कुरु कुरु स्वाहा Kurukuruswaha के इस बार नियमित स्तंभ में हम आपको जो जानकारियां दे रहे हैं उनमें सबसे अहम मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में बर्थडे विज्ञापन इनवेस्टमेंट की होड़ मचने की है जिसमें इस बार एक राज्यमंत्री ने दो कैबिनेट मंत्री को पीछे छोड़ दिया है। वहीं दूसरी जानकारी बालाघाट और सागर की दो घटनाओं से जुड़ी है जिसमें सरकार-प्रशासन के बीच संवाद की कमी का नतीजा माने की बात कही जा रही है। तीसरी सूचना राजनीतिक दलों में लक्ष्मी और सरस्वती जी के बीच चल रहे कॉम्पिटिशन को लेकर दे रहे हैं और फिर बताएंगे भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी रहे आशीष अग्रवाल की दिल्ली में लक्ष्य भेदी उड़ान के बारे में। चलते चलते बताएंगे आईपीएस एसोसिएशन की कांग्रेस नेता की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया और भाजपा के केंद्रीय नेता के व्यवहार पर मौन के बारे में। इसके लिए आप हमारे साथ जुड़े रहिये। हमारे कुरु कुरु स्वाहा यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक व वेबसाइट को लॉगइन कर पढ़ते रहिये और उन्हें शेयर, लाइक व सब्सक्राइव कर हमें सहयोग कीजिए।
इन दिनों नेताओं के जन्मदिन पर शहरों में बड़े बड़े विज्ञापन लगाकर बधाई संदेश देने का रिवाज बढ़ गया है। इसमें भी उन नेताओं के लिए ज्यादा विज्ञापन की होड़ रहती है जो सरकार में हैं। कहा जा रहा है कि बर्थडे विज्ञापन वाकई में नेताजी का आदर व सम्मान के लिए होते हैं या यह बर्थडे इनवेस्टमेंट है। लाखों रूपए के विज्ञापन देने वाले व्यक्ति अपने परिवार के माता-पिता या सगे संबंधियों के लिए कभी ऐसे विज्ञापन देकर जन्मदिन नहीं मनाते हैं तो नेताजी के प्रति सह्रदयता कैसे जागती है। इसे इनवेस्टमेंट इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि शासन-प्रशासन में नेताजी के निकटतम संबंध का भी यह प्रचार का तरीका होता है। प्रचार के सहारे व्यापारिक गतिविधियों में मदद ली जाती है। अब इस इनवेस्टमेंट में मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में पिछले दिनों एक आकलन किया गया तो पता चला कि राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विश्वास सारंग को पीछे इस मामले में छोड़ दिया है। गौर के जन्मदिन पर विज्ञापन इनवेस्टमेंट करने वालों ने एक ही समाचार पत्र में तीन पेज का विज्ञापन दे दिया तो विजयवर्गीय के जन्मदिन पर इंदौर में एक अखबार में एक पेज का तो सारंग के जन्मदिन पर एक समाचार पत्र में दो पेज के अलावा एक अन्य छोटा विज्ञापन देकर नेताओं के निकट संबंधों का इजहार किया गया था। यह विज्ञापन भी उस समाचार पत्र में दिए गए जिसमें सुना गया है कि इन दिनों भाजपा की सरकार के सीमित विज्ञापन नीति अपनाई जा रही है।
कलेक्टर-कमिश्नर-एसपी-आईजी कांफ्रेंस कब….सरकार-प्रशासन में संवाद की कमी….बालाघाट-सागर कांड में प्रदेश की बिगड़ी छवि
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh की मोहन सरकार में कलेक्टर, कमिश्नर, एसपी, आईजी कांफ्रेंस को टाला जा रहा है जिससे सरकार और प्रशासन के बीच संवाद की कमी स्पष्ट दिखाई देने लगी है। कांफ्रेंस होने से सरकार और प्रशासन के बीच एक संवाद होता है जिससे मैदानी अधिकारियों को सरकार क्या चाहती है और उसके लिए क्या करना है, यह संदेश पहुंचता है। हाल ही में जिस तरह मध्य प्रदेश की राष्ट्रीय स्तर पर छवि खराब हुई वह संवाद की कमी ही रही है। बालाघाट में आदिवासी समुदाय के लोगों की मौत की घटना हुई जिसमें स्थानीय प्रशासन नाकाम साबित हुआ तो सागर में जहरीली शराब कांड हुआ और उसमें भी कई लोग मारे गए। सागर में भी पुलिस अधिकारियों के साथ जिला प्रशासन के अधिकारियों की वजह से स्थिति बदतर हुई। इन दो मामलों के अलावा इंदौर में कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के स्थान की अनुमति को लेकर जिस तरह स्थानीय अधिकारियों ने रणनीति अपनाई उसका नकारात्मक पक्ष लोगों तक पहुंचा और कार्यक्रम में आई उम्मीद से ज्यादा भीड़ ने सरकार के रवैये से मन में धारणा बनाई। इसलिए कहा जा रहा है कि कुछ दशकों से सरकार और प्रशासन के बीच संवाद के लिए आयोजित होने वाली कलेक्टर-एसपी कांफ्रेंस आज की जरूरत बन चुकी हैं।
राजनीतिक दलों में इन दिनों लक्ष्मी और सरस्वती में कॉम्पिटिशन …. समाज के बदलते व्यवहार का असर
राजनीति में आने वालों के बीच लक्ष्मी और सरस्वती को लेकर इन दिनों स्पष्ट रूप से कॉम्पिटिशन दिखाई देने लगा है। राजनीतिक दलों में आने वालों में लक्ष्मी के भंडार वाले नेताओं की जो कदर होती है वह समाज के लिए कुछ करने के लिए राजनीति में उतरने वालों की नहीं होती है। करीब तीन दशक से पार्टियों में मीडिया विभाग को सशक्त होते देखा गया है और शुरूआत में इस विभाग में विचारवान नेताओं को ज्यादा मौके दिए जाते थे। इसके पीछे माना जाता है कि पार्टियों की भावना यह रहती रही कि मीडिया में पार्टी की विचारधारा व उनकी सरकारों के कामों को अच्छी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। इस बीच इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आया जिसने डिबेटों में पार्टियों के मीडिया विभाग के प्रवक्ताओं को बुलाया जाने लगा। इनमें विभिन्न मुद्दों पर पार्टी के विचार घर घर तक पहुंचने लगे जिसे बाद में रीजनल चैनलों के माध्यम से प्रदेश के अपने अपने स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया समूह ने शुरू किया। भाजपा में प्रभात झा, लोकेंद्र पाराशर जैसे मीडिया से जुड़े रहने वाले नेताओं सहित डॉ. हितेश बाजपेयी, आशीष अग्रवाल आदि ने प्रदेश में यह भूमिका निभाई तो कांग्रेस में मानक अग्रवाल, केके मिश्रा, मुकेश नायक निभा रहे हैं। इनमें से ज्यादातर नेताओं को अक्सर मुद्दों पर डिबेट में भाग लेते देखा गया मगर भाजपा में कुछ सालों में यह बदलाव आया। मीडिया विभाग में प्रभारी की भूमिका बदली और डिबेट में प्रवक्ताओं को ड्यूटी लगाने, नेताओं के साथ मंच शेयर करने तक उन्होंने खुद को सीमित कर लिया।
डेढ़ दशक में ग्वालियर से दिल्ली का सफर….तोमर के सहारे भोपाल आए फिर खुद दिल्ली तक का सपना पूरा किया
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh भाजपा के मीडिया विभाग में दो प्रदेश अध्यक्षों के साथ काम करने वाले प्रभारी आशीष अग्रवाल का डेढ़ साल का राजनीति का सफर ग्वालियर से दिल्ली तक पहुंच गया है। कहा जाता है कि वे लक्ष्य साधकर ही काम करते रहे हैं। देखा गया है कि उनके राजनीतिक सफर में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का उल्लेखनीय योगदान रहा है। तोमर उन्हें राजनीति में रियल एस्टेट कारोबार से अपने साथ लेकर आए थे और आज भी उनके परिवार का रियल एस्टेट का कारोबार है। तोमर के सहारे भोपाल तक आए आशीष ने इसके बाद अपनी लाइन खुद आगे बढ़ाई। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कभी राजनीतिक दांवपेंच नहीं खेला मगर पार्टी के बड़े नेताओं के संपर्क के बाद उनके साथ लगातार बने रहने की आदत ने उन्हें ग्वालियर से भोपाल के रास्ते दिल्ली का सफर पूरा कराया। भाजपा नेतृत्व ने पहले उन्हें मीडिया विभाग का सह संयोजक बनाया और सवा महीने में ही संयोजक बनाकर मध्य प्रदेश के इस नेता को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी। मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया विभाग के किसी भी प्रभारी को ऐसे जिम्मेदारी आज तक नहीं मिली हैं। यह जरूर है कि प्रभात झा ने मीडिया प्रभारी होने के बाद न केवल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बल्कि राज्यसभा सदस्य तक का सफर पूरा किया था और उनकी जैसी उपलब्धि पाने के लिए अग्रवाल को संयोजक के रूप में कड़ी मेहनत करना होगी।
एसोसिएशन का दोहरा चरित्र….कांग्रेस नेता की टिप्पणी पर आपत्ति और सिंधिया के व्यवहार पर मौन
मध्य प्रदेश Madhya Pradesh में पिछले दिनों दो घटनाएं सामने आईं जो दो बड़े नेताओं से जुड़ी हैं। पहली घटना इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के पूर्व मंच व्यवस्था देखने पहुंचे पुलिस के एक आला अधिकारी पर पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा की अभद्र टिप्पणी संबंधी है। उन्होंने पुलिस अधिकारी को अपने आपको सिंघम नहीं समझने और बाप का कार्यक्रम नहीं है, जैसी टिप्पणी की थी। दूसरी घटना केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से संबंधित है जिसमें गुना जिले में वे भीड़ के बीच एसपी कलेक्टर के दिखाई नहीं देने पर जिस ढंग से उन्होंने संबोधित किया और उन्हें निर्देश दिए वे गरिमा के अनुकूल नहीं था। ये दोनों ही घटनाएं निंदनीय मानी जा रही हैं लेकिन मध्य प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन ने सज्जन सिंह वर्मा की टिप्पणी को तो अशोभनीय बताते हुए उन्हें लोकसेवकों को संयमित व्यवहार करने की नसीहत दे डाली मगर सिंधिया के मामले में संगठन का मौन रहा है। आखिर गलत को गलत कहने में अखिल भारतीय सेवा की एसोसिएशन को संकोच है या कोई डर।
