कुरु कुरु स्वाहा के इस नियमित स्तंभ में इस बार हम आपको जो जानकारियां दे रहे हैं उनमें सबसे अहम जैन जी को लेकर है जिसका डर देश की सभी सरकारों में बैठता जा रहा है। दूसरी जानकारी में भाजपा की प्रदेश राजनीति में प्रतिद्वंद्वियों से किस तरह निपट रहा नेतृत्व, यह बताने का प्रयास है। साथ ही बताएंगे प्रदेश में ताकतवर लोगों पर एक्शन कराने के लिए कैसे पापड़ बेलने पड़ते हैं और फिर बताएंगे कि कांग्रेस का कैसे संवारा जा रहा है रूप। अंत में चलते चलते राजनेताओं के कुछ ऐसे ओहदों के बारे में बात करेंगे जो अनुशासन की पाठशाला भी हैं। इसके लिए आप हमारे साथ जुड़े रहिये। हमारे कुरु कुरु स्वाहा यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक व वेबसाइट को लॉगइन कर पढ़ते रहिये और उन्हें शेयर, लाइक व सब्सक्राइव कर हमें सहयोग कीजिए।
दिल्ली के बाद भोपाल पहुंचा जैन Z का डर …. जेन Z इंटर्न डॉक्टर के आंदोलन से पुलिस-प्रशासन व सरकार सहमी
देश में जेन Z जिस तरह शिक्षा और समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन की राह पकड़ने लगा है, उससे सरकारें सहमने लगी हैं। दिल्ली में नीट और अन्य पेपर लीक मामलों में जेन Z के आंदोलन ने केंद्र सरकार को उनकी मांगों को मानने के लिए मजबूर किया, वैसे ही अब राज्यों में यह आग भड़कने लगी है। जंतर मंतर पर सीजेपी ने जेन Z का नेतृत्व किया मगर राज्यों में जेन जी स्थानीय स्तर पर अपने समूहों के साथ अधिकारों की लड़ाई लड़ने लगे हैं। हाल ही में भोपाल में जेन Z इंटर्न डॉक्टरों ने अपने अधिकारों के लिए आधे शहर की गति को डेढ़ दिन तक थामकर रख दिया था। पुलिस और प्रशासन इस जेन Z को दिल्ली की तरह हल्के ढंग से ले रहे थे मगर एकबार फिर इन लोगों ने न केवल पुलिस व प्रशासन को घुटने टेकने के लिए मजबूर किया बल्कि सरकार को भी कुंभकर्णी निद्रा से जगाया। जेन जी का यह डर मध्य प्रदेश सरकार में इस कदर बैठा कि जिस मांग के लिए इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से मांग पत्र देकर थक गए थे, वह डेढ़ दिन के भीतर मानी ली गई। भोपाल के बाद जेन Z इंटर्न डॉक्टरों ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी अपनी आवाज अपने दम पर उठाई है। जेन जी को जागृत करने वाली सीजेपी अब अल्फा Z यानी स्कूली बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागृत करने में जुटा है।
इंदौर-दतिया के बाद सागर की राजनीति …. शराब कांड में एक्शन से निशाना फिर नेता पर
मध्य प्रदेश में राजनीति जिस तरह करवट ले रही है उससे लगता है कि प्रतिद्वंद्वियों को रास्ते से किनारे करने के लिए अपने आप ही राह तैयार हो रही है। मध्य प्रदेश भाजपा की राजनीति में यह ज्यादा दिखाई दे रहा है। इंदौर के सबसे पॉवरफुल समझे जाने वाले नेता कैलाश विजयवर्गीय जिस तरह मंत्री होने के बाद भी उनके लाचारी भरे बयान आ रहे हैं वे शक्तिशाली होते नेतृत्व के आगे उन्हें कमजोर साबित करते जा रहे हैं। सरकार इंदौर को नजरअंदाज कर जिस तरह उज्जैन को तव्वजो दे रही है, उसे वे अनुशासन की वजह से कड़वे घूंट की तरह पीने को मजबूर हैं। इसी तरह प्रदेश भाजपा के दूसरे बड़े नेता समझे जाते रहे पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा विधानसभा उपचुनाव में टिकट नहीं देने और हार के लिए उन्हें जिम्मेदार दिखाने की रणनीति से उन्हें किनारे किया जा रहा है। अब सागर शराब कांड में एक मंत्री गोविंद राजपूत निशाने पर दिखाई दे रहे हैं जिनके एक कथित समर्थक का नाम शराब कांड में आ रहा है। सरकार ने शराब कांड में त्वरित एक्शन के बहाने जांच घोषित करने और आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर व शार्ट एनकाउंटर का इस्तेमाल किया। यहां आपको बता दें कि गोविंद राजपूत केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कई बार सारथी बन चुके हैं। यानी भाजपा में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को किसी न किसी बहाने किनारे करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
गोलियां चलीं मगर राजधानी में ही दावे तार-तार …. एफआईआर लिखाने अधिकारियों के दरवाजे खटकाने पड़े
सरकारें जो भी रहें मगर सभी दावे करती हैं कि पुलिस थाने में हर पीड़ित की तुरंत सुनवाई होती है। यह दावे सरकारों में बैठे नेताओं के दलों से जुड़े व्यक्तियों के मामलों में तार-तार होते रहे हैं और भाजपा सरकार में भी कई बार ऐसे दावों की पोल खुल चुकी है। हाल ही में सरकार की नाक के नीचे भोपाल में भाजपा के एक नेता का नाम जब गोली चलने की घटना में जुड़ा तो पीड़ित को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने में कई पुलिस अधिकारियों के दरवाजे पर मस्तक टेकना पड़ा। जिन भाजपा नेताजी का घटना में नाम जुड़ा वे पार्टी के विधायक के भी खास बताए जाते हैं। घटना के साक्ष्य पीड़ित के घर के दरवाजे के सुराख बताए जा रहे हैं जिनमें एक दो नहीं करीब दर्जनभर गोलियों से छेद हुए। अलसुबह तीन बजे की इस घटना की रिपोर्ट दोपहर के बाद पुलिस थाने में दर्ज हुई जिसके बारे में यह कहा जा रहा है कि पीड़ित एसीपी से लेकर डीसीपी तक के दरवाजे पहुंचा। मगर तब भी सुनवाई नहीं हुई तो पुलिस कमिश्नर के पास पीड़ित व्यक्ति पहुंचा और तब पुलिस थाने में उसकी फरियाद सुनी गई।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय का कायाकल्प…. सजासज्जा के साथ अतिरिक्त कक्ष निर्माण
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के कमलनाथ सरकार के सवा साल को छोड़ दें तो 21 साल से ज्यादा समय से सत्ता से बाहर है मगर उसके प्रमुख मुख्यालय का कायाकल्प करने में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी दो साल से लगे हैं। पहले भू-तल से लेकर तीसरी मंजिल के कक्षों को संवारा गया तो अब मीटिंग हॉल को नया रूप दिया जा रहा है। 100 लोगों के बैठक व्यवस्था के साथ फर्नीचर से संवारते हुए आकर्षक बनाया जा रहा है। वहीं, पदाधिकारियों के बैठने के लिए अतिरिक्त कक्षों से चौथी मंजिल तैयार की जा रही है। हालांकि चौथी मंजिल अस्थायी स्ट्रक्चर से खड़ी की जा रही है मगर यहां इतने कक्ष तैयार किए जा रहे हैं कि जिम्मेदार पदाधिकारियों को पृथक कक्ष मिल सकें। यहां आपको बता दें कि कांग्रेस मुख्यालय का कायाकल्प कमलनाथ के कार्यकाल में भी हुआ था मगर बेसमेंट में बनाए गए कक्ष बारिश के पानी से भर गए थे और अभी भी जो काम चौथी मंजिल पर हो रहा नेताओं को परेशानियां ही देगा।
भारत स्काउट एवं गाइड्स को मिला नया मुख्य आयुक्त …. अशोक अर्गल फिर मिली कुर्सी
चलते चलते आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के भारत स्काउट एवं गाइड्स के मुख्य आयुक्त के रूप में अशोक अर्गल मिलने वाले हैं। इसके लिए चुनाव होने वाले थे लेकिन अशोक अर्गल का एकमात्र नामांकन पत्र वैध पाए जाने से अब 23 सितंबर को चुनाव के लिए मतदान की नियत तारीख को उनके नाम के ऐलान की औपचारिकता शेष रह गई है। अर्गल पांच बार सांसद रह चुके हैं और आपको यह भी बता दें कि वे एक बार पहले भी भारत स्काउट एवं गाइड्स के राज्य मुख्य आयुक्त रहे हैं। साथ ही यह भी खबर है कि भाजपा के भोपाल शहर के पूर्व अध्यक्ष सुमित पचौरी एकबार फिर आयुक्त बनने जा रहे हैं जिन्होंने मुख्य आयुक्त के लिए भी नामांकन पर्चा भरा था।
