कुरु कुरु स्वाहा Kurukuruswaha के इस बार नियमित स्तंभ में हम आपको जो जानकारियां दे रहे हैं उनमें सबसे अहम एक महिला अधिकारी से जुड़ी है जो लगातार विवादों में रहने के बाद भी राजनीतिक व प्रशासनिक संपर्कों से चर्चा में हैं। दूसरी जानकारी सरकारी खजाने को भरने वाले दो विभागों से जुड़ी है जिनके गांधीवाद पर कमेंट भी हो चुके हैं। तीसरी सूचना एक नेताजी और उनकी पत्नी के बीच बड़ी दीवार से सोशल मीडिया पर नेताजी की छिछालेदारी होने से जुड़ी है तो एक अन्य जानकारी यह भी दे रहे हैं कि एक मंत्री जी के पारिवारिक सदस्य के किराये के मकान की तलाश से जुड़ी है। चलते चलते बताएंगे देश में इन दिनों चर्चा के केंद्र व्यक्ति के भोपाल कनेक्शन के बारें। इसके लिए आप हमारे साथ जुड़े रहिये। हमारे कुरु कुरु स्वाहा यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक व वेबसाइट को लॉगइन कर पढ़ते रहिये और उन्हें शेयर, लाइक व सब्सक्राइव कर हमें सहयोग कीजिए।
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh वित्त विभाग से दूसरे विभागों या सरकार की वित्त पोषित संस्थाओं में अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर जाते रहते हैं। इनका मुख्य कार्य विभाग या संस्थान के वित्त संबंधी मामलों को देखना और वित्तीय नियंत्रण बनाना होता है। इस तरह की प्रतिनियुक्ति पर रहने वाले अधिकारियों में एक महिला अधिकारी Lady officer अंजू सिंह भी हैं जो लगातार विवादों में रहती हैं। पाठ्य पुस्तक निगम में जब इनकी पोस्टिंग थी तो रिटायर कर्मचारियों के भुगतान से लेकर प्रिंटर्स के भुगतानों की फाइलों के लंबित रखने तक के आरोप लगे। यहीं उनका एक विवाद तब चर्चा में आया जब सरकारी रिकार्ड में पति का जो नाम दर्ज था, वह निगम में दिए गए डाक्यूमेंट से अलग पाया गया था। भुगतान व पति के दो अलग अलग विवादों का मामला स्कूल शिक्षा मंत्री के पास पहुंचा तो उनका तबादला करने की सिफारिश हुई और तब पीएचई विभाग में उन्हें भेज दिया गया। पीएचई में अंजू सिंह आईं तो विभाग प्रमुख यानी प्रमुख अभियंता से ही टकरा गईं। ठेकेदारों के भुगतान व टेंडर की फाइल पर टकराव होने पर एक बार फिर तबादले के सहारे राजीव गांधी प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय में उन्हें भेज दिया गया है। कहा जाता है कि हर विवाद में उन्हें सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री व एक सीनियर महिला आईएएस अधिकारी Lady officer सहारा देते हैं और फिर बात तबादले से समाप्त हो जाती है।
सरकार के दुधारू विभागों पर दाग ही दाग …. आरटीओ के बाद आबकारी अफसर घेरे में
राज्यों में आबकारी Excise और परिवहन Transport जैसे विभाग सरकारी खजाने को भरने के अलावा उससे जुड़े लोगों के लिए इन दुधारू विभागों माने जाते हैं। यह बात केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी Nitin Gadkari ने हाल ही में मध्य प्रदेश Madhya Pradesh मेें भोपाल के एक सार्वजनिक मंच पर परिवहन Transport के अधिकारियों की ओर इशारा करते हुए कह भी दी थी। उन्होंने परिवहन Transport अधिकारियों को तंज कसते हुए गांधीवादी बताया और कहा कि गांधी का नोट देखकर वे दस्तावेज नहीं देखते ठप्पे पर ठप्पे लगाते जाते हैं। अब राज्य के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा Jagdish Dewada ने अपने ओएसडी दीपम रायचुरा के खिलाफ सहायक आबकारी Excise अधिकारी रहते हुए पैसे लेकर ठेके देने के आरोप लगने का आधार बताते हुए उन्हें स्टाफ से हटा दिया है। देवड़ा Jagdish Dewada ने रायचुरा को हटाकर यह बताने का प्रयास किया है कि वे दागदार लोगों पर तत्काल एक्शन लेते हैं मगर मामला उनके विभाग से जुड़ा है और राजधानी में ही अगर शराब ठेकों में लेन देन हो रहा है तो देवड़ा इससे बच कैसे सकते हैं। इन दोनों मामलों में यह साफ है कि दिल्ली से लेकर भोपाल तक सब जानते हैं कि कौन कौन गांधी नोट के सहारे काम कर रहा है मगर ऐसे लोगों की सफाई कहां से और कौन करेगा, यह शुरुआत कोई करने को तैयार नहीं है।
नेताजी की पत्नी ने फिर पोस्ट कर डिलीट किया …. खराब पति और पिता बताकर आत्महत्या के प्रेरित करने के आरोप
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh के एक वरिष्ठ नेताजी की पत्नी ने एकबार फिर अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर एक पोस्ट कर उसे डिलीट कर दिया है। यह पोस्ट नेताजी के खटास भरे पारिवारिक संबंधों वाली थी। नेताजी की पत्नी ने उन्हें खराब पति और पिता बताते हुए आत्महत्या Suicid के लिए प्रेरित करने के आरोप लगाए। साथ ही उनके चरित्र पर भी टिप्पणी की है। वैसे नेताजी के सितारे इन दिनों गर्दिश में चल रहे हैं और उनकी पत्नी काफी समय से उनके साथ नहीं रह रही हैं। डिलीट की गई पोस्ट में इस बार उन्होंने पति ही नहीं उनके आसपास रहने वाले लोगों के चरित्र पर भी भद्दी टिप्पणी की है। यहां आपको बता दें कि यह नेताजी वैसे तो खुद को ग्वालियर-चंबल के बताते हैं मगर राजनीति बुंदेलखंड से करते हैं और भोपाल उनकी कर्मस्थली है।
किस मंत्री के बेटे की बंगले पर एंट्री नहीं …. किराये के मकान की करते रहे तलाश
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh सरकार की छवि पर दाग लगने से बचाने के लिए कथित रूप से एक गैर राजनीतिक संगठन सिफारिशें करता रहता है। इस संगठन की सिफारिश को मानना सरकार की बाध्यता भी माना जाता है। मंत्रियों के परिजनों या स्टाफ की शिकायतें चर्चा में आने के बाद यह संगठन अपने स्तर पर जांच पड़ताल करता है और फिर सरकार की छवि को साफ रखने के लिए सिफारिशें करता है। एक वरिष्ठ मंत्री के मामले में संगठन दो सिफारिशें कर चुका है जिसमें से एक उनके बेटे से जुड़ी थी। कहा जाता है कि मंत्री पुत्र को बंगले पर एंट्री की मनाही कर दी गई है। अब इस मंत्री पुत्र को राजधानी में ठिकाना चाहिए था तो उनके लिए किराये का मकान तलाशने का जिम्मा उनसे जुड़े एक गैर राजनीतिक व्यक्ति को सौंप दिया गया।
ज्ञानेश कुमार का भोपाल कनेक्शन …. जानिये प्रदेश के आईपीएस अधिकारी से नजदीकी रिश्ता
भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार CEC Gyanesh Kumar की इन दिनों देश के हर कोने में चर्चा है मगर मध्य प्रदेश Madhya Pradesh के भोपाल से भी उनका कनेक्शन बताया जा रहा है। यह कनेक्शन सीधा नहीं है बल्कि मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी IPS Officer के माध्यम से है। आईपीएस अधिकारी IPS Officer की बहन ज्ञानेश कुमार की पत्नी हैं यानी ज्ञानेश जी CEC Gyanesh Kumar मध्य प्रदेश के आईपीएस IPS Officer परिवार के जमाईराजा हैं। यहां उल्लेखनीय है कि आईपीएस अधिकारी का नाम मध्य प्रदेश के अगले डीजीपी के लिए चर्चा में है क्योंकि कैलाश मकवाना DGP Kailash Makwana दिसंबर 2026 में रिटायर होने वाले हैं। प्रदेश में इस समय 1991 बैच सहित अन्य बैच के अधिकारियों की सूची तैयार हो रही है जिसमें से तीन नामों की पैनल में से मकवाना DGP Kailash Makwana के बाद कौन बनेगा डीजीपी तय होगा। ज्ञानेश जी के साले साहब प्रदेश के सीनियर आईपीएस IPS Officer हैं लेकिन उनके आगे भी कुछ नाम हैं। मगर इसके बाद भी उनका नाम दौड़ में सबसे आगे हो गया है।
