मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में दिसंबर महीने में पुलिस Police के नए मुखिया DGP को लेकर कुछ दिनों से सुर्खियां बनी हुई हैं मगर इसके बाद भी शासन-प्रशासन ने इस तरफ चुप्पी साध रखी है और समाचारों को नजरअंदाज करने की कोशिशें हो रही हैं। इस बीच यह जरूर सामने आया है कि डीजीपी DGP कैलाश मकवाना चाहे एक दिसंबर को रिटायर हों या दो दिसंबर को मगर नए पुलिस Police मुखिया की कमान किसे मिलेगी दिल्ली ही तय करेगा। मामला दिल्ली के पास लंबित है और पैनल जा चुका है। पढ़िये रिपोर्ट।
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मध्य प्रदेश Madhya Pradesh के पुलिस महानिदेशक DGP कैलाश मकवाना का दो साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है और जैसे वे मुख्यमंत्री की पसंद के रूप में डीजीपी बने थे मगर इस बार यह जो भी बनेगा दिल्ली की पसंद का होगा। लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता और मकवाना के बीच आरोप-प्रत्यारोपों के दौरान उनकी ईमानदार छवि व उज्जैन के कनेक्शन की वजह से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव CM Dr Mohan Yadav ने उन्हें डीजीपी DGP बनाया था। मकवाना के दो साल के कार्यकाल समाप्त होने को लेकर कई तरह की बातें की जा रही हैं कि उनका रिटायरमेंट एक दिसंबर को होगा या दो दिसंबर को। इसके पीछे डीजीपी की दौड़ में शामिल अधिकारियों के अपनी दावेदारी बरकरार रखने की कवायद बताई जा रही है क्योंकि एक दिन आगे होने की वजह से डीजीपी की पैनल से 1991 बैच के आईपीएस जेल महानिदेशक वरुण कपूर बाहर हो सकते हैं। वहीं, राज्य शासन के जिम्मेदार अधिकारी इस सुर्खियों के बावजूद चुप्पी नहीं तोड़ रहे हैं। हालांकि डीजीपी की दौड़ में शामिल लोग कई तरह से उन तक सूचनाएं पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं और केंद्र व राज्य की पसंद को टटोलना चाह रहे हैं।
वैसे कहा जा रहा है कि 1991 बैच के दूसरे क्रम के अधिकारी महानिदेशक ईओडब्ल्यू उपेंद्र जैन केंद्र और राज्य दोनों की पसंद हैं। जैन के करीबी रिश्तेदार और मुख्य चुनाव आयुक्त CEC ज्ञानेश कुमार इस समय केंद्र सरकार के लिए अहम व्यक्ति हैं और सरकार उपेंद्र जैन को डीजीपी DGP बनाकर विपक्ष को संदेश दे सकती है कि ज्ञानेश कुमार को हटाएगी नहीं बल्कि उन्हें और मजबूत करेगी। इसी रह जैन राज्य सरकार के भी पसंदीदा अफसर माने जाते हैं क्योंकि वे मुख्यमंत्री CM Dr Mohan Yadav के गृह नगर उज्जैन के आईजी भी रह चुके हैं।
वहीं, कहा जा रहा है कि डीजीपी DGP की पैनल काफी समय पहले दिल्ली जा चुकी है और वहां से कभी भी भोपाल आ सकती है। मंत्रालय में पैनल का इंतजार है जिसमें तीन नाम भेजे जाने की बातें की जा रही हैं। ये नाम वरिष्ठता क्रम के हिसाब हो सकते हैं मगर डीजीपी का आदेश नवंबर महीने में दीपावली के बाद ही जारी होने की चर्चा है। तब तक कयासबाजी का दौर यूं चलता रहेगा और कई ख्याली पुलाव पकाते रहेंगे।
