कुरु कुरु स्वाहा के इस बार सोमवार के नियमित स्तंभ में हम आपको जो जानकारियां दे रहे हैं उनमें सबसे अहम मध्य प्रदेश Madhya Pradesh भाजपा BJP में फिर किस वरिष्ठ नेता का दर्द झलका। साथ ही बताएंगे नौकरशाह Bureaucrat की प्रयोगधर्मिता से सरकार कैसे घेरे में फंस रही। इसके अलावा मध्य प्रदेश Madhya Pradesh पुलिस के मुखिया की कुर्सी को लेकर चल रही चर्चाओं पर आधारित एक सूचना भी आपसे शेयर कर रहे हैं। इसी तरह प्रदेश के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की चर्चा भी करेंगे जो किस तरह खुद को चर्चा व संकट में डालते हैं। इसके लिए आप हमारे साथ जुड़े रहिये। हमारे कुरु कुरु स्वाहा यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक व वेबसाइट को लॉगइन कर पढ़ते रहिये और उन्हें शेयर, लाइक व सब्सक्राइव कर हमें सहयोग कीजिए।
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh भाजपा BJP की राजनीति में जिस तरह तीन साल से ताकतवर नेता अपनी उपेक्षा से घुटन महसूस कर रहे हैं, वह एकबार फिर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन BJP President Nitin Naveen के मंच पर दिखाई दी। मालवा में पार्टी के बड़े नामों में शामिल मंत्री कैलाश विजयवर्गीय Kailash Vijayvargiya पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान Ex CM Shivraj Singh Chouhan के समकक्ष नेता हैं मगर चौहान का जैसे जैसे मुख्यमंत्रित्वकाल आगे बढ़ा विजयवर्गीय Kailash Vijayvargiya और उन जैसे नेताओं के कद पर विपरीत असर दिखाई देता रहा। तीन साल पहले चौहान Ex CM Shivraj Singh Chouhan के चेहरे पर पार्टी ने चुनाव लड़ा मगर उन्हें केंद्रीय राजनीति की ओर शिफ्ट करके डॉ. मोहन यादव को कुर्सी दे दी गई। इसी चुनाव में पार्टी के एक अन्य दिग्गज गृह मंत्री रहे डॉ. नरोत्तम मिश्रा की हार हुई मगर विजयवर्गीय Kailash Vijayvargiya, प्रहलाद पटेल Prahlad Patel जैसे नेता जीते थे और इसके बाद भी उनमें से किसी को सीएम की कुर्सी नहीं मिल सकी। चौहान तो केंद्रीय नेतृत्व के आगे अभी नतमस्तक हैं और हाल ही में उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से प्रभावित होने का लंबा वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। उसमें उन्होंने 1991 के एक प्रसंग का हवाला देकर कहा है कि तब से वे मोदीजी से प्रभावित हैं। वहीं, कहा जाता है कि शेष अन्य नेता इन दिनों खुद को उपेक्षित जैसा मानते हैं जिसका प्रमाण समय समय पर उनके बयान या बॉडीलेंग्वेज से दिखाई भी दे जाता है। नरोत्तम मिश्रा को उपचुनाव में टिकट नहीं दिया जाना तो इंदौर की उपेक्षा कर विजयवर्गीय Kailash Vijayvargiya पर अप्रत्यक्ष चोट पहुंचाया जाना, यह राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हाल ही में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन BJP President Nitin Naveen इंदौर में पहुंचे तो मंच से विजयवर्गीय का दर्द फिर झलक उठा। आभार प्रदर्शन के दौरान कटाक्ष करते हुए उन्होंने कार्यक्रम के लिए मुख्य भूमिका निभाने वालों में जिस नेता का नाम लिया, उसको लेकर विजयवर्गीय ने कहा सीएम ने यह राज खोल दिया है कि कार्यक्रम में संबंधित नेता की मुख्य भूमिका रही। यानी कार्यक्रम में उनके योगदान को नकारे जाने पर विजयवर्गीय Kailash Vijayvargiya ने चुटकी ली। विजयवर्गीय Kailash Vijayvargiya की इस चुटकी को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल भी हो रहा है जिसमें विजयवर्गीय Kailash Vijayvargiya के बयान के साथ सीएम की नितिन नवीन के साथ हास्य मुद्रा को जोड़कर पेश किया जा रहा है।
पत्रकार के भेष में कौन …. सरकार से प्रश्न पूछने के बजाय पीड़ितों को मदद दिलाने पहुंचने वालों से सवाल
सरकार के प्रतिनिधि नौकरशाह Bureaucrat हैं जो इन दिनों सरकार के बचाव के लिए प्रयोगधर्मी होते जा रहे हैं। बालाघाट में इन प्रयोगधर्मी नौकरशाहों Bureaucrat ने ऐसा कुछ कर दिया जिससे मध्य प्रदेश की छवि राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकृत रूप में पहुंची है। बालाघाट में जहां आदिवासियों की मौतें हो रही थीं जिससे सरकार व प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे थे। इन मौतों के कारणों व पीड़ितों की मदद करने के बजाय सरकार के प्रयोगधर्मी नौकरशाहों Bureaucrat ने अपने पर होने वाले सवालों को पीड़ितों की सहायता करने और सरकार तक उनकी आवाज को पहूुंचाने वालों की तरफ मोड़ने के लिए नया हथकंडा अपनाया। कहा जा रहा है कि नौकरशाहों ने यूट्यूबर मीडिया में अपने कुछ लोगों का प्रवेश करा दिया। इन लोगों ने मीडियाकर्मी के साथ भीड़ में बाहर से पहुंचने वाले समाजसेवियों व विरोधी विचारधारा के नेताओं से देर से आने पर सवाल करना शुरू कर दिए। ये वीडियो जब वायरल हुए तो मध्य प्रदेश की छवि पर धब्बे लगे और सोशल मीडिया पर सरकार ही नहीं स्थानीय मीडिया की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाए जाने लगे। मीडियाकर्मियों ने बाद में पत्रकार के भेष में पहुंचने वाले ऐसे लोगों को लेकर अपनी आपत्ति मीडिया को देखने वाले विभाग के सामने नाराजगी भरे लहजे में भी रखी।
चर्चा से दूर होने का दर्द या चर्चा में बने रहने का तरीका …. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों की चर्चाएं
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh के पूर्व मुख्यमंत्रियों में मौजूदा नेता शिवराज सिंह चौहान Ex CM Shivraj Singh Chouhan , दिग्विजय सिंह Ex CM Digvijay Singh और Ex CM Uma Bharti उमा भारती हैं जिनमें से शिवराज सिंह चौहान Ex CM Shivraj Singh Chouhan तो केंद्रीय मंत्री हैं। वहीं, दिग्विजय सिंह कांग्रेस में किनारे कर दिए गए हैं तो उमा भारती Ex CM Uma Bharti की राजनीति भी 2005 के बाद से डांवाडोल है। यह कहा जाने लगा है कि अब ये तीनों पूर्व मुख्यमंत्री अपने आपको चर्चा में बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया पर ज्वलंत मुद्दों पर कंट्रोवर्सी वाले बयानों के माध्यम से खुद के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान Ex CM Shivraj Singh Chouhan ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होने का प्रमाण देने के लिए सोशल मीडिया पर 1991 की मुलाकात के प्रसंग का वीडियो बयान पोस्ट किया तो अपने परिवार की चर्चा के माध्यम से लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए बेटे की नन्हीं संतान को गणेश के जन्म की कथा सुनाने का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला है। वहीं, दिग्विजय सिंह Ex CM Digvijay Singh चर्चा में बने रहने के लिए खुद को ही राजनीतिक संकट में डालने लगे हैं जो कुछ महीने पहले उज्जैन में पत्रकार वार्ता लेने की घटना से साबित हो चुका है। उमा भारती भी इसी तरह सोशल मीडिया पर अपने आपको जिंदा रखने के लिए शराब जैसे मुद्दे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात व उसके बाद मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने राहुल गांधी को डोकरा कह कर चर्चा में बनाए रखने का प्रयास किया है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन तीनों नेताओं में शिवराज सिंह चौहान Ex CM Shivraj Singh Chouhan का राजनीतिक भविष्य अभी शेष नजर दिखाई देता है। दिग्विजय सिंह Ex CM Digvijay Singh की हाईकमान में पकड़ कमजोर होने से उनका राजनीतिक भविष्य ज्यादा लंबा नहीं बताया जा रहा है तो उमा भारती Ex CM Uma Bharti राजनीति व आध्यत्म के बीच सामंजस्य नहीं बैठा पाने से मौजूदा परिस्थितियों की राजनीति में फिट नहीं दिखाई देती हैं।
मध्य प्रदेश के अगले डीजी पर फिर चौंकाने वाला नाम …. कपूर, जैन, प्रज्ञा में से एक नाम
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh पुलिस MP POLICE के मुखिया की सीट को लेकर कयासों का दौर चल रहा है जिसमें 1991, 1992 और 1993 बैच IPS Batch के अधिकारियों के नाम केंद्रीय सहमति के लिए भेजे जाने की चर्चा है। इन बैचों के नौ अधिकारियों में तीन नामों का पैनल साथ में जाने की चर्चाएं जोरों से चल रही है। भारतीय पुलिस सेवा IPS के तीनों बैच में से 1993 बैच की सोनाली मिश्रा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और वे वहां महानिदेशक आरपीएफ हैं। शेष नौ अधिकारियों में 1991 बैच के तीनों अधिकारी वरुण कपूर, उपेंद्र जैन और प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव वरिष्ठता क्रम में सबसे ऊपर हैं। 1992 बैच के तीन पंकज श्रीवास्तव, आदर्श कटियार, अखेतो सेमा और 1993 बैच के दो अधिकारी अनिल कुमार व रवि कुमार गुप्ता ही इसके बाद बचते हैं। उपरोक्त आठों नामों में वरिष्ठता क्रम में वरुण कपूर सबसे आगे हैं मगर उनके नाम पर विचार की गुंजाइश कम है। इसी बैच की प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव कमलनाथ सरकार में मंत्रालय में अहम भूमिका में चुकी हैं। उपेंद्र जैन बैच में एक ऐसा नाम है जिस पर विचार किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि यह मामला सीधे मुख्यमंत्री की पसंद और नापसंद का माना जाता है तो अंतिम निर्णय उनका ही होगा।
महाराज के लिए संस्कार की पाठशाला …. भाजपा की महिला नेता ने सोशल मीडिया पर जताई जरूरत …. एक चेतावनी भी साथ
ग्वालियर राजघराने के कर्ताधर्ता व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक महिला नेता जो चांचौड़ा से पूर्व विधायक हैं ममता मीणा नाराज हैं। इसकी वजह वे बताती हैं सिंधिया का सामंती व्यवहार। कहती हैं कि वे खुद को महाराज कहलवाते हैं तो सभी महिलाओं को माता बहन बेटी के संबोधन के बजाय मेरी महिलाएं कहते हैं। बुजुर्गों को नाम से पुकारते हैं। ममता मीना कहती हैं कि यह अच्छे संस्कारों की निशानी नहीं है, इसलिए उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए संस्कार की पाठशाला लगवाने का आग्रह किया है। साथ ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री सिंधिया को जिले के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक का सम्मान करने तथा मतदाताओं के समस्याओं के हल नहीं होने पर वोट नहीं देने की चेतावनी पर निवेदन करने की नसीहत दिए जाने के व्यवहार में बदलाव लाने की जरूरत बताई। कहा नहीं तो कोई भी उन्हें चुनौती देने वाला दूसरा केपी यादव पैदा हो जाएगा।
