंगे वहां उनसे सीधे संपर्क नहीं होगा। पहले तो आपको लंबा इंतजार करना होगा जिसमें रिकार्डे मैसेज महिला की सुरीली आवाज में सुनाई देगा, उमंग को कॉल करने के लिए धन्यवाद। उमंग आपके कॉल का जवाब जल्दी ही देंगे, कृपया लाइन पर बने रहे। कृपया लाइन पर बने रहें या थोड़ी देर बाद कॉल करें। इसके बाद महिला संदेश बताती है कि आप जिस व्यक्ति को कॉल कर रहे हैं वह उत्तर नहीं दे रहे है कृपया कुछ समय पश्चात कॉल करें। अगर पांच या छह बार डायल करने पर आपका कॉल कनेक्ट भी हो जाता है तो उस पर उनके विधानसभा क्षेत्र या भोपाल के लिए एक से लेकर नौ के बीच कौन सा बटन दबाएं, यह रिकार्डे संदेश सुनने को मिलेगा। कोई व्यक्ति अगर फोन उठा भी लेगा तो वह आज बात नहीं हो पाने का संदेश बताकर फोन डिस्कनेक्ट कर देगा। ऐसे में प्रदेश की जनता अपनी समस्या को किसके सामने सुनाए, यह आज विचारणीय सवाल है।
श्रेय की लड़ाई….कांग्रेस भाजपा के बीच ओबीसी घिरा….नेतृत्व दोनों दलों में फिर भी लाभ नहीं
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में पिछड़ा वर्ग OBC को 27 फीसदी रिजर्वेशन Reservation देने को लेकर सरकारें फैसला करती हैं मगर सत्ता परिवर्तन के बाद यह मामला ऐसा उलझता है या उलझाया जाता है कि ओबीसी OBC राजनीति दांवपेंच में घिर जाता है। राज्य में करीब ढाई दशक से ओबीसी नेतृत्व वाली सरकार है और विपक्ष में रहने वाले दलों में भी नेतृत्व ओबीसी OBC का रहता आया है। उमा भारती से लेकर बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान और अभी मोहन यादव तो विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस में अरुण यादव से लेकर जीतू पटवारी तो भाजपा में शिवराज सिंह चौहान भी पार्टी अध्यक्ष रहे। ये सभी ओबीसी OBC वर्ग से ही आते हैं। इस सबके बावजूद पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण Reservation दिलाने में सरकारों ने आधी अधूरी पहल की और नतीजा यह रहा कि अदालतों में मामला टिका ही नहीं। श्रेय लेने की होड़ में राजनीतिक दलों ने ओबीसी OBC को अधर में लटकाए रखा है और इस बार भी मोहन सरकार के अधिकारियों ने कथित रूप से तथ्यों को वैसे नहीं रखा जैसा रखा जाना चाहिए और हाईकोर्ट ने ओबीसी OBC के रिजर्वेशन को सही नहीं माना। इसको लेकर भाजपा, कमलनाथ सरकार को ओबीसी OBC आरक्षण Reservation लचर वैधानिक स्वरूप में लागू करने के लिए दोषी करार दे रही है तो कांग्रेस, भाजपा की मोहन सरकार पर अदालत के सामने सही तथ्य पेश नहीं करने के दोष मढ़ रही है। यही नहीं यही राजनीतिक दांवपेंच एकबार फिर अपनाए जा रहे हैं और अब यही मोहन सरकार ओबीसी OBC को आरक्षण Reservation देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करने जा रही है। अब कहा जाने लगा है कि जिस समाज से राजनीतिक दलों के नेता ऊपर तक पहुंचते हैं वे उसे भूल जाते हैं और कठपुतली की तरह पार्टी के ऐजेंडे को लागू करते हैं।
